{"_id":"645a9a4a773d4c908c0cbe74","slug":"sealing-case-the-then-sdm-and-naib-tehsildar-under-siege-deoria-news-c-7-1-158941-2023-05-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीलिंग प्रकरण : तत्कालीन एसडीएम और नायब तहसीलदार घेरे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीलिंग प्रकरण : तत्कालीन एसडीएम और नायब तहसीलदार घेरे में
Wed, 10 May 2023 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 10 May 2023 12:38 AM IST
विज्ञापन
करोड़ों की सरकारी भूमि नियमों की अनदेखी कर दूसरे के नाम की
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सीलिंग में निकली करोड़ों की भूमि नियमों की अनदेखी कर दूसरे के नाम करने वाले रुद्रपुर के तत्कालीन एसडीएम और नायब तहसीलदार पर कार्रवाई हो सकती है। मुख्य राजस्व अधिकारी ने विभागीय कार्रवाई के लिए ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है, जांच आख्या में उन्हें दोषी ठहराया गया है।
रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की भूमि सीलिंग में निकली थी। इस भूमि को तत्कालीन एसडीएम राकेश कुमार और नायब तहसीलदार ने धारा-34 एवं 229 बी के तहत दूसरे के नाम कर दिया है। इसका खुलासा कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वृजबांके तिवारी की शिकायत पर हुआ है। पूरे मामले की जांच कर रहे हैं, मुख्य राजस्व अधिकारी रजीनश राय ने जांच की तो बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच अधिकारी ने उपजिधिकारी के नौ वादों में किए गए भूमि नामांतरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। मामले में वर्ष 2017 से लंबित रिकाॅल आवेदन में भी निर्णय पारित करने का निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश जोत सीमा आरोपण अधिनियम- 1960 तीन जनवरी 1961 को लागू हुआ था। इसके बाद अतिरिक्त भूमि निर्धारण की कार्रवाई शुरू की गई। इस अधिनियम के तहत रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम जंगल तरैनी में 35.18 एकड़, परसा जोकहा में 0.66 एकड़ भूमि 13 जनवरी 1989 को सरकारी घोषित हो गई। इसके अलावा भी तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों के 7.30 एकड़ से अधिक भूमि सीलिंग के तहत निकल गई। इन जमीनों पर कुछ लोग नजर गड़ाए थे। अफसरों की मिलीभगत से धारा-34 और 229 बी के तहत उक्त भूमि दूसरे के नाम कर दिया गया है। कुल नौ वादों में वर्ष 1994 से लेकर जून 2022 तक नामांतरण करने का आदेश किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि करोड़ों रुपये की भूमि को मनमाने तरीके से अफसरों की मिलीभगत से बंदरबांट कर दिया गया है।
कोट
डीएम के निर्देश पर सीलिंग भूमि के नामांतरण के मामले की जांच की गई है। नौ वादों में तत्कालीन एसडीएम और नायब तहसीलदार ने नियमों की अनदेखी कर नामांतरण का आदेश पारित किया था। जो निरस्तर कर दिया गया। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। रजीनश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सीलिंग में निकली करोड़ों की भूमि नियमों की अनदेखी कर दूसरे के नाम करने वाले रुद्रपुर के तत्कालीन एसडीएम और नायब तहसीलदार पर कार्रवाई हो सकती है। मुख्य राजस्व अधिकारी ने विभागीय कार्रवाई के लिए ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है, जांच आख्या में उन्हें दोषी ठहराया गया है।
रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की भूमि सीलिंग में निकली थी। इस भूमि को तत्कालीन एसडीएम राकेश कुमार और नायब तहसीलदार ने धारा-34 एवं 229 बी के तहत दूसरे के नाम कर दिया है। इसका खुलासा कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वृजबांके तिवारी की शिकायत पर हुआ है। पूरे मामले की जांच कर रहे हैं, मुख्य राजस्व अधिकारी रजीनश राय ने जांच की तो बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच अधिकारी ने उपजिधिकारी के नौ वादों में किए गए भूमि नामांतरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। मामले में वर्ष 2017 से लंबित रिकाॅल आवेदन में भी निर्णय पारित करने का निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश जोत सीमा आरोपण अधिनियम- 1960 तीन जनवरी 1961 को लागू हुआ था। इसके बाद अतिरिक्त भूमि निर्धारण की कार्रवाई शुरू की गई। इस अधिनियम के तहत रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम जंगल तरैनी में 35.18 एकड़, परसा जोकहा में 0.66 एकड़ भूमि 13 जनवरी 1989 को सरकारी घोषित हो गई। इसके अलावा भी तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों के 7.30 एकड़ से अधिक भूमि सीलिंग के तहत निकल गई। इन जमीनों पर कुछ लोग नजर गड़ाए थे। अफसरों की मिलीभगत से धारा-34 और 229 बी के तहत उक्त भूमि दूसरे के नाम कर दिया गया है। कुल नौ वादों में वर्ष 1994 से लेकर जून 2022 तक नामांतरण करने का आदेश किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि करोड़ों रुपये की भूमि को मनमाने तरीके से अफसरों की मिलीभगत से बंदरबांट कर दिया गया है।
विज्ञापन
कोट
डीएम के निर्देश पर सीलिंग भूमि के नामांतरण के मामले की जांच की गई है। नौ वादों में तत्कालीन एसडीएम और नायब तहसीलदार ने नियमों की अनदेखी कर नामांतरण का आदेश पारित किया था। जो निरस्तर कर दिया गया। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। रजीनश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी
विज्ञापन