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Deoria News: आर्द्र क्षेत्र को बचाएं ताकि सुरक्षित रहे जीव-जंतुओं का कल
Thu, 02 Feb 2023 10:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 02 Feb 2023 10:45 PM IST
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आर्द्रभूमि दिवस पर महादेव ताल परिसर में कार्यक्रम आयोजित, किया गया जागरूक
बरहज/गड़ेर। क्षेत्र के महादेव ताल परिसर में वन विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को वेटलैंड डे के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें अधिकारियों ने लोगों को प्राकृतिक संपदाओं और प्रवासी-अप्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी देते हुए जागरूक किया। बताया कि आर्द्र क्षेत्र को बचाकर कई जंतुओं और पक्षियों की रक्षा की जा सकती है। आर्द्रभूमि दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रभागीय निदेशक जगदीश आर ने कहा कि 1997 में पहली बार यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसका उद्धेश्य वेटलैंड पानी को प्रदूषित होने से बचाना है। यह जंतु ही नहीं, बल्कि पौधों के लिए एक समृद्ध तंत्र है। यहां कई उपयोगी वनस्पतियां और औषधीय पौधे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। उनका प्रयोग कई आवश्यक कार्यों में किया जाता है। प्रभागीय निदेशक ने दूरबीन के जरिए प्रवासी-अप्रवासी पक्षियों का आकलन किया। ताल में साइबेरियन, लालसर, सारस सहित दर्जनों प्रजाति के पक्षी पाए गए।
कार्यक्रम में स्कूली छात्रों और ग्रामीणों को आर्द्रभूमि पारिस्थितिकीय तंत्र को संतुलित रखने के बारे में जागरूक किया गया, ताकि उन्हें विलुप्त होने से बचाया जा सके। इस मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी बरहज रवींद्र सिंह, देवरिया विजय मौर्य, सलेमपुर सुधीर, ओंकार द्विवेदी, राजकुंवर सिंह, अनूप कुमार, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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बरहज/गड़ेर। क्षेत्र के महादेव ताल परिसर में वन विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को वेटलैंड डे के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें अधिकारियों ने लोगों को प्राकृतिक संपदाओं और प्रवासी-अप्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी देते हुए जागरूक किया। बताया कि आर्द्र क्षेत्र को बचाकर कई जंतुओं और पक्षियों की रक्षा की जा सकती है। आर्द्रभूमि दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रभागीय निदेशक जगदीश आर ने कहा कि 1997 में पहली बार यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसका उद्धेश्य वेटलैंड पानी को प्रदूषित होने से बचाना है। यह जंतु ही नहीं, बल्कि पौधों के लिए एक समृद्ध तंत्र है। यहां कई उपयोगी वनस्पतियां और औषधीय पौधे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। उनका प्रयोग कई आवश्यक कार्यों में किया जाता है। प्रभागीय निदेशक ने दूरबीन के जरिए प्रवासी-अप्रवासी पक्षियों का आकलन किया। ताल में साइबेरियन, लालसर, सारस सहित दर्जनों प्रजाति के पक्षी पाए गए।
कार्यक्रम में स्कूली छात्रों और ग्रामीणों को आर्द्रभूमि पारिस्थितिकीय तंत्र को संतुलित रखने के बारे में जागरूक किया गया, ताकि उन्हें विलुप्त होने से बचाया जा सके। इस मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी बरहज रवींद्र सिंह, देवरिया विजय मौर्य, सलेमपुर सुधीर, ओंकार द्विवेदी, राजकुंवर सिंह, अनूप कुमार, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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