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गहराने लगा 1998 की तरह बाढ़ का संकट, दोआबा के 52 और कछार के 64 गांवों के लोग दहशत में

Thu, 26 Aug 2021 12:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 12:00 AM IST
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rapti cutting fast, sarayoo river increasing
गहराने लगा 1998 की तरह बाढ़ का संकट, दोआबा के 52 और कछार के 64 गांवों के लोग दहशत में
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रुद्रपुर। गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि से वर्ष 1998 की तरह प्रलयकारी बाढ़ का संकट गहराने लगा है। दो दिन से दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदियों का जलस्तर लाल निशान को पार कर जाने से दोआबा के 52 और कछार के 64 गांवों के लोग दहशत में हैं।
राप्ती नदी के तट पर बसा भेड़ी गांव के पास ठोकर धंसने से बंधे के अंदर कटान हो रही है। यहां नदी के तटवर्ती इलाके में बसे गांव वालों को तहसील प्रशासन ने मकानों को खाली करने का निर्देश दिया है। दोनों नदियां खतरे के निशान 70.50 मीटर से करीब 50 सेमी ऊपर चली गई हैं। गोर्रा नदी सिलहटा के पास तेजी से कटान कर रही है। यहां पायलट प्रोजक्ट पूरी तरह चौपट हो गया है। बुधवार को सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने राप्ती और गोर्रा नदी पर बने तटबंधों पर कटान स्थलों का निरीक्षण किया। कहा कि सिंचाई विभाग बचाने के नाम पर गांव को डूबाने की तैयारी कर रहा है। सिलहटा में पायलट प्रोजेक्ट बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये पानी में बहा दिए गए। यहां पुराने बांध की मिट्टी हटाकर बिछाने से बांध कमजोर हो गया है। नदी बांध को क्षतिग्रस्त करती जा रही है। पानी बढ़ने के बाद प्रोजेक्ट पर काम करने वाली संस्था फरार हो गई है। भेड़ी में बांध की मिट्टी काट कर ठोकर बनाने से बांध कमजोर हो गया है। यहां ठोकर धसकर नीचे जा रहा है। गांव की करीब 5000 की आबादी के अस्तित्व पर बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। नदी का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ा तो 1998 से भी भयानक मंजर उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से कटान स्थलों पर तत्काल बचाव कार्य शुरू करने की मांग की। इस बाबत एसडीओ दीनदायाल दूबे ने कहा कि तटबंधों की निगरानी हो रही है। सभी बांध सुरक्षित हैं। अभी तक बांध पर कोई खतरा नहीं है।
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भागलपुर में 24 घंटे में 5 सेंटीमीटर बढ़ी सरयू
भागलपुर। सरयू नदी ने उग्र रूप रूप ले लिया है। नदी के जल स्तर में 24 घंटे में 5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। इससे तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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केंद्रीय जल आयोग कुर्ती पार के अनुसार रेगुलेटर पर बुधवार को दोपहर 2 बजे नदी का जलस्तर 65 मीटर 15 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। खतरे के निशान से नदी 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी में बढ़ोतरी जारी है। आयोग ने अगले 24 घंटे जलस्तर में वृद्धि की संभावना जताई है। महीने भर से खतरे के निशान से उपर बह रही नदी के तेवर और तल्ख हो गए हैं। नदी का पानी बढ़ने से तटवर्ती गांव के लोगों में दहशत व्याप्त है। केंद्रीय जल आयोग तुर्तीपार के जे ई ने बताया कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है, निगरानी रखी जा रही है। कर्मचारियों को सतर्क कर दिया गया है।
पानी से घिरा देवरहा बाबा आश्रम, गायों के चारे का संकट
भागलपुर। सरयू नदी की लहरों ने देवरहा बाबा आश्रम की तरफ रुख कर लिया है। आश्रम पानी से घिरने लगा है। आश्रम पर मौजूद गायों के लिए चारा का संकट पैदा हो गया है। आश्रम पर जाने वाली सड़क के ऊपर से पानी बह रहा है। जिससे आश्रम से लोगों का संपर्क टूट चुका है। आश्रम के महंत श्यामसुंदर दास ने बताया कि प्रशासन के लोग आज तक यहां नहीं आए। गायों के चारे का संकट पैदा हो गया है। प्रशासन के लोगों को गायों की चारा और तीन से चार नाव की व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे गांवों तक पहुंचाना आसान रहे।
बरहज में खतरे के निशान से एक मीटर 23 सेमी ऊपर बह रही नदी
बरहज। सरयू नदी में सैलाब उमड़ आया है। जिससे तटवर्ती गांवों के लोगों में दहशत है। नदी के जलस्तर में पिछले दो दिनों से 10-10 सेमी का इजाफा दर्ज किया जा रहा है। मौजूदा हाल में सरयू खतरे के निशान से एक मीटर 23 सेमी ऊपर बह रही है।
बुधवार को सरयू खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर 23 सेमी ऊपर 67.73 पर बह रही थी। नदी में उमड़ रहे सैलाब से बाढ़ का पानी रामजानकी मार्ग स्थित नौकाटोला में गनेश मणि के सागौन के बागीचा, जबकि कपरवार-रुद्रपुर मार्ग पर बिनवापुरी के निकट तेलियां बारी तक पहुंच गया है। जलस्तर में निरंतर हो रही वृद्धि से तटवर्ती गांवों के लोगों की नींदे उड़ गई हैं। सरयू में बाढ़ आने के कारण राप्ती भी उफान पर है। जिससे भदिला प्रथम गांव टापू बना हुआ है। वहीं गोरखपुर जनपद के विस्थापित कोलखास गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। सरयू नदी पार परसियां-विशुनपुर देवार के कत्लहिया, जरलहवा, स्कूलहिया, आदित्य सहित 10 टोले बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जान जोखिम में डाल लोग जरुरत के सामानों के लिए मझोली नाव से सफर करने पर मजबूर हैं। नदी में आए सैलाब से नगर के आजाद दक्षिण, पटेल नगर पूर्वी, जहांज घाट सहित कुछ अन्य जगहों पर नदी का पानी पहुंच गया है। हालांकि नदी के तेवर को देख प्रशासन ने 12 बाढ़ चौकियों और आश्रय स्थलियों को अलर्ट कर दिया है। एसडीएम संजीव कुमार यादव ने बताया कि नदी के जलस्तर में निरंतर बढ़त दर्ज किया जा रहा है। बाढ़ जैसी संभावनाओं को लेकर तैयारी पूर्ण कर ली गई है।

मवेशियों को उचित स्थान पर ले जाने लगे हैं बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण
बरहज। सरयू नदी में आई आफत की बाढ़ से नगर क्षेत्र में चारों ही ओर पानी ही पानी हो गया है। सरयू खेतों आदि के रास्ते गांवों तक पहुंच गई है। बाढ़ आने के कारण दर्जनों गांव और सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। मवेशियों के चारा का संकट गहराने को लेकर बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण पशुओं के लिए उचित ठौर की तलाश में जुट गए हैं। हालात को देखते हुए कुछ लोग पशुओं और महिलाओं-बच्चों को रिश्तेदारी में पहुंचाना शुरू कर दिया है।
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