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नगर के सारे इंतजाम ऐन वक्त पर धड़ाम
Sun, 23 Jun 2019 11:15 PM IST
राकेश पांडेय
deoria
deoria
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sun, 23 Jun 2019 11:15 PM IST
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मोतीलाल रोड पर जाम पड़ा नाला।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। शुक्रवार को हुई बारिश कोई आपदा नहीं थी, यह मानसून का ट्रेलर भर था। इससे पूरा शहर जलभराव के संकट से जूझने लगा। इस हफ्ते अभी और बारिश होने के आसार हैं। सभी ऐसे ही अपनी जिम्मेदारियों से भागते रहे तो आगे भी शहर हालात और खराब देखने को मिलेंगे। जलभराव जैसे संकट के गुनाहगार कई हैं। न आम लोग अपनी जिम्मेदारी तय कर पा रहे हैं न ही नगर पालिका खुद के कायदे-कानून पर अमल कर रही है। नतीजतन, ऐन वक्त पर ही सारे इंतजाम फेल हो रहे हैं।
1619 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली नगर पालिका में करीब सात सौ छोटी-बड़ी सड़कें हैं। उनकी चौड़ाई के अनुपात में ही किनारे पर सैकड़ों नालों का निर्माण कराया गया है। हर बार की तरह इस साल भी बरसात पूर्व नगर पालिका ने अभियान चलाकर नालों से सिल्ट सफाई कराई। इसमें लाखों रुपये खर्च किए गए। व्यवस्था की पोल पहली ही बारिश में खुल गई। फिर भी नगर पालिका खुद को पाक-साफ बता रही है। सवाल उठता है कि नाले साफ थे तो बारिश होते ही चोक क्यों हो गए। या आम लोगों की लापरवाही से नगर पालिका का खेल बिगड़ गया। साफ-सफाई में जितनी जवाबदेही नगर पालिका की है उतनी जिम्मेदारी शहरवासियों की भी है। इस संबंध में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि नालों की सफाई में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। सफाई के बाद तमाम लोग कचरा नालियों में डाल देते हैं। शुक्रवार को हुई बारिश जोरदार थी, इसके चलते पानी निकलने में वक्त लग गया। सफाई अनुभाग इस पर सख्ती से काम कर रहा है।
ये भी कम लापरवाह नहीं
शहर में विभिन्न स्थानों पर करीब तीन दर्जन से अधिक विवाह भवन खुले हैं। यहां आएदिन कोई न कोई भोज कार्यक्रम होता रहता है। भोजन समाप्ति के बाद थर्मोकोल के पत्तल, प्लेट व जूठे प्लास्टिक के गिलास मैरिज हॉल संचालक नालों में डलवा देते हैं। तमाम होटलों का भी यही हाल है। अधिकतर ठेला, खोमचा वाले डस्टबिन नहीं रखते। नगर प्रशासन के भय से जिन लोगों ने डस्टबिन रखा है, वे भी दुकान बंद करने के बाद जूठे गिलास और प्लेट नालियों में गिराकर चले जाते हैं।
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बोर्ड से मंजूरी के अभाव में लटक गए कायदे-कानून
नगर में गंदगी फैलाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए पालिका की ओर से पिछले वर्ष उपविधि नियमावली 2018 बनाने का प्रस्ताव बोर्ड में लाया गया। इसमें नगर की सफाई व्यवस्था में अवरोध पैदा करने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान था। प्रस्तावित नियम में सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने वालों से पांच सौ रुपये जुर्माना, किसी स्वामी के मरे जानवर उठाने पर दो हजार शुल्क, किसी अस्थायी या स्थायी दुकान पर डस्टबिन नहीं होने पर एक हजार रुपये, भवन स्वामी द्वारा अपने मकान के सामने कूड़ा फेंकने पर पांच सौ व पुनरावृत्ति पर दो हजार, सड़क अतिक्रमण कर रास्ता अवरुद्ध करने वालों से एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान था। जिसे बोर्ड से मंजूरी नहीं मिलने के चलते अमल में नहीं लाया जा सका है।
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1619 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली नगर पालिका में करीब सात सौ छोटी-बड़ी सड़कें हैं। उनकी चौड़ाई के अनुपात में ही किनारे पर सैकड़ों नालों का निर्माण कराया गया है। हर बार की तरह इस साल भी बरसात पूर्व नगर पालिका ने अभियान चलाकर नालों से सिल्ट सफाई कराई। इसमें लाखों रुपये खर्च किए गए। व्यवस्था की पोल पहली ही बारिश में खुल गई। फिर भी नगर पालिका खुद को पाक-साफ बता रही है। सवाल उठता है कि नाले साफ थे तो बारिश होते ही चोक क्यों हो गए। या आम लोगों की लापरवाही से नगर पालिका का खेल बिगड़ गया। साफ-सफाई में जितनी जवाबदेही नगर पालिका की है उतनी जिम्मेदारी शहरवासियों की भी है। इस संबंध में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि नालों की सफाई में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। सफाई के बाद तमाम लोग कचरा नालियों में डाल देते हैं। शुक्रवार को हुई बारिश जोरदार थी, इसके चलते पानी निकलने में वक्त लग गया। सफाई अनुभाग इस पर सख्ती से काम कर रहा है।
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ये भी कम लापरवाह नहीं
शहर में विभिन्न स्थानों पर करीब तीन दर्जन से अधिक विवाह भवन खुले हैं। यहां आएदिन कोई न कोई भोज कार्यक्रम होता रहता है। भोजन समाप्ति के बाद थर्मोकोल के पत्तल, प्लेट व जूठे प्लास्टिक के गिलास मैरिज हॉल संचालक नालों में डलवा देते हैं। तमाम होटलों का भी यही हाल है। अधिकतर ठेला, खोमचा वाले डस्टबिन नहीं रखते। नगर प्रशासन के भय से जिन लोगों ने डस्टबिन रखा है, वे भी दुकान बंद करने के बाद जूठे गिलास और प्लेट नालियों में गिराकर चले जाते हैं।
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बोर्ड से मंजूरी के अभाव में लटक गए कायदे-कानून
नगर में गंदगी फैलाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए पालिका की ओर से पिछले वर्ष उपविधि नियमावली 2018 बनाने का प्रस्ताव बोर्ड में लाया गया। इसमें नगर की सफाई व्यवस्था में अवरोध पैदा करने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान था। प्रस्तावित नियम में सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने वालों से पांच सौ रुपये जुर्माना, किसी स्वामी के मरे जानवर उठाने पर दो हजार शुल्क, किसी अस्थायी या स्थायी दुकान पर डस्टबिन नहीं होने पर एक हजार रुपये, भवन स्वामी द्वारा अपने मकान के सामने कूड़ा फेंकने पर पांच सौ व पुनरावृत्ति पर दो हजार, सड़क अतिक्रमण कर रास्ता अवरुद्ध करने वालों से एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान था। जिसे बोर्ड से मंजूरी नहीं मिलने के चलते अमल में नहीं लाया जा सका है।