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Deoria News: अग्निशमन विभाग रो रहा संसाधन व कर्मियों की कमी का रोना
Tue, 02 Apr 2024 01:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 02 Apr 2024 01:23 AM IST
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फोटो समाचार...........
दो दिन में आधा दर्जन हुईं आग की घटनाएं, विभाग को छूटा पसीना
चार चालकों व 37 कर्मियों के भरोसे है जिले की 35 लाख आबादी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। आग लगने का समय आ गया है। अग्निशमन विभाग की गाड़ियों के सायरन की आवाज लगातार सुनाई देगी। आवाज सुन कर लोग आग लगने के स्थान का पता करेंगे। दरअसल, गर्मी के मौसम में बहने वाली तेज पछुआ हवा आग को गति प्रदान कर देती है। गांव में लोगों की लापरवाही से हर साल सैकड़ों घर जल जाते हैं। लाखों की संपत्ति का नुकसान हो जाता है। हजारों एकड़ गेहूं की फसल खेतों में ही जल जाती है। महकमा मरहम लगाने के सिवाय और कुछ नहीं कर पाता है। पछुआ हवा कहर बरपाने को तैयार है। जबकि अग्निशमन विभाग का रवैया पहले की तरह ही है। हर बार की तरह संसाधन व कर्मियों की कमी का रोना। इसलिए इस मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
मार्च माह की 31 तारीख से जिले में पछुआ हवा ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। पछुआ हवा की रफ्तार से दिन में सड़कें व गांव की गलियों में सन्नाटा पसर जा रहा है। इधर, खेतों में गेहूं की फसल पक कर तैयार है। पछुआ हवा अभी से जोर दिखाने लगी है। गर्मी के मौसम में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। संसाधनों की अनुपलब्धता व फायर कर्मियों की कमी से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलकर राख हो जाती है। अग्निकांड से सैकड़ों परिवार बेघर हो जाते हैं। महज दो दिन में जिले में करीब एक दर्जन जगह आग लगने की घटनाएं हुई हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आग बुझाने के नाम पर अग्निशमन विभाग कुआं खोदते रह जाएगा और हजारों एकड़ फसल और लाखों की संपत्ति जलकर राख जाएगी। कारण यह कि महकमे में कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ ही सुविधाओं की बहाली के लिए कई बार प्रयास किए गए। पर इसे धरातल पर नहीं लाया जा सका। इसका खामियाजा लोगों को नुकसान कर भुगतना पड़ रहा है।
इधर, गर्मी के मौसम को देखते हुए गाड़ियों के मेंटिनेंस, पाइप, पंप आदि की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम पूरा कर लिया गया है। कुल 37 कर्मचारियों के भरोसे तकरीबन 35 लाख की आबादी को बेहतर सेवा मुहैया कराने के निरर्थक प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में अग्निशमन विभाग में 53 कर्मियों की आवश्यकता है। इसमें से सिर्फ 37 कर्मी की तैनाती है। सात की जगह चार चालक व 37 कर्मियों के भरोसे अधूरी सेवाएं दी जा रही हैं। सबसे अधिक परेशानी अप्रैल, मई व जून माह में चालक कम रहने से होती है।
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तीन वाहन सलेमपुर, भाटपाररानी व रुद्रपुर में भेज दिए जाते हैं। चार में तीन चालक वाहन लेकर चले जाते हैं। इसके बाद जिला मुख्यालय और अन्य ब्लाकों में आग की घटना होने पर विभाग के सामने चालक की कमी की समस्या खड़ी हो जाती है। इसके बाद जैसे-तैसे वह आग की घटनाओं पर काबू पाता है।
फायर अधिकारी राजमंगल सिंह ने बताया कि आग बुझाने के लिए विभाग के पास कुल छह गाड़ियां मौजूद हैं। जिला मुख्यालय पर तीन बड़ा वाटर टैंकर, 2 वाटर मिक्सड गाड़ियां हैं। इसमें से दो छोटी व एक बड़ी गाड़ी को भाटपाररानी, सलेमपुर व रुद्रपुर में भेजकर सेवा दी जाती है। तीन सब स्टेशनों के निर्माण से समय से गाड़ियों को भेजकर आग की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
तहसीलों में बने होते फायर स्टेशन तो आग बुझाने में होती सहूलियत
जिले के भाटपाररानी, सलेमपुर व रुद्रपुर में फायर स्टेशन बनाया जा रहा है। रुद्रपुर में फायर स्टेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, सलेमपुर व भाटपाररानी में अभी निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि, इन तीनों जगहों पर अस्थायी सब स्टेशन चलाकर कुछ राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के आखिरी छोर पर स्थित स्थानों पर शहर से ही गाड़ियों को भेजना पड़ता है। सोमवार को जिले में करीब आधा दर्जन जगहों पर आग की घटनाएं हुईंं। जिसे बुझाने में विभाग व उसके कर्मियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता से आग की घटनाओं पर लग सकता है विराम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी के दिनों में आग की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। क्योंकि, आग के फैलाव के लिए मौसम भी अनुकूल रहता है। इसमें कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जो मानव जनित कारणों से उत्पन्न होती हैं। जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता के साथ घटनाओं को कम किया जा सकता है। अग्निशमन अधिकारी राजमंगल सिंह ने बताया कि जिले में अभी 06 अग्निशमन वाहन उपलब्ध हैं। इनमें 2 नई तकनीक से युक्त हैं। उन्होंने कहा कि सावधानी ही बचाव या सुरक्षा है।
इन बातों का रखें ख्याल
खलिहान को हमेशा गांवों की आबादी और फसल से भी दूर खुले स्थान पर बनाएं।
थ्रेसर का उपयोग करते समय डीजल इंजन व ट्रैक्टर के साइलेंसर को लंबे पाइप से ऊंचाई पर रखें।
थ्रेसर का उपयोग करते समय पास में कम से कम 200 लीटर पानी भरकर अवश्य रखें।
खलिहान के आसपास छोटी-छोटी बाल्टियों में बालू भरकर रखें।
रोशनी के लिए सोलर लैंप, टॉर्च, इमरजेंसी लाइट आदि बैटरी वाले यंत्र का ही प्रयोग करें।
एक खलिहान से दूसरे खलिहान की दूरी 20 फीट से कम न रखें।
खलिहान वैसे जगह लगाएं जहां अग्निशमन वाहन आसानी से पहुंच सके।
खलिहान वैसी जगह हो जहां जलस्रोत नजदीक हो, जैसे तालाब, पैन, बोरिंग।
खलिहान में कच्ची फसलों की बड़ी टाल न लगाई जाए।
खलिहान के आसपास अलाव न जलाएं, यदि बहुत आवश्यक हो तो पानी भरी बाल्टियां अवश्य पास में रखें।
बिजली के नंगे तारों के नीचे खलिहान न बनाया जाए।
बांस के खंभे के सहारे नंगे बिजली के तार खेतों में न रखें।
खेतों के आसपास बीड़ी, सिगरेट आदि न पीएं और न ही किसी को पीने दें।
देहाती क्षेत्रों में खासकर फूस और खपरैल के मकानों के निवासी खाना सुबह 8:00 बजे से पहले और शाम 5:00 से 6:00 के बीच (सूर्यास्त से पूर्व) बना लें।
दीपक, लालटेन, ढिबरी आदि के प्रयोग में सावधानी बरतें।
जलती हुई बीड़ी सिगरेट और माचिस की काठी खेत-खलिहान में न फेंके।
आग बुझाने के लिए पानी, बालू और सूखी मिट्टी, धूल का प्रयोग करें।
अग्निकांडों की सूचना अति शीघ्र अग्निशमन अधिकारी तक शीघ्र पहुंचाएं।
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दो दिन में आधा दर्जन हुईं आग की घटनाएं, विभाग को छूटा पसीना
चार चालकों व 37 कर्मियों के भरोसे है जिले की 35 लाख आबादी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। आग लगने का समय आ गया है। अग्निशमन विभाग की गाड़ियों के सायरन की आवाज लगातार सुनाई देगी। आवाज सुन कर लोग आग लगने के स्थान का पता करेंगे। दरअसल, गर्मी के मौसम में बहने वाली तेज पछुआ हवा आग को गति प्रदान कर देती है। गांव में लोगों की लापरवाही से हर साल सैकड़ों घर जल जाते हैं। लाखों की संपत्ति का नुकसान हो जाता है। हजारों एकड़ गेहूं की फसल खेतों में ही जल जाती है। महकमा मरहम लगाने के सिवाय और कुछ नहीं कर पाता है। पछुआ हवा कहर बरपाने को तैयार है। जबकि अग्निशमन विभाग का रवैया पहले की तरह ही है। हर बार की तरह संसाधन व कर्मियों की कमी का रोना। इसलिए इस मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
मार्च माह की 31 तारीख से जिले में पछुआ हवा ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। पछुआ हवा की रफ्तार से दिन में सड़कें व गांव की गलियों में सन्नाटा पसर जा रहा है। इधर, खेतों में गेहूं की फसल पक कर तैयार है। पछुआ हवा अभी से जोर दिखाने लगी है। गर्मी के मौसम में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। संसाधनों की अनुपलब्धता व फायर कर्मियों की कमी से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलकर राख हो जाती है। अग्निकांड से सैकड़ों परिवार बेघर हो जाते हैं। महज दो दिन में जिले में करीब एक दर्जन जगह आग लगने की घटनाएं हुई हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आग बुझाने के नाम पर अग्निशमन विभाग कुआं खोदते रह जाएगा और हजारों एकड़ फसल और लाखों की संपत्ति जलकर राख जाएगी। कारण यह कि महकमे में कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ ही सुविधाओं की बहाली के लिए कई बार प्रयास किए गए। पर इसे धरातल पर नहीं लाया जा सका। इसका खामियाजा लोगों को नुकसान कर भुगतना पड़ रहा है।
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इधर, गर्मी के मौसम को देखते हुए गाड़ियों के मेंटिनेंस, पाइप, पंप आदि की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम पूरा कर लिया गया है। कुल 37 कर्मचारियों के भरोसे तकरीबन 35 लाख की आबादी को बेहतर सेवा मुहैया कराने के निरर्थक प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में अग्निशमन विभाग में 53 कर्मियों की आवश्यकता है। इसमें से सिर्फ 37 कर्मी की तैनाती है। सात की जगह चार चालक व 37 कर्मियों के भरोसे अधूरी सेवाएं दी जा रही हैं। सबसे अधिक परेशानी अप्रैल, मई व जून माह में चालक कम रहने से होती है।
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तीन वाहन सलेमपुर, भाटपाररानी व रुद्रपुर में भेज दिए जाते हैं। चार में तीन चालक वाहन लेकर चले जाते हैं। इसके बाद जिला मुख्यालय और अन्य ब्लाकों में आग की घटना होने पर विभाग के सामने चालक की कमी की समस्या खड़ी हो जाती है। इसके बाद जैसे-तैसे वह आग की घटनाओं पर काबू पाता है।
फायर अधिकारी राजमंगल सिंह ने बताया कि आग बुझाने के लिए विभाग के पास कुल छह गाड़ियां मौजूद हैं। जिला मुख्यालय पर तीन बड़ा वाटर टैंकर, 2 वाटर मिक्सड गाड़ियां हैं। इसमें से दो छोटी व एक बड़ी गाड़ी को भाटपाररानी, सलेमपुर व रुद्रपुर में भेजकर सेवा दी जाती है। तीन सब स्टेशनों के निर्माण से समय से गाड़ियों को भेजकर आग की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
तहसीलों में बने होते फायर स्टेशन तो आग बुझाने में होती सहूलियत
जिले के भाटपाररानी, सलेमपुर व रुद्रपुर में फायर स्टेशन बनाया जा रहा है। रुद्रपुर में फायर स्टेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, सलेमपुर व भाटपाररानी में अभी निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि, इन तीनों जगहों पर अस्थायी सब स्टेशन चलाकर कुछ राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के आखिरी छोर पर स्थित स्थानों पर शहर से ही गाड़ियों को भेजना पड़ता है। सोमवार को जिले में करीब आधा दर्जन जगहों पर आग की घटनाएं हुईंं। जिसे बुझाने में विभाग व उसके कर्मियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता से आग की घटनाओं पर लग सकता है विराम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी के दिनों में आग की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। क्योंकि, आग के फैलाव के लिए मौसम भी अनुकूल रहता है। इसमें कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जो मानव जनित कारणों से उत्पन्न होती हैं। जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता के साथ घटनाओं को कम किया जा सकता है। अग्निशमन अधिकारी राजमंगल सिंह ने बताया कि जिले में अभी 06 अग्निशमन वाहन उपलब्ध हैं। इनमें 2 नई तकनीक से युक्त हैं। उन्होंने कहा कि सावधानी ही बचाव या सुरक्षा है।
इन बातों का रखें ख्याल
खलिहान को हमेशा गांवों की आबादी और फसल से भी दूर खुले स्थान पर बनाएं।
थ्रेसर का उपयोग करते समय डीजल इंजन व ट्रैक्टर के साइलेंसर को लंबे पाइप से ऊंचाई पर रखें।
थ्रेसर का उपयोग करते समय पास में कम से कम 200 लीटर पानी भरकर अवश्य रखें।
खलिहान के आसपास छोटी-छोटी बाल्टियों में बालू भरकर रखें।
रोशनी के लिए सोलर लैंप, टॉर्च, इमरजेंसी लाइट आदि बैटरी वाले यंत्र का ही प्रयोग करें।
एक खलिहान से दूसरे खलिहान की दूरी 20 फीट से कम न रखें।
खलिहान वैसे जगह लगाएं जहां अग्निशमन वाहन आसानी से पहुंच सके।
खलिहान वैसी जगह हो जहां जलस्रोत नजदीक हो, जैसे तालाब, पैन, बोरिंग।
खलिहान में कच्ची फसलों की बड़ी टाल न लगाई जाए।
खलिहान के आसपास अलाव न जलाएं, यदि बहुत आवश्यक हो तो पानी भरी बाल्टियां अवश्य पास में रखें।
बिजली के नंगे तारों के नीचे खलिहान न बनाया जाए।
बांस के खंभे के सहारे नंगे बिजली के तार खेतों में न रखें।
खेतों के आसपास बीड़ी, सिगरेट आदि न पीएं और न ही किसी को पीने दें।
देहाती क्षेत्रों में खासकर फूस और खपरैल के मकानों के निवासी खाना सुबह 8:00 बजे से पहले और शाम 5:00 से 6:00 के बीच (सूर्यास्त से पूर्व) बना लें।
दीपक, लालटेन, ढिबरी आदि के प्रयोग में सावधानी बरतें।
जलती हुई बीड़ी सिगरेट और माचिस की काठी खेत-खलिहान में न फेंके।
आग बुझाने के लिए पानी, बालू और सूखी मिट्टी, धूल का प्रयोग करें।
अग्निकांडों की सूचना अति शीघ्र अग्निशमन अधिकारी तक शीघ्र पहुंचाएं।