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पहली बारिश में खुली सिंचाई विभाग के तैयारी की पोल
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया
Updated Sun, 03 Jul 2016 10:46 PM IST
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धंसने लगे पाटे गए रेनकट्स।
- फोटो : अमर उजाला
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बाढ़ को लेकर मुस्तैद रहने का दावा करने वाले सिंचाई विभाग की पोल पहली बारिश ने ही खोल दी है। बारिश होते ही बंधों पर पाटे गए रेनकट्स और रैटहोल धंसने लगे है। पलिया छपरा बांध पर करीब आधा दर्जन जगहों पर गड्ढे बन गए है। ऐसे में तेज बारिश होने पर बंधों खतरा बढ़ने की संभावना बन गई है।
बीते मई और जून महीने में सिंचाई विभाग संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारी में लगा था। बंधों पर बने रेनकट्स और रैटहोल पाटे जा रहे थे। रेनकट्स पाटने में हुई गड़बड़ी अब सामने आने लगी है। शनिवार को हुई बारिश में कई जगहों पर पाटे गए रेनकट्स धंस गए। पलिया छपरा बांध पर जगदीशपुर गांव के समीप करीब तीन मीटर लंबा बांध धस गया है। यहां से चार पहिया वाहनों का गुजरना मुश्किल है। पिड़रा भुसवल बांध की हालत भी कमोवेश यही है। विभाग ने बंधों को जर्जर हालत में छोड़ दिया है। गोर्रा नदी के किनारे बंधों पर रेनकट्स और रैटहोल की भयावह स्थिति को देख पानी के वेग को रोकने में बंधे पूरी तरह से अक्षम साबित होंगे। बंधों के किनारे खर पतवार लगे हुए है। ऐसे में रेनकट्स और रैटहोल की स्थिति का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो गया है। इस संबंध में अवर अभियंता आरएन पांडेय ने कहा कि बंधों के सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है। रेनकट्स और रैटहोल को पाटने में मजदूर लगाए गए है।
पचलड़ी गांव के अंगद सिंह ने कहा कि सिंचाई विभाग दोआबा और कछार के लोगों को बर्बाद करने पर तुला है। रेनकट्स और रैटहोल पाटने में भारी अनियमितता बरती गई है। बोरी में मिट्टी डालकर होल के ऊपर रख दिया जा रहा है। बारिश होने पर मिट्टी समेत बोरी नीचे धंस जा रही है। यदि बंधों को मजबूती से सुदृढ़ नहीं किया गया तो पानी के वेग को रोकना मुश्किल होगा।
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सुल्तानी गांव के संतोष मल्ल ने कहा कि हर साल बाढ़ कार्य खंड में रेनकट़्स और रैटहोल पाटने के नाम पर लाखों रुपये का गोलमाल होता है। जेई और ठेकेदार की मिलीभगत से कागज में विभाग बाढ़ से निपटने की तैयारी करता है। बरसात शुरू होने पर आनन फानन में बंधों पर कार्य कराया जाता है। उन्होंने कार्यों के गुणवत्ता की जांच करा कर कार्रवाई की मांग की।
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बीते मई और जून महीने में सिंचाई विभाग संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारी में लगा था। बंधों पर बने रेनकट्स और रैटहोल पाटे जा रहे थे। रेनकट्स पाटने में हुई गड़बड़ी अब सामने आने लगी है। शनिवार को हुई बारिश में कई जगहों पर पाटे गए रेनकट्स धंस गए। पलिया छपरा बांध पर जगदीशपुर गांव के समीप करीब तीन मीटर लंबा बांध धस गया है। यहां से चार पहिया वाहनों का गुजरना मुश्किल है। पिड़रा भुसवल बांध की हालत भी कमोवेश यही है। विभाग ने बंधों को जर्जर हालत में छोड़ दिया है। गोर्रा नदी के किनारे बंधों पर रेनकट्स और रैटहोल की भयावह स्थिति को देख पानी के वेग को रोकने में बंधे पूरी तरह से अक्षम साबित होंगे। बंधों के किनारे खर पतवार लगे हुए है। ऐसे में रेनकट्स और रैटहोल की स्थिति का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो गया है। इस संबंध में अवर अभियंता आरएन पांडेय ने कहा कि बंधों के सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है। रेनकट्स और रैटहोल को पाटने में मजदूर लगाए गए है।
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पचलड़ी गांव के अंगद सिंह ने कहा कि सिंचाई विभाग दोआबा और कछार के लोगों को बर्बाद करने पर तुला है। रेनकट्स और रैटहोल पाटने में भारी अनियमितता बरती गई है। बोरी में मिट्टी डालकर होल के ऊपर रख दिया जा रहा है। बारिश होने पर मिट्टी समेत बोरी नीचे धंस जा रही है। यदि बंधों को मजबूती से सुदृढ़ नहीं किया गया तो पानी के वेग को रोकना मुश्किल होगा।
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सुल्तानी गांव के संतोष मल्ल ने कहा कि हर साल बाढ़ कार्य खंड में रेनकट़्स और रैटहोल पाटने के नाम पर लाखों रुपये का गोलमाल होता है। जेई और ठेकेदार की मिलीभगत से कागज में विभाग बाढ़ से निपटने की तैयारी करता है। बरसात शुरू होने पर आनन फानन में बंधों पर कार्य कराया जाता है। उन्होंने कार्यों के गुणवत्ता की जांच करा कर कार्रवाई की मांग की।