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आबादी झेल रही दुर्दशा, बंधा बचाने में जुटा प्रशासन
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आबादी झेल रही दुर्दशा, बंधा बचाने में जुटा प्रशासन
रुद्रपुर। जलस्तर में गिरावट के बाद भी दोआबा और कछार के लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बाढ़ की आशंका की आशंका से सहमे ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। जगह जगह जमा पानी से दुर्गंध उठ रही है। इससे जल जनित बीमारियां फैलने की आशंका है। गांवों में लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। दुर्दशा झेल रही आबादी को छोड़ प्रशासन बंधा बचाने में जुटा है।
गोर्रा और राप्ती नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद बंधों पर कटान तेज है। सेमरौना नकईल बांध, पांडेय माझा राजधर भीमसेन माझा और छपरा बुजुर्ग गांव के निकट गोर्रा और राप्ती तेजी से कटान कर रही है। यहां बांध को बचाने के लिए सभी जुगाड़ सिंचाई विभाग के फेल हो जा रहे। बैंबोक्रेट और कटर नदी में गिर जा रहे है। प्रशासन बंधों की निगरानी में जुटा है, वहीं गांव में आबादी के बीच बरसात का पानी अब तक बाहर नहीं निकला। करीब एक माह से लोगों के घरों के निकट जमा पानी अब हरा हो गया है। बदबूदार पानी लोगों को बीमार बना है। पिड़रा, सचौली पटवनिया, भिरवा, छपरा बुजुर्ग, सरया, कृतपुरा, सोनबह, गायघाट, इस्लामाबाद, सिकड़िया, पिड़हनी गांव के लोग जल जमाव से परेशान है। गांव से पानी निकालने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन बंधे पर पहरा दे रहा है और गांव के लोग सड़कों पर लगे पानी के बीच से आवाजाही कर रहे है। कई बार अधिकारियों से अपील के बाद भी गांव में लगे पानी को बाहर निकलवाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। पुलिया के रास्ते गांव में घुसा पानी खेती बर्बाद कर अब बीमार बना रहा है। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि गांवों में जमा पानी को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। गांव के दूसरे छोर पर पानी एकत्र रहने से आबादी के बीच से पानी बाहर करने में अभी दिक्कतें आ रही हैं।
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रुद्रपुर। जलस्तर में गिरावट के बाद भी दोआबा और कछार के लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बाढ़ की आशंका की आशंका से सहमे ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। जगह जगह जमा पानी से दुर्गंध उठ रही है। इससे जल जनित बीमारियां फैलने की आशंका है। गांवों में लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। दुर्दशा झेल रही आबादी को छोड़ प्रशासन बंधा बचाने में जुटा है।
गोर्रा और राप्ती नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद बंधों पर कटान तेज है। सेमरौना नकईल बांध, पांडेय माझा राजधर भीमसेन माझा और छपरा बुजुर्ग गांव के निकट गोर्रा और राप्ती तेजी से कटान कर रही है। यहां बांध को बचाने के लिए सभी जुगाड़ सिंचाई विभाग के फेल हो जा रहे। बैंबोक्रेट और कटर नदी में गिर जा रहे है। प्रशासन बंधों की निगरानी में जुटा है, वहीं गांव में आबादी के बीच बरसात का पानी अब तक बाहर नहीं निकला। करीब एक माह से लोगों के घरों के निकट जमा पानी अब हरा हो गया है। बदबूदार पानी लोगों को बीमार बना है। पिड़रा, सचौली पटवनिया, भिरवा, छपरा बुजुर्ग, सरया, कृतपुरा, सोनबह, गायघाट, इस्लामाबाद, सिकड़िया, पिड़हनी गांव के लोग जल जमाव से परेशान है। गांव से पानी निकालने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन बंधे पर पहरा दे रहा है और गांव के लोग सड़कों पर लगे पानी के बीच से आवाजाही कर रहे है। कई बार अधिकारियों से अपील के बाद भी गांव में लगे पानी को बाहर निकलवाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। पुलिया के रास्ते गांव में घुसा पानी खेती बर्बाद कर अब बीमार बना रहा है। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि गांवों में जमा पानी को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। गांव के दूसरे छोर पर पानी एकत्र रहने से आबादी के बीच से पानी बाहर करने में अभी दिक्कतें आ रही हैं।
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