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Deoria News: आठ में सिर्फ एक हार्मोनल जांच शुरू, मरीजों को दिक्कत
Thu, 01 May 2025 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 01 May 2025 03:00 AM IST
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देवरिया। मेडिकल कॉलेज की पैथाॅलाेजी में ठप पड़ी आठ हार्मोनल जांच में मात्र एक जांच शुरू हो सकी है। करीब तीन माह बाद कैलीब्रेटर आने से प्रोलैक्टीन की जांच चालू होने से मरीजों को सहूलियत हुई है, जबकि अभी भी विटामिन बी 12 सहित सात जांच चालू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। हर रोज करीब चालीस से अधिक मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। उन्हें जांच बाहर करानी पड़ रही है, जहां अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि अस्पताल में इन जांचों के लिए कम शुल्क जमा करना पड़ता है। कैलीब्रेटर की कमी से जांच की समस्या आई है। जांच न होने से मेडिकल कॉलेज को राजस्व काे भी नुकसान हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों के ब्लड जांच के लिए सेंट्रल पैथाॅलाेजी है, जहां चौबीस घंटे जांच की सुविधा है। यहां अधिकांश जांच निशुल्क होती है, जबकि हार्मोनल जांच के लिए शुल्क निर्धारित किया गया है, जो निजी सेंटरों से कम है। अस्पताल में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाके के करीब चार हजार लोग इलाज कराने आते हैं। डॉक्टर जरूरत के महसूस होने पर मरीजों के ब्लड जांच कराते हैं। रोजाना करीब पांच सौ रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें महिला अस्पताल के मरीज भी शामिल होते हैं, जिसमें साठ से अधिक मरीजों की हार्माेनल जांच होती है। पैथालाजी में कैलीब्रेटर खत्म होने से आठ जांच ठप हो गई थी। इससे पैरामीटर मापा जाता है, जिससे जांच सही तरह से हो सके। करीब तीन माह बाद कैलीब्रेटर आने से प्रोलैक्टीन की जांच शुरू की गई। महिलाओं में दूध न होने सहित अन्य परेशानी होने पर यह जांच कराई जाती है। हर रोज करीब 20 से 25 मरीजों की जांच होती है। इसके ठप होने से मरीजों को बाहर करीब छह सौ रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि अस्पताल में जांच के लिए करीब 250 रुपये शुल्क देना पड़ता है। इसके शुरू होने से मरीजों को सहूलियत हुई है। इसके अलावा सीए 125, एएफपी, पीटीएच, बीटा एचसीजी, इंसुलीन, विटामिन बी 12 जांच ठप है। इसमें प्रोटीन, महिलाओं में बच्चेदानी में कैंसर, प्रेगनेंसी से संबंधित जांचें हैं। वहीं फैरिटिन जांच भी बंद है। महिलाओं में आयरन की कमी की संभावना होने पर यह जांच कराई जाती है, लेकिन कैलीब्रेटर की कमी से जांच न होने से मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां इन जांचों के लिए उन्हें पांच से ग्यारह सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसकी वजह से उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जांच शुरू होने से मरीजों को सहूलियत होगी।
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों के ब्लड जांच के लिए सेंट्रल पैथाॅलाेजी है, जहां चौबीस घंटे जांच की सुविधा है। यहां अधिकांश जांच निशुल्क होती है, जबकि हार्मोनल जांच के लिए शुल्क निर्धारित किया गया है, जो निजी सेंटरों से कम है। अस्पताल में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाके के करीब चार हजार लोग इलाज कराने आते हैं। डॉक्टर जरूरत के महसूस होने पर मरीजों के ब्लड जांच कराते हैं। रोजाना करीब पांच सौ रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें महिला अस्पताल के मरीज भी शामिल होते हैं, जिसमें साठ से अधिक मरीजों की हार्माेनल जांच होती है। पैथालाजी में कैलीब्रेटर खत्म होने से आठ जांच ठप हो गई थी। इससे पैरामीटर मापा जाता है, जिससे जांच सही तरह से हो सके। करीब तीन माह बाद कैलीब्रेटर आने से प्रोलैक्टीन की जांच शुरू की गई। महिलाओं में दूध न होने सहित अन्य परेशानी होने पर यह जांच कराई जाती है। हर रोज करीब 20 से 25 मरीजों की जांच होती है। इसके ठप होने से मरीजों को बाहर करीब छह सौ रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि अस्पताल में जांच के लिए करीब 250 रुपये शुल्क देना पड़ता है। इसके शुरू होने से मरीजों को सहूलियत हुई है। इसके अलावा सीए 125, एएफपी, पीटीएच, बीटा एचसीजी, इंसुलीन, विटामिन बी 12 जांच ठप है। इसमें प्रोटीन, महिलाओं में बच्चेदानी में कैंसर, प्रेगनेंसी से संबंधित जांचें हैं। वहीं फैरिटिन जांच भी बंद है। महिलाओं में आयरन की कमी की संभावना होने पर यह जांच कराई जाती है, लेकिन कैलीब्रेटर की कमी से जांच न होने से मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां इन जांचों के लिए उन्हें पांच से ग्यारह सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसकी वजह से उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जांच शुरू होने से मरीजों को सहूलियत होगी।
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