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अवैध अस्पतालों का नेटवर्क: महज 947 अस्पताल पंजीकृत...संचालित हो रहे साढ़े चार हजार से अधिक

Sat, 10 Jan 2026 10:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 10 Jan 2026 10:47 AM IST
सार

सूत्रों ने बताया कि सबसे अधिक अवैध अस्पताल बेलघाट, गगहा और बड़हलगंज इलाके में संचालित हो रहे हैं। शहर से दूरी अधिक होने की वजह से लोग वहां पहुंच जाते हैं। कई और तहसीलों में ये अवैध अस्पताल अपने कार्य को खुलेआम संचालित कर रहे हैं।

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Only 947 hospitals are registered.more than four and a half thousand are operating.
गोला क्षेत्र में इन अस्पतालों को कुछ दिन पहले प्रशासन द्वारा सील किया गया था। लेकिन आज यह अस्पत

विस्तार

जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पंजीकृत 947 अस्पतालों के बावजूद जिले में साढ़े चार हजार से अधिक अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश अवैध अस्पताल हर तहसील और कस्बे में खुलेआम अपनी सेवाएं दे रहे हैं। निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं होने का नतीजा है कि अवैध अस्पतालों में इलाज के दौरान लोगों की जान तक चली जा रही है।

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पंजीकृत 947 में अस्पताल, क्लीनिक और पैथालॉजी भी शामिल हैं। हकीकत यह है कि इससे कई अधिक अस्पतालों का संचालन हो रहा है। कई अस्पतालों में पंजीकरण वाले डॉक्टर आते ही नहीं, जबकि अस्पतालों का संचालन विभिन्न कर्मचारियों की ओर से किया जा रहा है। इससे मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि सबसे अधिक अवैध अस्पताल बेलघाट, गगहा और बड़हलगंज इलाके में संचालित हो रहे हैं। शहर से दूरी अधिक होने की वजह से लोग वहां पहुंच जाते हैं। कई और तहसीलों में ये अवैध अस्पताल अपने कार्य को खुलेआम संचालित कर रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पंजीकृत अस्पतालों तक पहुंचने में असमर्थ होने के कारण इन अवैध अस्पतालों पर निर्भर हैं। यही कारण है कि प्रशासन के लिए यह चुनौती और गंभीर हो जाती है। इन अस्पतालों की नियमित जांच न होने की वजह से धड़ल्ले से इनका संचालन हो रहा है।

हाल ही में भटहट के जेके अस्पताल में इलाज के दौरान प्रसूता की मौत हो गई थी। वहां पर इलाज करने वाले डॉक्टर के पास डिग्री नहीं थी। ढाई साल पहले भी अस्पताल सील हुआ था लेकिन बाद में उसने दूसरे नाम से संचालन शुरू कर दिया।

सीएमओ ने बनाई कमेटी
अवैध अस्पतालों के संचालन पर सख्ती को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। कमेटी का कार्य पंजीकृत अस्पतालों और अवैध रूप से संचालित अस्पतालों की स्थिति का पता लगाना, डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करना है।


अस्पतालों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। शिकायत आने पर कमेटी जाकर जांच करेगी। नियम विरुद्ध पाए जाने पर अस्पताल को सील किया जाएगा: डॉ. राजेश झा, सीएमओ

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