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Deoria News: आज ही के दिन 13 साल की उम्र में तिरंगा फहराते शहीद हुए थे रामचंद्र विद्यार्थी

Sun, 13 Aug 2023 11:16 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 13 Aug 2023 11:16 PM IST
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On this day at the age of 13, Ramchandra Vidyarthi was martyred while hoisting the tricolor
रामलीला मैदान स्थित शाहिद रामचंद्र विद्यार्थी  स्मारक स्थल ।संवाद
देवरिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नौ अगस्त 1942 को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जब अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया तो देवरिया जिले में भी आजादी की ज्वाला धधक उठी। नौतन हथियागढ़ के रहने वाले और श्रीकृष्ण जूनियर हाईस्कूल बसंतपुर धूसी (वर्तमान में शहीद रामचन्द्र इंटर कॉलेज बसंतपुर धूसी) के सातवीं कक्षा के छात्र रामचंद्र विद्यार्थी महज 13 साल 4 माह की उम्र में 14 अगस्त 1942 को अपने साथियों के साथ जिला मुख्यालय पर पहुंच गए। इतनी कम उम्र ही उनमें देश प्रेम व जोश कूट-कूट कर भरा था। उन्होंने कलक्ट्रेट भवन पर लगे यूनियन जैक को उतार फेंका और तिरंगा फहराते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। भारतीय स्वाधीनता के इतिहास में इनती कम उम्र में शहादत देने वाला दूसरा उदाहरण दुर्लभ है।
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आजादी मिलने के बाद सन 1949 में जब पंडित जवाहर लाल नेहरू देवरिया आए और रामचंद्र विद्यार्थी की शहादत का किस्सा सुने तो भावुक हो गए। वह शहीद के पिता बाबूलाल प्रजापति और माता मोतिरानी देवी से मिलकर उन्हें चांदी की थाली, गिलास और सम्मान पत्र भेंट किया था। सम्मान पत्र पर लिखा है- ''रामचंद्र विद्यार्थी ने इस चमन को अपने खून से सींचा है...'' नीचे हस्ताक्षर में नेहरू लिखा है। इसके बाद हर साल 14 अगस्त को रामचंद्र विद्यार्थी की शहादत को उनके विद्यालय में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के लोग श्रद्धा-सुमन अर्पित कर गौरवान्वित होते हैं।
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रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के छोटी गंडक नदी किनारे नौतन हथियागढ़ गांव के निवासी रामचंद्र विद्यार्थी का जन्म एक अप्रैल 1929 को हुआ था। माता-पिता की चार संतानों में सबसे बड़े रामचंद्र विद्यार्थी तरकुलवा क्षेत्र के श्रीकृष्ण जूनियर हाईस्कूल बसंतपुर धूसी में कक्षा सातवीं क्लास के छात्र थे। महात्मा गांधी के अंग्रेजो भारत छोड़ो के आह्वान पर मां भारती को आजाद कराने के जज्बे से भरा उनका मन मचल उठा। वे 14 अगस्त 1942 को सुबह स्कूल के कुछ साथियों के साथ 20 किमी पैदल चलकर देवरिया जिला मुख्यालय पहुंचे, वहां पहुंचकर उत्साही साथियों के सहयोग से रामचंद्र कलेक्ट्रेट भवन की छत पर चढ़ गए और भवन पर फहर रहे यूनियन जैक को उतारकर फेंक दिए। यह देख तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट उमराव सिंह ने उन्हें गोली मारने की चेतावनी दी, लेकिन भारत मां के इस अमर सपूत ने उसकी परवाह किए बिना कलक्ट्रेट भवन पर तिरंगा झंडा फहरा दिया। यह देखकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने अपनी रिवाल्वर से अंधाधुंध फायर झोंक दिया। तीन गोलियां रामचंद्र विद्यार्थी के सीने में लगी और वे भारत माता की जय बोलते हुए शहीद हो गए। शहीद रामचंद्र का नाम सबसे कम उम्र में शहादत देने वालों की सूची में शुमार है। इसके बाद से बसंतपुर धूसी गांव स्थित उनके विद्यालय का नाम बदल कर शहीद रामचंद्र इंटर कॉलेज कर दिया गया। यह देवरिया-कसया राजमार्ग पर जिला मुख्यालय से 20 किमी पर सड़क किनारे स्थित है, जो आज भी उनकी शहादत की अमर कहानी को संजोए हुए है। विद्यालय प्रांगण में शहीद रामचंद्र विद्यार्थी की एक प्रतिमा लगी है, जिसे देखकर हर कोई गर्व से उन्हें नमन करता है। इस विद्यालय में प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को उनकी स्मृति में शहीद दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। दूसरी तरफ उस समय के कलक्ट्रेट भवन व परिसर को शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के नाम पर शहीद स्मारक बनाया गया है। इसके अलावा रामलीला मैदान में भी शहीद स्मारक है।
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रामचंद्र विद्यार्थी के साथ ये भी हुए थे शहीद
कलक्ट्रेट भवन पर तिरंगा फहराते समय रामचंद्र विद्यार्थी के साथ सहोदर पट्टी के शिवराज उर्फ सोना सोनार, पैकौली के बंधु उर्फ घिन्हू और कतरारी के गोपी मिश्र भी शहीद हो गए।
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