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रात में गिरा दिया नगर पंचायत का गेट
देवरिया
Updated Sun, 17 Jul 2016 10:31 PM IST
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गेट गिरने के बाद कस्बे में माहौल गर्म हो गया है।
- फोटो : अमर उजाला
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रामपुर कारखाना। पांच वर्ष पहले लाखों रुपये लागत से तैयार किए गए नगर पंचायत रामपुर कारखाना के मुख्य गेट को शनिवार रात गिरा दिया गया। बिना सदस्यों को सूचना दिए और रात में की गई कार्रवाई को लेकर चर्चाओं को बाजार गर्म है। आरोप है कि धांधली कर पंचायत के ईओ और अध्यक्ष ने गेट में मामूली झुकाव बताकर गिरवा दिया।
पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता समेत कई सदस्यों ने शासन सहित डीएम को पत्र खिलकर मामले की जांच कर कार्रवाई की बात कहीं है। गेट गिरने के बाद कस्बे में माहौल गर्म हो गया है।
करीब पांच वर्ष पूर्व नगर के मुख्यद्वार पर तत्कालीन अध्यक्ष गनेश यादव मुख्य गेट बनवाया था। जिस पर दस लाख रुपये से अधिक खर्च किया गया था। एक माह पहले नगर पंचायत ने एडीएम को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि पंचायत का मुख्यगेट का एक हिस्सा झुक गया है, जिससे हादसे की संभावना बनी हुई है।
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एडीएम ने पूरे मामले की जांच सौंप दी। आरोप है कि जांच पूरी होने से पहले नगर पालिका अध्यक्ष राधिक देवी और ईओ जितेन्द्र कुमार की मिलीभगत से शनिवार की रात जेसीबी लगाकर गेट गिरा दिया गया। सुबह जब इसकी जानकारी लोगों को हुई तो उन्होंने विरोध किया। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गनेश यादव का कहना है कि गेट बेहद मजबूत था। सरकारी धन को खपाने के लिए गेट को गिरा दिया गया।
जबकि भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपक जायसवाल का कहना है कि अध्यक्ष और ईओ ने नए गेट के लिए प्रस्ताव दिया है। इसके तहत उन्होंने पूरे मजबूत गेट को गिरा दिया ताकि नया गेट बनवाकर धन का बंदरबांट किया जा सके। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत डीएम के साथ ही शासन में कर दी गई है। कार्रवाई नहीं होने पर भाजपा आंदोलन करेंगी।
हालांकि 15 दिन पहले इलाके के रामलाल चौरसिया ने डीएम को पत्र लिखकर गेट तोड़ने का विरोध किया था। उनका कहना था कि गेट झुका नहीं है। पहले जांच हो, रिपोर्ट आने के बाद गेट बनवाने की अनुमति दी जाए। इस बाबत नगर पंचायत अध्यक्ष राधिका देवी ने बताया कि गेट काफी पुुराना हो गया था, जो एक तरफ झुक गया था। चौराहे पर हादसा हो सकता था। एडीएम को बताया गया था। मंजूरी मिलने के बाद गेट को तोड़ा गया। सभी आरोप गलत है।
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पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता समेत कई सदस्यों ने शासन सहित डीएम को पत्र खिलकर मामले की जांच कर कार्रवाई की बात कहीं है। गेट गिरने के बाद कस्बे में माहौल गर्म हो गया है।
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करीब पांच वर्ष पूर्व नगर के मुख्यद्वार पर तत्कालीन अध्यक्ष गनेश यादव मुख्य गेट बनवाया था। जिस पर दस लाख रुपये से अधिक खर्च किया गया था। एक माह पहले नगर पंचायत ने एडीएम को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि पंचायत का मुख्यगेट का एक हिस्सा झुक गया है, जिससे हादसे की संभावना बनी हुई है।
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एडीएम ने पूरे मामले की जांच सौंप दी। आरोप है कि जांच पूरी होने से पहले नगर पालिका अध्यक्ष राधिक देवी और ईओ जितेन्द्र कुमार की मिलीभगत से शनिवार की रात जेसीबी लगाकर गेट गिरा दिया गया। सुबह जब इसकी जानकारी लोगों को हुई तो उन्होंने विरोध किया। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गनेश यादव का कहना है कि गेट बेहद मजबूत था। सरकारी धन को खपाने के लिए गेट को गिरा दिया गया।
जबकि भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपक जायसवाल का कहना है कि अध्यक्ष और ईओ ने नए गेट के लिए प्रस्ताव दिया है। इसके तहत उन्होंने पूरे मजबूत गेट को गिरा दिया ताकि नया गेट बनवाकर धन का बंदरबांट किया जा सके। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत डीएम के साथ ही शासन में कर दी गई है। कार्रवाई नहीं होने पर भाजपा आंदोलन करेंगी।
हालांकि 15 दिन पहले इलाके के रामलाल चौरसिया ने डीएम को पत्र लिखकर गेट तोड़ने का विरोध किया था। उनका कहना था कि गेट झुका नहीं है। पहले जांच हो, रिपोर्ट आने के बाद गेट बनवाने की अनुमति दी जाए। इस बाबत नगर पंचायत अध्यक्ष राधिका देवी ने बताया कि गेट काफी पुुराना हो गया था, जो एक तरफ झुक गया था। चौराहे पर हादसा हो सकता था। एडीएम को बताया गया था। मंजूरी मिलने के बाद गेट को तोड़ा गया। सभी आरोप गलत है।