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गुर्दा फेल, 'व्यवस्था' में तड़प रहा मजदूर
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Thu, 07 Apr 2016 10:56 PM IST
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गंभीर बीमारी से पीड़ित ठग प्रसाद व उनके परिवार के सदस्य।
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सलेमपुर में गंभीर रूप से बीमार ठग प्रसाद के लिए सरकारी सिस्टम बेमानी साबित हो रहा है। अपनी इलाज के लिए वह अफसरों से कई बार गुहार लगा चुके हैं। लेकिन कागजी अड़चनों की वजह से आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से उनकी हालत और गंभीर होती जा रही है।
महानपुर बुजुर्ग गांव निवासी 50 वर्षीय ठग प्रसाद मजदूरी करके अपने परिवार की गाड़ी खींचता था। डेढ़ वर्ष वह गंभीर रूप से बीमार हुआ। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की जांच में उनका दोनों गुर्दा खराब होने की जानकारी हुई। आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर के पास सात कट्ठे पुस्तैनी जमीन है जिसे उसने इलाज कराने के लिए गिरवी रख दिया है। लेकिन इलाज में लगने वाली रकम के ज्यादा होने के चलते बीमारी गंभीर होती जा रही है। इस बीमार मजदूर के लिए सरकार के तरफ से चलाई जा रही स्वास्थ्य संबंधित योजनाएं मुंह चिढ़ा रही है।
वहीं समाज सेवी संस्थाएं भी मदद के लिए आगे नहीं आई हैं। गांव वालों के सहयोग से दो वक्त का भोजन मजदूर के परिवार को मिल रहा है। लखनऊ पीजीआई रिहायसी झोपड़ी में गुजर बसर कर रहे इस शख्स की सूनी आंखों को जनप्रतिनिधियों और समाज सेवी संस्थाओं की मदद का इंतजार है।
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महानपुर बुजुर्ग गांव निवासी 50 वर्षीय ठग प्रसाद मजदूरी करके अपने परिवार की गाड़ी खींचता था। डेढ़ वर्ष वह गंभीर रूप से बीमार हुआ। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की जांच में उनका दोनों गुर्दा खराब होने की जानकारी हुई। आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर के पास सात कट्ठे पुस्तैनी जमीन है जिसे उसने इलाज कराने के लिए गिरवी रख दिया है। लेकिन इलाज में लगने वाली रकम के ज्यादा होने के चलते बीमारी गंभीर होती जा रही है। इस बीमार मजदूर के लिए सरकार के तरफ से चलाई जा रही स्वास्थ्य संबंधित योजनाएं मुंह चिढ़ा रही है।
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वहीं समाज सेवी संस्थाएं भी मदद के लिए आगे नहीं आई हैं। गांव वालों के सहयोग से दो वक्त का भोजन मजदूर के परिवार को मिल रहा है। लखनऊ पीजीआई रिहायसी झोपड़ी में गुजर बसर कर रहे इस शख्स की सूनी आंखों को जनप्रतिनिधियों और समाज सेवी संस्थाओं की मदद का इंतजार है।
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