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Deoria News: अरहर की दाल खरीद रहे हैं...जांच लें, नमूने हुए हैं फेल
Wed, 22 May 2024 04:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 22 May 2024 04:11 AM IST
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अरहर में खेसारी मिलाने से सेहत को हो रहा नुकसान
प्रोटीन का स्रोत माने जाने वाली दाल की जगह खा रहे हैं मिलावटी तो आंख व लीवर के जल्द खराब होने की आशंका
...फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बाजार में बिक रही अरहर व चने की दाल का सेवन कर रहे हैं तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटखोर इसमें खेसारी की मिलावट कर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में खुद नहीं चेते तो यह आपको बीमार बना सकती है। चिकित्सक भी कहते हैं कि ऐसी दाल का सेवन करने से आंख व लकवा जैसी घातक बीमारी की चपेट में आने की आशंका होती है।
प्रोटीन का बड़ा स्रोत माने जाने वाली और हर घर में सुबह में बनने वाली दाल मिलावटखोरों के निशाने पर आ गई है। इधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में अरहर व चने की दाल ज्यादा पसंद की जाती है। कई घरों में अरहर, चना, मटर सहित अन्य दालें मिलाकर बनाई जाती हैं। हालांकि, अरहर व चने की दाल में मिलावट की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। जानकार बताते हैं कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ से आने वाली मिलावटी दाल को यूपी के विभिन्न क्षेत्रों में खपाया जा रहा है। कम मात्रा में मिलावट होने से इसकी पहचान करना आम लोगों के लिए मुश्किल है। उधर, सरकार की ओर से खेसारी दाल के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के चलते सरकार ने इसकी बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, इसके बावजूद अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में लोकल क्षेत्र के दुकानदार लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। शासन की ओर से खाद्य सुरक्षा विभाग को दुकानदारों व थोक कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर दाल की जांच के आदेश दिए गए हैं।
हर दिन दाल मंडी में आती है एक ट्रक में 300 क्विंटल दाल
मोहन रोड में दाल के थोक कारोबारी राजकुमार जायसवाल बताते हैं कि जिले में अरहर की दाल कटनी व नागपुर से, चने की दाल नागपुर से तथा मटर की दाल कानपुर से आ रही है। शहर के मार्केट में हर दिन एक गाड़ी, जिसमें 250 से 300 क्विंटल तक दाल होती है, खप जाती है। आठ से 10 किमी के दायरे में स्थित किराना के दुकानदार भी यहीं से माल ले जाते हैं। सलेमपुर, भाटपाररानी, बरहज, रुद्रपुर के व्यापारी सीधे कंपनी से या गोरखपुर से दाल मंगा ले रहे हैं। मिलावटखोरी से बचने के लिए ग्राहकों को ब्रांड की ही दाल लेनी चाहिए। खरीदते समय दानों को परखने के बाद ही लें। एक अन्य व्यापारी अजय नांगलिया ने बताया कि जिले में प्रति माह करीब 500 टन दाल की खपत है।
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पिछले डेढ़ साल के अंदर दाल के 100 से अधिक नमूने लिए गए हैं। इसमें कई नमूने फेल हुए हैं। ऐसे में संबंधित दुकानदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। विभाग की ओर से जिले की विभिन्न जगहों पर जांच की जाती है। खेसारी की दाल पर पहले ही शासन की ओर से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। मिलावट की शिकायत मिलने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाती है।
-विनय कुमार सहाय, सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड टू
खेसारी की दाल का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ऐसे में अरहर या चने की दाल की खरीदारी करते वक्त विशेष सावधानी की जरूरत है। जानकारी के अभाव में इसका नियमित इस्तेमाल करने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इससे पैरालाइसिस अटैक के अलावा लीवर को भी नुकसान हो सकता है। खेसारी तंत्रिका तंत्र को काफी नुकसान पहुंचाती है। साथ ही आंखों से जुड़ी तकलीफ भी हो सकती है।
-डॉ. विजय गुप्ता, फिजिशियन मेडिकल कॉलेज
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प्रोटीन का स्रोत माने जाने वाली दाल की जगह खा रहे हैं मिलावटी तो आंख व लीवर के जल्द खराब होने की आशंका
...फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बाजार में बिक रही अरहर व चने की दाल का सेवन कर रहे हैं तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटखोर इसमें खेसारी की मिलावट कर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में खुद नहीं चेते तो यह आपको बीमार बना सकती है। चिकित्सक भी कहते हैं कि ऐसी दाल का सेवन करने से आंख व लकवा जैसी घातक बीमारी की चपेट में आने की आशंका होती है।
प्रोटीन का बड़ा स्रोत माने जाने वाली और हर घर में सुबह में बनने वाली दाल मिलावटखोरों के निशाने पर आ गई है। इधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में अरहर व चने की दाल ज्यादा पसंद की जाती है। कई घरों में अरहर, चना, मटर सहित अन्य दालें मिलाकर बनाई जाती हैं। हालांकि, अरहर व चने की दाल में मिलावट की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। जानकार बताते हैं कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ से आने वाली मिलावटी दाल को यूपी के विभिन्न क्षेत्रों में खपाया जा रहा है। कम मात्रा में मिलावट होने से इसकी पहचान करना आम लोगों के लिए मुश्किल है। उधर, सरकार की ओर से खेसारी दाल के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के चलते सरकार ने इसकी बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, इसके बावजूद अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में लोकल क्षेत्र के दुकानदार लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। शासन की ओर से खाद्य सुरक्षा विभाग को दुकानदारों व थोक कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर दाल की जांच के आदेश दिए गए हैं।
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हर दिन दाल मंडी में आती है एक ट्रक में 300 क्विंटल दाल
मोहन रोड में दाल के थोक कारोबारी राजकुमार जायसवाल बताते हैं कि जिले में अरहर की दाल कटनी व नागपुर से, चने की दाल नागपुर से तथा मटर की दाल कानपुर से आ रही है। शहर के मार्केट में हर दिन एक गाड़ी, जिसमें 250 से 300 क्विंटल तक दाल होती है, खप जाती है। आठ से 10 किमी के दायरे में स्थित किराना के दुकानदार भी यहीं से माल ले जाते हैं। सलेमपुर, भाटपाररानी, बरहज, रुद्रपुर के व्यापारी सीधे कंपनी से या गोरखपुर से दाल मंगा ले रहे हैं। मिलावटखोरी से बचने के लिए ग्राहकों को ब्रांड की ही दाल लेनी चाहिए। खरीदते समय दानों को परखने के बाद ही लें। एक अन्य व्यापारी अजय नांगलिया ने बताया कि जिले में प्रति माह करीब 500 टन दाल की खपत है।
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पिछले डेढ़ साल के अंदर दाल के 100 से अधिक नमूने लिए गए हैं। इसमें कई नमूने फेल हुए हैं। ऐसे में संबंधित दुकानदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। विभाग की ओर से जिले की विभिन्न जगहों पर जांच की जाती है। खेसारी की दाल पर पहले ही शासन की ओर से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। मिलावट की शिकायत मिलने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाती है।
-विनय कुमार सहाय, सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड टू
खेसारी की दाल का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ऐसे में अरहर या चने की दाल की खरीदारी करते वक्त विशेष सावधानी की जरूरत है। जानकारी के अभाव में इसका नियमित इस्तेमाल करने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इससे पैरालाइसिस अटैक के अलावा लीवर को भी नुकसान हो सकता है। खेसारी तंत्रिका तंत्र को काफी नुकसान पहुंचाती है। साथ ही आंखों से जुड़ी तकलीफ भी हो सकती है।
-डॉ. विजय गुप्ता, फिजिशियन मेडिकल कॉलेज