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इकबाल ने पेश की एकता की मिसाल
देवरिया
Updated Fri, 07 Oct 2016 10:53 PM IST
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इकबाल
- फोटो : अमर उजाला
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सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर। मंदिर में भजन गाने रमजान आते हैं, वहां भजन सुनने के लिए भगवान आते हैं, फिरकापरस्ती छू नहीं सकती उस गांव को, बनाने राम की मूरत जहां रहमान आते हों। शायर राकेश राही की इन लाइनों को एक बार फिर रुद्रपुर के रहने वाले इकबाल ने सार्थक साबित की है। मस्जिद वार्ड के इकबाल ने कौमी एकता की जो मिसाल पेश की है। रुद्रपुर में पहली बार किसी ताजियादार ने दुर्गा पूजा को देखते हुए ताजिया रखने का स्थान बदला है।
इकबाल के इस कदम की लोग प्रशंसा कर रहे हैं। मस्जिद वार्ड में नवयुवक मंगल दल की ओर से हर वर्ष दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर भव्य पंडाल सजाया जाता है। दुर्गा प्रतिमा के बगल में ताजिया रखी जाती है। इस वर्ष मुहर्रम और दुर्गा पूजा का त्योहार एक साथ पड़ने से दुर्गा समिति के लोगों को पंडाल बनाने में परेशानी आ रही थी। मुहर्रम के कारण मूर्ति स्थापना करने वाले पांडाल बनाने को लेकर लोग पशोपेश में थे लेकिन इकबाल के निर्णय से न सिर्फ समस्या दूर हो गई, बल्कि गंगा जमुनी तहजीब को नई दिशा मिली।
इकबाल ने दुर्गा पूजा समिति की बैठक में पहुंचकर इस बार दुर्गा पूजा को और भव्य तरीके से मनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह ताजिया तय स्थान से हटाकर दूसरी जगह रखेंगे ताकि दुर्गा प्रतिमा को स्थापित करने में परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि यहां 140 वर्ष से ताजिया रखी जाती है। इसी स्थान पर दुर्गा पूजा में मूर्ति भी रखी जाती है।
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अगले साल भी मुहर्रम और दुर्गा पूजा साथ पड़ेगा। हमने दो साल के लिए निर्धारित चौक पर ताजिया नहीं रखने का निर्णय लिया है। नव युवक मंडल दल के लोगों ने इकबाल का आभार जताया।
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रुद्रपुर। मंदिर में भजन गाने रमजान आते हैं, वहां भजन सुनने के लिए भगवान आते हैं, फिरकापरस्ती छू नहीं सकती उस गांव को, बनाने राम की मूरत जहां रहमान आते हों। शायर राकेश राही की इन लाइनों को एक बार फिर रुद्रपुर के रहने वाले इकबाल ने सार्थक साबित की है। मस्जिद वार्ड के इकबाल ने कौमी एकता की जो मिसाल पेश की है। रुद्रपुर में पहली बार किसी ताजियादार ने दुर्गा पूजा को देखते हुए ताजिया रखने का स्थान बदला है।
इकबाल के इस कदम की लोग प्रशंसा कर रहे हैं। मस्जिद वार्ड में नवयुवक मंगल दल की ओर से हर वर्ष दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर भव्य पंडाल सजाया जाता है। दुर्गा प्रतिमा के बगल में ताजिया रखी जाती है। इस वर्ष मुहर्रम और दुर्गा पूजा का त्योहार एक साथ पड़ने से दुर्गा समिति के लोगों को पंडाल बनाने में परेशानी आ रही थी। मुहर्रम के कारण मूर्ति स्थापना करने वाले पांडाल बनाने को लेकर लोग पशोपेश में थे लेकिन इकबाल के निर्णय से न सिर्फ समस्या दूर हो गई, बल्कि गंगा जमुनी तहजीब को नई दिशा मिली।
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इकबाल ने दुर्गा पूजा समिति की बैठक में पहुंचकर इस बार दुर्गा पूजा को और भव्य तरीके से मनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह ताजिया तय स्थान से हटाकर दूसरी जगह रखेंगे ताकि दुर्गा प्रतिमा को स्थापित करने में परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि यहां 140 वर्ष से ताजिया रखी जाती है। इसी स्थान पर दुर्गा पूजा में मूर्ति भी रखी जाती है।
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अगले साल भी मुहर्रम और दुर्गा पूजा साथ पड़ेगा। हमने दो साल के लिए निर्धारित चौक पर ताजिया नहीं रखने का निर्णय लिया है। नव युवक मंडल दल के लोगों ने इकबाल का आभार जताया।