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Deoria News: पट्टा धारकों की खतौनी पर दर्ज कर दिया दूसरे का इंद्राज, खत्म किए जाने का आदेश
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चकिया कोठी स्थित सीलिंग भूमि के पट्टा धारकों का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी। तहसील क्षेत्र के चकिया कोठी गांव स्थित सीलिंग भूमि के दर्जनों पट्टा धारकों के खतौनी पर दूसरे का फर्जी तौर पर दर्ज इंद्राज समाप्त किए जाने संबंधित तहसीलदार का आदेश दर्ज कर दिया गया है।इसे लेकर अपनी पट्टा की भूमि को पूर्णतः सुरक्षित रखने वाले पट्टा धारक मानसिक रूप से परेशान हैं। इस प्रकरण को लेकर राजपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता जटाशंकर सिंह ने न्याय दिलाने की आवाज उठाई है। जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
वर्ष 1973 में कृषि कार्य के लिए चकिया गांव स्थित सीलिंग भूमि का पट्टा भूमिहीन लोगों तथा फौज में सेवा देने वाले लोगों के नाम से आवंटित किया गया था।वहीं कुछ दिनों पूर्व जिलाधिकारी कार्यालय को कुछ पट्टा धारकों द्वारा अपने पट्टे की भूमि को पट्टा शर्तों का उल्लंघन करते हुए बेचे जाने तथा फर्जी तौर पर कूट रचना करके फर्जी इंद्राज दर्ज किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी।जिलाधिकारी के आदेश पर गठित अधिकारियों की टीम ने इस प्रकरण की जांच की।जांचोपरांत मुख्य राजस्व अधिकारी के आदेश पर कई पट्टा धारकों के इंद्राज को खत्म कर दिया गया है।लेकिन जिन पट्टा धारकों ने अपनी भूमि को अब तक बेचा नहीं है और पट्टा शर्तों का पालन करते हुए उसे शत-प्रतिशत सुरक्षित रखा है। उनकी खतौनी पर भी समाप्त किए गए इंद्राज का आदेश दर्ज कर दिया गया है।ऐसे पट्टा धारकों में महमूद आलम पुत्र भोज, इसरारुल हक पुत्र शकूर, सफीउल्लाह पुत्र हनीफ सहित दर्जनों पट्टा धारक शामिल हैं। इसे लेकर पट्टे की भूमि को सुरक्षित रखने वाले पट्टा धारक मानसिक रूप से परेशान हैं। उपजिलाधिकारी अंगद यादव ने कहा कि मुझे इस प्रकरण की जानकारी नहीं। शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी। तहसील क्षेत्र के चकिया कोठी गांव स्थित सीलिंग भूमि के दर्जनों पट्टा धारकों के खतौनी पर दूसरे का फर्जी तौर पर दर्ज इंद्राज समाप्त किए जाने संबंधित तहसीलदार का आदेश दर्ज कर दिया गया है।इसे लेकर अपनी पट्टा की भूमि को पूर्णतः सुरक्षित रखने वाले पट्टा धारक मानसिक रूप से परेशान हैं। इस प्रकरण को लेकर राजपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता जटाशंकर सिंह ने न्याय दिलाने की आवाज उठाई है। जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
वर्ष 1973 में कृषि कार्य के लिए चकिया गांव स्थित सीलिंग भूमि का पट्टा भूमिहीन लोगों तथा फौज में सेवा देने वाले लोगों के नाम से आवंटित किया गया था।वहीं कुछ दिनों पूर्व जिलाधिकारी कार्यालय को कुछ पट्टा धारकों द्वारा अपने पट्टे की भूमि को पट्टा शर्तों का उल्लंघन करते हुए बेचे जाने तथा फर्जी तौर पर कूट रचना करके फर्जी इंद्राज दर्ज किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी।जिलाधिकारी के आदेश पर गठित अधिकारियों की टीम ने इस प्रकरण की जांच की।जांचोपरांत मुख्य राजस्व अधिकारी के आदेश पर कई पट्टा धारकों के इंद्राज को खत्म कर दिया गया है।लेकिन जिन पट्टा धारकों ने अपनी भूमि को अब तक बेचा नहीं है और पट्टा शर्तों का पालन करते हुए उसे शत-प्रतिशत सुरक्षित रखा है। उनकी खतौनी पर भी समाप्त किए गए इंद्राज का आदेश दर्ज कर दिया गया है।ऐसे पट्टा धारकों में महमूद आलम पुत्र भोज, इसरारुल हक पुत्र शकूर, सफीउल्लाह पुत्र हनीफ सहित दर्जनों पट्टा धारक शामिल हैं। इसे लेकर पट्टे की भूमि को सुरक्षित रखने वाले पट्टा धारक मानसिक रूप से परेशान हैं। उपजिलाधिकारी अंगद यादव ने कहा कि मुझे इस प्रकरण की जानकारी नहीं। शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई होगी।
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