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आईएमए के आह्वान पर प्रदर्शन किया
देवरिया
Updated Wed, 16 Nov 2016 10:47 PM IST
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देवरिया। आईएमए के आह्वान पर डॉक्टरों ने बुधवार को मार्च निकाला। डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया। डॉक्टरों की मुख्य मांगें एनएमसी को समाप्त करने, एमसीआई एक्ट में बिना उसकी स्वायत्ता समझौता किए उचित संशोधन करने और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट में दिए जाने वाले मुआवजे को सीमित करने की है।
देवरिया क्लब में एकत्र हुए डॉक्टर मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आगे बैनर में मुख्य मांगें लिखी थीं। शांतिपूर्वक कलेक्ट्रेट पहुंचे डॉक्टरों ने मांगों से संबंधित ज्ञापन दिया। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मांगें जायज हैं, इस पर शीघ्र अमल करने की जरूरत है।
मार्च का नेतृत्व आईएमए देवरिया शाखा के अध्यक्ष डॉ. जेएन पांडेय ने किया। इस दौरान डॉ. विपिन बिहारी शुक्ला, डॉ. सौरभ बरनवाल, डॉ. एससी श्रीवास्तव, डॉ. शोभा शुक्ला, डॉ. चंद्रभान मिश्रा, डॉ. अवधेश सिंह, डॉ. एसके अग्रवाल, डॉ. खुर्शीद अहमद, डॉ. दाऊद अंसारी, डॉ. अनिरुद्घ सिंह, डॉ. संजीव अग्रवाल, डॉ. जावेद अनवर, डॉ. एके चौरसिया, डॉ. उमेश चंद्रा, डॉ. नवेंदु राय, डॉ.सीपी मल्ल, डॉ. प्रमोद त्रिपाठी, डॉ. रणधीर सिंह आदि शामिल थे।
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डॉक्टरों ने ज्ञापन के जरिए लाइसेंस राज को समाप्त करने और एकल डॉक्टर क्लीनिक एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से मुक्त रखने की मांग की। पीसी पीएनडीटी एक्ट के तहत सिर्फ भ्रूण के लिंग परीक्षण एवं गर्भपात पर दंडात्मक सजा दी जाए, न कि कागजी गलतियों पर। डॉक्टरों और अस्पतालों पर हिंसा रोकने के लिए सेंट्रल एक्ट बनाने की भी मांग की गई। मॉडर्न मेडीसिन और देसी चिकित्सा पद्घतियों के अवैज्ञानिक मेल पर तुरंत रोक लगाने की बात कही गई।
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देवरिया क्लब में एकत्र हुए डॉक्टर मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आगे बैनर में मुख्य मांगें लिखी थीं। शांतिपूर्वक कलेक्ट्रेट पहुंचे डॉक्टरों ने मांगों से संबंधित ज्ञापन दिया। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मांगें जायज हैं, इस पर शीघ्र अमल करने की जरूरत है।
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मार्च का नेतृत्व आईएमए देवरिया शाखा के अध्यक्ष डॉ. जेएन पांडेय ने किया। इस दौरान डॉ. विपिन बिहारी शुक्ला, डॉ. सौरभ बरनवाल, डॉ. एससी श्रीवास्तव, डॉ. शोभा शुक्ला, डॉ. चंद्रभान मिश्रा, डॉ. अवधेश सिंह, डॉ. एसके अग्रवाल, डॉ. खुर्शीद अहमद, डॉ. दाऊद अंसारी, डॉ. अनिरुद्घ सिंह, डॉ. संजीव अग्रवाल, डॉ. जावेद अनवर, डॉ. एके चौरसिया, डॉ. उमेश चंद्रा, डॉ. नवेंदु राय, डॉ.सीपी मल्ल, डॉ. प्रमोद त्रिपाठी, डॉ. रणधीर सिंह आदि शामिल थे।
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डॉक्टरों ने ज्ञापन के जरिए लाइसेंस राज को समाप्त करने और एकल डॉक्टर क्लीनिक एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से मुक्त रखने की मांग की। पीसी पीएनडीटी एक्ट के तहत सिर्फ भ्रूण के लिंग परीक्षण एवं गर्भपात पर दंडात्मक सजा दी जाए, न कि कागजी गलतियों पर। डॉक्टरों और अस्पतालों पर हिंसा रोकने के लिए सेंट्रल एक्ट बनाने की भी मांग की गई। मॉडर्न मेडीसिन और देसी चिकित्सा पद्घतियों के अवैज्ञानिक मेल पर तुरंत रोक लगाने की बात कही गई।