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2003 में समूह ग की भर्ती में हुई थी धांधली
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Tue, 21 Jun 2016 11:34 PM IST
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2003 में समूह ग की भर्ती में हुई थी धांधली
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देवरिया जिले की 2003 में समूह ग की सीधी भर्ती प्रकरण की जांच पूरी हो गई है। इसमें धांधली की पुष्टि होने पर शासन ने तत्कालीन डीडीओ (अब सेवानिवृत्त) प्रेमप्रकाश त्रिपाठी के पेंशन से दस फीसदी संचयी प्रभाव से कटौती के साथ ही विभागीय कार्रवाई खत्म करने का फैसला किया है। ग्राम्य विकास अनुभाग के संयुक्त सचिव ने आदेश भी जारी कर दिया है।
वर्ष 2003 में सीधी भर्ती की नियुक्तियों में धांधली सामने आई थी। अनुसूचित जाति के चार कनिष्ठ लिपिकों के मामले में संशोधित नियमावली के तहत लिस्ट तैयार नहीं कराई गई थी। रोजगार कार्यालय की अधिसूचना परीक्षा, साक्षात्कार से 15 दिन पूर्व किया जाना चाहिए था। इसका पालन नहीं किया गया। 325 अभ्यर्थियों को 3-4 दिन पहले 26 जून 2003 को टंकन की सूचना भेजी गई। जबकि टंकन परीक्षा 29 और 30 जून 2003 की तिथियां निर्धारित की गई थी। इसके कारण महज 128 अभ्यर्थी ही उपस्थित हो सके थे। साक्षात्कार की शीट में चयन समिति के अनेक सदस्यों की ओर से कटिंग, ओवरराइटिंग किया गया था।
चयन समिति के एक सदस्य बीडीओ भाटपाररानी के साक्षात्कार शीट में सुरेंद्र कुमार गौतम नामक अभ्यर्थी को सामान्य ज्ञान, व्यक्तित्व निर्धारण, अभिव्यक्ति की क्षमता में क्रमश: एक, तीन, तीन अर्थात सात अंक दिया गया था। बाद में ओवरराइटिंग कर क्रमश: आठ, आठ, आठ यानी 24 अंक दिए गए। इसी तरह रामज्ञान प्रसाद और दुर्गा प्रसाद नामक अभ्यर्थियों का पहले 12-12 अंक योग में दिया गया। बाद में एक-एक दर्शा दिया गया।
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चयन समिति के एक अन्य सदस्य बीडीओ रुद्रपुर ने दुर्गा प्रसाद नामक अभ्यर्थी को पूर्व में नौ अंक दिया, बाद में एक कर दिया। अनुदेशक ने गलतियों पर अंक नहीं काटे। 28 अभ्यर्थियों के टंकन शीट पर अध्यक्ष, नियुक्ति प्राधिकारी के साथ चयन समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। इस मामले में शासन ने कमिश्नर गोरखपुर को जांच अधिकारी नामित किया था। उन्होंने 31 जुलाई 2015 को जांच आख्या शासन को भेज दी। इसके दो साल पहले 30 जून 2013 को तत्कालीन डीडीओ प्रेमप्रकाश त्रिपाठी सेवानिवृत्त हो गए थे।
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वर्ष 2003 में सीधी भर्ती की नियुक्तियों में धांधली सामने आई थी। अनुसूचित जाति के चार कनिष्ठ लिपिकों के मामले में संशोधित नियमावली के तहत लिस्ट तैयार नहीं कराई गई थी। रोजगार कार्यालय की अधिसूचना परीक्षा, साक्षात्कार से 15 दिन पूर्व किया जाना चाहिए था। इसका पालन नहीं किया गया। 325 अभ्यर्थियों को 3-4 दिन पहले 26 जून 2003 को टंकन की सूचना भेजी गई। जबकि टंकन परीक्षा 29 और 30 जून 2003 की तिथियां निर्धारित की गई थी। इसके कारण महज 128 अभ्यर्थी ही उपस्थित हो सके थे। साक्षात्कार की शीट में चयन समिति के अनेक सदस्यों की ओर से कटिंग, ओवरराइटिंग किया गया था।
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चयन समिति के एक सदस्य बीडीओ भाटपाररानी के साक्षात्कार शीट में सुरेंद्र कुमार गौतम नामक अभ्यर्थी को सामान्य ज्ञान, व्यक्तित्व निर्धारण, अभिव्यक्ति की क्षमता में क्रमश: एक, तीन, तीन अर्थात सात अंक दिया गया था। बाद में ओवरराइटिंग कर क्रमश: आठ, आठ, आठ यानी 24 अंक दिए गए। इसी तरह रामज्ञान प्रसाद और दुर्गा प्रसाद नामक अभ्यर्थियों का पहले 12-12 अंक योग में दिया गया। बाद में एक-एक दर्शा दिया गया।
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चयन समिति के एक अन्य सदस्य बीडीओ रुद्रपुर ने दुर्गा प्रसाद नामक अभ्यर्थी को पूर्व में नौ अंक दिया, बाद में एक कर दिया। अनुदेशक ने गलतियों पर अंक नहीं काटे। 28 अभ्यर्थियों के टंकन शीट पर अध्यक्ष, नियुक्ति प्राधिकारी के साथ चयन समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। इस मामले में शासन ने कमिश्नर गोरखपुर को जांच अधिकारी नामित किया था। उन्होंने 31 जुलाई 2015 को जांच आख्या शासन को भेज दी। इसके दो साल पहले 30 जून 2013 को तत्कालीन डीडीओ प्रेमप्रकाश त्रिपाठी सेवानिवृत्त हो गए थे।