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प्रखर समाजवादी चिंतक हरिवंश सहाय का निधन

Thu, 09 Jun 2022 11:46 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2022 11:46 PM IST
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great socialist leader garivansh sahay passes away
प्रखर समाजवादी चिंतक हरिवंश सहाय का निधन
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भाटपाररानी। पूर्व सांसद हरिवंश सहाय का बृहस्पतिवार को सुबह 85 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। उन्होंने गाजियाबाद में अपने बड़े बेटे जिला जज अशोक कुशवाहा के आवास पर इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वे प्रखर समाजवादी चिंतक एवं विचारक थे।
भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक तथा सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से एक बार सांसद रह चुके थे। वे पिछले एक वर्ष से काफी अस्वस्थ चल रहे थे। उनके छोटे पुत्र अरविंद सहाय ने बताया कि उनका शव रात में भाटपाररानी पहुंचेगा। यहां लोगों के अंतिम दर्शन करने के बाद शुक्रवार को सुबह पैतृक गांव कुकुर घाटी के विश्वंभर टोला ले जाया जाएगा। बड़े बेटे अशोक कुशवाहा इस समय मऊ जनपद में जिला जज हैं। छोटे बेटे डॉ. अरविंद सहाय पिता द्वारा स्थापित चौधरी चरण सिंह महाविद्यालय बरईपार पांडेय देवरिया के प्राचार्य और भाजपा नेता हैं। उनके बड़े बेटे अशोक की पुत्री दिल्ली एम्स में चिकित्सक तथा बेटा उच्चतम् न्यायालय में अधिवक्ता हैं। उनके निधन पर सभी दलों के नेताओं ने शोक जताया है। भाजपा के सांसद रवींद्र कुशवाहा, विधायक सभा कुंवर कुशवाहा, राजकुमार शाही, राघवेंद्र वीर विक्रम सिंह, सुशील शाही, अश्वनी सिंह, ब्लाक प्रमुख बिंदा कुशवाहा, रामाश्रय कुशवाहा, संतोष पटेल, पूर्व सांसद आस मोहम्मद, पूर्व विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय, सपा जिलाध्यक्ष दिलीप यादव सहित दर्जनों नेताओं, ग्राम प्रधानों, बीडीसी सदस्यों एवं पूर्व ग्राम प्रधानों आदि ने शोक व्यक्त किया है।
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शिक्षक से सदन तक का किया सफर
भाटपाररानी। मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज में वर्ष 1960 में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता पद पर नौकरी में आए स्व. हरिवंश सहाय चार बार विधायक तथा सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से एक बार सांसद रह चुके हैं। वे 1969, 1974, 1977, 1980, 1985, 1989, 1991, 1993 और 2002 में विधायक का चुनाव लड़े। पहली बार वे 1969 में लोकदल के टिकट से भाटपाररानी से विधायक चुने गए थे। 1980 में लोकदल चौधरी चरण सिंह की पार्टी से चुनाव लड़ कर विधायक बने। 1989 में जनता दल से तीसरी बार विधायक बने। 1991 में मध्यावधि चुनाव के दौरान पुन: जनता दल से ही चुनाव जीते। इसी दौरान मुलायम सिंह यादव के अत्यंत करीबी होने के कारण सलेमपुर लोकसभा से 1996 में सपा के टिकट से चुनाव में उतरे और जीत गए। इसके बाद तीन चुनाव लड़े, लेकिन पराजित हुए। बीच में बसपा की सदस्यता भी ग्रहण की, लेकिन ज्यादा दिन तक नहीं टिक सके और सपा में चले गए। सपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके थे। आपातकाल के दौरान 22 महीने जेल में रहे।
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