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- पूर्व बीएसए, लेखाधिकारी, पटल लिपिक हो चुके हैं निलंबित
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सतीश ने उगले राज, कई नियुक्तियाें पर नजर
फर्जी शिक्षक प्रकरण: दो साल पूर्व एक प्रबंधक सहित कई शिक्षकों पर दर्ज हुआ था मुकदमा
पूर्व बीएसए, लेखाधिकारी, पटल लिपिक हो चुके हैं निलंबित
जिले में चल रहे हैं 72 अनुदानित विद्यालय, जांच हो तो हो सकता है पर्दाफाश
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित जिले के अनुदानित विद्यालयों में नियुक्तियों के नाम पर धांधली हुई है। गुजरात, आंध्र प्रदेश, मेघालय, सिक्किम सहित अन्य प्रांतों के स्नातक व बीएड प्रमाण पत्रों के आधार पर ज्यादातर लोगों को नौकरी दी गई है। इन शिक्षकों के भी प्रमाण पत्रों की जांच हो तो, जिले में बड़ा खुलासा तय है।
फर्जी शिक्षक प्रकरण की जांच कर रही एसटीएफ टीम की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नित नए खुलासे हो रहे हैं। 17 फरवरी को जैसे ही एसटीएफ ने जिले के पुुरनाछापर निवासी एवं लघु माध्यमिक विद्यालय शाहपुर पुरैनी, पथरदेवा में तैनात शिक्षक सतीश चंद्र मिश्र को हिरासत में ले लिया, इस मामले में एक और मोड़ आ गया। एसटीएफ के ही अनुसार पूछताछ में उसने जिले के कुछ और अनुदानित विद्यालयों में 17 शिक्षकों को प्रबंध तंत्र के कहने पर गुजरात से स्नातक व बीएड की फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर इन्हें नौकरी दिलाने में अपना योगदान रहने की बात स्वीकार की है। खुद उसने भी अपने तैनाती वाले विद्यालय में वर्ष 2002 में यहीं के प्रमाण पत्र पर नौकरी हासिल करने की भी बात स्वीकारी है। इसके साथ ही उसने ऋषिराज देवरहा बाबा लघु माध्यमिक विद्यालय सरौरा करौंदी में भी फर्जी डिग्री पर नौकरी दिलाने की बात कही है। इस प्रकरण के बाद अब तक परिषदीय स्कूलों में ही शिकायतों के आधार पर फर्जी शिक्षकों की जांच में जुटी जांच टीम के निशाने पर अनुदानित कॉलेज में हुई नियुक्तियां भी आ गई हैं।
पूर्व बीएसए, लेखाधिकारी, लिपिक हो चुके हैं निलंबित
कूटरचित तरीके से अनुदानित स्कूलों में अपने चहेतों की भर्ती कराने के मामले में जिले में वर्ष 2018 में बीएसए रहे उपेंद्र कुमार, वित्त व लेखाधिकारी जगदीश श्रीवास्तव, पटल लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने जांच के बाद निलंबित कर दिया था। इसमें बीएसए को निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया। लेखाधिकारी व लिपिक आदेश पर स्थगनादेश लेकर अभी भी बीएसए कार्यालय में कार्यरत हैं।
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अगस्त 2018 में प्रबंधक, प्रधानाचार्य समेत 14 पर हुुुुआ था जालसाजी का मुकदमा
नियुक्ति में धांधली व कागजों में हेरफेर कर वेतन भुगतान के मामले में सलेमपुर के जनक लघु माध्यमिक विद्यालय, पकड़ी धनपुरवा के प्रबंधक, प्रधानाचार्य समेत 14 लोगों के खिलाफ जालसाजी व गबन का मुकदमा दर्ज हुआ था। एडी बेसिक की जांच के बाद तत्कालीन बीएसए संतोष देव पांडेय की तहरीर पर सलेमपुर कोतवाली में मामला दर्ज हुआ। आरोप था कि प्रबंध समिति ने बैक डेट में विज्ञापन प्रकाशित कराने के पहले ही नियुक्तियां कर लीं और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अधिकारियों से मिलीभगत कर वेतन का भुगतान भी करा लिया।
बुधवार की शाम बीएसए कार्यालय पहुंची थी एसटीएफ टीम
फर्जी शिक्षक प्रकरण में बुधवार की शाम चार सदस्यीय एसटीएफ की टीम बीएसए कार्यालय पहुंची थी। जांच एजेंसी के गोरखपुर प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि बुधवार को एक टीम देवरिया गई थी। पुरनाछापर के सतीश चंद्र मिश्र ने जिन शिक्षकों का नाम उगले हैं, उनसे संबंधित कागजात विभाग से मांगे गए हैं। जल्द ही इस मामले में भी बड़ी कार्रवाई होगी।
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फर्जी शिक्षक प्रकरण: दो साल पूर्व एक प्रबंधक सहित कई शिक्षकों पर दर्ज हुआ था मुकदमा
पूर्व बीएसए, लेखाधिकारी, पटल लिपिक हो चुके हैं निलंबित
जिले में चल रहे हैं 72 अनुदानित विद्यालय, जांच हो तो हो सकता है पर्दाफाश
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित जिले के अनुदानित विद्यालयों में नियुक्तियों के नाम पर धांधली हुई है। गुजरात, आंध्र प्रदेश, मेघालय, सिक्किम सहित अन्य प्रांतों के स्नातक व बीएड प्रमाण पत्रों के आधार पर ज्यादातर लोगों को नौकरी दी गई है। इन शिक्षकों के भी प्रमाण पत्रों की जांच हो तो, जिले में बड़ा खुलासा तय है।
फर्जी शिक्षक प्रकरण की जांच कर रही एसटीएफ टीम की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नित नए खुलासे हो रहे हैं। 17 फरवरी को जैसे ही एसटीएफ ने जिले के पुुरनाछापर निवासी एवं लघु माध्यमिक विद्यालय शाहपुर पुरैनी, पथरदेवा में तैनात शिक्षक सतीश चंद्र मिश्र को हिरासत में ले लिया, इस मामले में एक और मोड़ आ गया। एसटीएफ के ही अनुसार पूछताछ में उसने जिले के कुछ और अनुदानित विद्यालयों में 17 शिक्षकों को प्रबंध तंत्र के कहने पर गुजरात से स्नातक व बीएड की फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर इन्हें नौकरी दिलाने में अपना योगदान रहने की बात स्वीकार की है। खुद उसने भी अपने तैनाती वाले विद्यालय में वर्ष 2002 में यहीं के प्रमाण पत्र पर नौकरी हासिल करने की भी बात स्वीकारी है। इसके साथ ही उसने ऋषिराज देवरहा बाबा लघु माध्यमिक विद्यालय सरौरा करौंदी में भी फर्जी डिग्री पर नौकरी दिलाने की बात कही है। इस प्रकरण के बाद अब तक परिषदीय स्कूलों में ही शिकायतों के आधार पर फर्जी शिक्षकों की जांच में जुटी जांच टीम के निशाने पर अनुदानित कॉलेज में हुई नियुक्तियां भी आ गई हैं।
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पूर्व बीएसए, लेखाधिकारी, लिपिक हो चुके हैं निलंबित
कूटरचित तरीके से अनुदानित स्कूलों में अपने चहेतों की भर्ती कराने के मामले में जिले में वर्ष 2018 में बीएसए रहे उपेंद्र कुमार, वित्त व लेखाधिकारी जगदीश श्रीवास्तव, पटल लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने जांच के बाद निलंबित कर दिया था। इसमें बीएसए को निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया। लेखाधिकारी व लिपिक आदेश पर स्थगनादेश लेकर अभी भी बीएसए कार्यालय में कार्यरत हैं।
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अगस्त 2018 में प्रबंधक, प्रधानाचार्य समेत 14 पर हुुुुआ था जालसाजी का मुकदमा
नियुक्ति में धांधली व कागजों में हेरफेर कर वेतन भुगतान के मामले में सलेमपुर के जनक लघु माध्यमिक विद्यालय, पकड़ी धनपुरवा के प्रबंधक, प्रधानाचार्य समेत 14 लोगों के खिलाफ जालसाजी व गबन का मुकदमा दर्ज हुआ था। एडी बेसिक की जांच के बाद तत्कालीन बीएसए संतोष देव पांडेय की तहरीर पर सलेमपुर कोतवाली में मामला दर्ज हुआ। आरोप था कि प्रबंध समिति ने बैक डेट में विज्ञापन प्रकाशित कराने के पहले ही नियुक्तियां कर लीं और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अधिकारियों से मिलीभगत कर वेतन का भुगतान भी करा लिया।
बुधवार की शाम बीएसए कार्यालय पहुंची थी एसटीएफ टीम
फर्जी शिक्षक प्रकरण में बुधवार की शाम चार सदस्यीय एसटीएफ की टीम बीएसए कार्यालय पहुंची थी। जांच एजेंसी के गोरखपुर प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि बुधवार को एक टीम देवरिया गई थी। पुरनाछापर के सतीश चंद्र मिश्र ने जिन शिक्षकों का नाम उगले हैं, उनसे संबंधित कागजात विभाग से मांगे गए हैं। जल्द ही इस मामले में भी बड़ी कार्रवाई होगी।