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जालसाज दंपती की कहानी: आईएएस बनने के लिए पिता ने भेजा था, दिल्ली जाने के बाद बन गया ठग

Fri, 24 Nov 2023 08:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो नीलांबुज मिश्रा, देवरिया।
नीलांबुज मिश्रा, देवरिया। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 24 Nov 2023 08:41 AM IST
सार

राजीव तिवारी ने गांव से गोरखपुर तक ऐसा भौकाल बनाया कि लोगों को यह विश्वास हो गया कि वह नौकरी दिला सकता है। गांव के एक युवक ने राजीव का फेसबुक अकाउंट दिखाया। इसपर उसने गोरखपुर के एक दरोगा और कई सफेदपोशों के साथ फोटो डाल रखी है।

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Father had sent him to become IAS, after going to Delhi he became a thug
बाएं ठग राजीव तिवारी के साथ दरोगा और दाएं गांव में बना दो मंजिला मकान। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एम्स में ठेका दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप में पकड़ा गया राजीव अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। दुनिया छोड़ चुके पिता का सपना बेटे को आईएएस बनाना था, ताकि परिवार का नाम रोशन हो सके। राजीव ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की तो उन्होंने इसी सपने के साथ उसे तैयारी करने दिल्ली भेज दिया था। लेकिन, यहां सफलता नहीं मिली तो वह गलत रास्ते पर चल निकला। ठग दंपती के जेल जाने के बाद भी गांव में चर्चाएं कम नहीं हुई हैं।

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राजीव तिवारी मईल थाना क्षेत्र के अंडिला गांव निवासी दिवंगत अखिलेश्वर तिवारी का इकलौता बेटा है। वह किसी कंपनी में काम करते थे और उनके व्यवहार तथा लगाव से गांव में उनका बहुत ही सम्मान था। गांव वालों ने बताया कि वह अपने जीवन में बहुत ही संघर्ष कर आगे बढ़ेे और बेटे को आईएएस बनाने का उनकी तमन्ना थी। इसीलिए राजीव को तैयारी करने के लिए उन्होंने दिल्ली भेजा था। लेकिन राजीव उनके सपनों को पूरा नहीं कर सका।
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इसके बाद ही वह गलत तरीकों से रुपये कमाने लगा। गोरखपुर में मकान बनवा लिया। वहीं पर परिवार के साथ रहता था। पांच साल पूर्व पिता के निधन के बाद राजीव का गांव पर आना-जाना शुरू हुआ। लेकिन, पुराना मकान खंडहर होने के कारण वह वहां रुकता नहीं था। एक साल पूर्व बरठा चौराहा से बरेजी जाने वाली सड़क पर गांव में ही राजीव ने दो मंजिला मकान बनवाया। गांव में लोग राजीव की आय का कोई स्रोत नहीं जानते थे। ऐसे में उन्हें उसके मकान बनवाने पर अचरज भी हुआ। इसी बीच राजीव त्योहारों पर गांव आने-जाने लगा।
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करीब दो साल पूर्व पट्टीदारी के चार युवकों से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये एम्स में नौकरी लगाने के लिए ले लिए थे। छह माह तक नौकरी नहीं लगी तो रुपये वापस कर दिए। दंपती के जेल जाने के बाद गांव वालों को जब सच्चाई का पता चला तो लोग हैरान हो गए।

सबका यही कहना था कि उसने पिता की कमाई इज्जत मिट्टी में मिला दी। साथ ही गांव की भी बदनामी हो रही है। बरहज सीओ राजेश सिंह ने बताया कि गोरखपुर में दंपती पर गैंगस्टर की कार्रवाई हुई थी। घर से पुलिस टीम गिरफ्तार कर ले गई। काफी छानबीन कराई गई। ठगी का कोई स्थानीय मामला सामने नहीं आ रहा है। वैसे इसका पता पुलिस लगा रही है।

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गांव में बड़ा बनने का था शौक, छठ पूजा में जलाए थे 25 हजार के पटाखे
राजीव जब गांव आता था तो उसके दरवाजे पर गांव के अधिकांश युवकों का जमावड़ा होता था। दावतों का दौर चलता था और काजू कतली भी खिलाता था। छठ पर्व पर अपने परिवार के साथ गांव पर आया था। गांव वालों ने बताया कि छठ पूजा के दिन 25 हजार का पटाखा राजीव ने फोड़ा। उसे गांव में बड़ा बनने का शौक था।

गांव में किसी जरूरत मंद की शादी विवाह में आर्थिक मदद भी करता था। ठगी के पेशे से गांव में कई जगह जमीन भी बैनामा कराई है। बताया कि पिता की ससुराल सिवान जिले के लद्दी शराणी गांव में है। वहां पर नेवासा मिला है। वहां भी इसकी अच्छी खासी जमीन है। इसके अलावा कई शहरों में घर होने की बात गांव वालों ने कही।

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दिल्ली में तैयारी के दौरान शिप्रा से बढ़ी करीबी

देवरिया जिले की रहने वाली शिप्रा तिवारी गोरखपुर से पॉलीटेक्निक की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली में आईएएस की तैयारी करने गई थी। राजीव और शिप्रा के बीच वहीं पर नजदीकियां बढ़ीं और घर वालों तक यह मामला पहुंचा। देवरिया से ही दोनों की शादी घरवालों ने कराई। शिप्रा का मायका लार के नैनी डैनी गांव में है। लेकिन घर वाले देवरिया में मकान का निर्माण करा रहते हैं।

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गोरखपुर में तैनात एक दरोगा राजीव का है करीबी

राजीव तिवारी ने गांव से गोरखपुर तक ऐसा भौकाल बनाया कि लोगों को यह विश्वास हो गया कि वह नौकरी दिला सकता है। गांव के एक युवक ने राजीव का फेसबुक अकाउंट दिखाया। इसपर उसने गोरखपुर के एक दरोगा और कई सफेदपोशों के साथ फोटो डाल रखी है। गांव वालों ने बताया कि गोरखपुर में तैनात दरोगा राजीव का काफी करीबी है। वह कई बार गांव तक इसके साथ आया है। गोरखपुर जाने पर भी इसके आवास पर उसका आना जाना था।

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