{"_id":"5762e3a54f1c1bb26511ddbc","slug":"discrimination-in-drought-relief-to-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"'किसानों को सूखा राहत देने में भेदभाव' ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'किसानों को सूखा राहत देने में भेदभाव'
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Thu, 16 Jun 2016 11:06 PM IST
विज्ञापन
सलेमपुर तहसील में दूसरे दिन धरना देते माकपा नेता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गेहूं और धान की फसल बर्बादी का किसानों को मुआवजा देने की मांग को लेकर तहसील में चल रहा माकपा का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। लोगों ने केंद्र और प्रदेश सरकार को जहां किसान विरोधी बताया। वहीं अफसरों पर किसानों को सूखा राहत देने में भेदभाव का आरोप लगाया।
प्रेमचंद्र यादव ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण देश के किसान और मजदूरों की हालत दयनीय होती जा रही है। आपदा राहत और सूखा राहत की रकम अभी तक जिले के किसानों को पूर्ण रूप से नहीं मिल सकी है। सूखा राहत के लिए लेखपालों द्वारा बनाई जा रही किसानों की सूची में भेदभाव बरता जा रहा है। सूखा राहत की सूची में किसानों का नाम दर्ज करने के लिए लेखपाल रुपये की मांग कर रहे हैं। रुपये नहीं देने पर उन किसानों का नाम सूची में नहीं शामिल किया जा रहा है।
तहसील में जो भी नए लेखपाल आए है। वह सूखा राहत की सूची में नाम शामिल करने के लिए किसानों का सर्वाधिक शोषण कर रहे हैं। थाने और पुलिस चौकियों पर पहुंचने वाले पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा है। सर्किल के पुलिस चौकियों पर हो रही अवैध वसूली की जा रही है। इसमें थाने के प्रभारियों की संलिप्ता है। इस दौरान सतीश कुमार, हरेकृष्ण, नियाज, रामछठ्ठू, बदरी सिंह, रामनिवास आदि लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रेमचंद्र यादव ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण देश के किसान और मजदूरों की हालत दयनीय होती जा रही है। आपदा राहत और सूखा राहत की रकम अभी तक जिले के किसानों को पूर्ण रूप से नहीं मिल सकी है। सूखा राहत के लिए लेखपालों द्वारा बनाई जा रही किसानों की सूची में भेदभाव बरता जा रहा है। सूखा राहत की सूची में किसानों का नाम दर्ज करने के लिए लेखपाल रुपये की मांग कर रहे हैं। रुपये नहीं देने पर उन किसानों का नाम सूची में नहीं शामिल किया जा रहा है।
विज्ञापन
तहसील में जो भी नए लेखपाल आए है। वह सूखा राहत की सूची में नाम शामिल करने के लिए किसानों का सर्वाधिक शोषण कर रहे हैं। थाने और पुलिस चौकियों पर पहुंचने वाले पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा है। सर्किल के पुलिस चौकियों पर हो रही अवैध वसूली की जा रही है। इसमें थाने के प्रभारियों की संलिप्ता है। इस दौरान सतीश कुमार, हरेकृष्ण, नियाज, रामछठ्ठू, बदरी सिंह, रामनिवास आदि लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन