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सामूहिक हत्याकांड: मातहतों के कहे पर चले अफसर... हो गया कत्लेआम, आंखें मूंद भरोसा न करते तो जिंदा होते छह लोग

Sat, 07 Oct 2023 10:29 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 07 Oct 2023 10:29 AM IST
सार

देवरिया हत्याकांड में नया खुलासा हुआ है। अधिकारी मातहतों की रिपोर्ट पर आंखें मूंद कर भरोसा न करते तो हत्याकांड बच सकता था। निचले स्तर से गई रिपोर्ट पर अफसर विश्वास करते रहे। कभी खुद जांच की जहमत नहीं उठाई।

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Deoria Murder Case Officers continued to trust reports received from lower levels never check yourself
फतेहपुर गांव में चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस बल - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

समाधान दिवसों से लेकर आईजीआरएस तक सत्यप्रकाश दूबे की बार-बार शिकायतों पर अफसरों ने खुद संज्ञान लिया होता तो इतना बड़ा हत्याकांड होने से बच सकता था। फतेहपुर कांड के संबंध में शासन को भेजी गई रिपोर्ट में राजस्व कर्मियों और स्थानीय पुलिस की कई स्तर पर खामियां मिलीं हैं। 
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सामने आया है कि सभी शिकायतों का निस्तारण केवल कागज में ही कर रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी गई। यहां तक कि पाबंद करने के बाद भी निजी मुचलका तक नहीं भरवाया गया, वहीं पुलिस ने चालानी रिपोर्ट में भी खानापूर्ति कर दी। एक रिपोर्ट में तो यह भी बताया गया है कि शांति भंग में चालान किया गया है, लेकिन यह बात गलत निकली है। 
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इस पूरे मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों पर भरोसा कर अफसर भी फंसते नजर आ रहे हैं। फतेहपुर सामूहिक हत्याकांड के बाद राजस्व और पुलिस विभाग में व्यापक पैमाने पर हुई निलंबन और विभागीय कार्रवाई से अफरातफरी है। इस मामले में अधिकारियों को अपने मातहतों पर आंख मूंद कर विश्वास करना महंगा पड़ा। 
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अधिकांश अधिकारियों को आईजीआरएस के मामलों के निस्तारण में खामियां उजागर होने पर निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ रही है। 25 दिसंबर 2022 को जनसुनवाई पोर्टल की शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगाई है। इतना ही नहीं 60 दिन बाद चार मार्च को मौके पर कर्मचारियों को भेजा गया, जबकि मुख्यमंत्री से संदर्भित मामले जिले पर आने के बाद एसडीएम के माध्यम से जाते हैं और 15 दिन के भीतर ही निस्तारण कर दिया जाना चाहिए था।

इसी जांच की रिपोर्ट लगाने में दो एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, लेखपाल की लापरवाही मिली। समाधान दिवस पर जब उन्होंने फरियाद सुनाई तो तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक और हल्का दरोगा की मध्यस्थता से सुलह करा दी गई। राजस्व विभाग ने रिपोर्ट लगा दी। 

 

सत्यप्रकाश दूबे ने सात फरवरी 2023 को आईजीआरएस पर ज्ञान प्रकाश दूबे उर्फ साधुशरण के संपूर्ण हिस्से की जमीन प्रेम यादव और रामजी यादव ने 2014 में जबरन बैनामा खारिज कराने की शिकायत की थी। इसमें भी प्रभारी निरीक्षक ने भूमि संबंधी प्रकरण होने का हवाला देते हुए बताया कि मामला दीवानी न्यायालय में है। 

 

सत्यप्रकाश ने भूमि पैमाइश कराने के लिए आवेदन किया था। जिसका निस्तारण कोर्ट में मुकदमा होने का हवाला देकर कर दिया गया। इसके अलावा जांच रिपोर्ट में यह बताया गया है कि आईजीआरएस पर मिली शिकायतों की एसडीएम योगेश कुमार गौड़ ने समयबद्ध तरीका से जांच नहीं कराई और निचले स्तर से गलत रिपोर्ट लगा दी गई। 

 

सीओ जिलाजीत ने आईजीआरएस पर लंबित सत्यप्रकाश के जानमाल के खतरे के आवेदन को काफी दिनों तक लंबित रखा और हल्का सिपाही ने आवेदन पर आख्या दी कि जानमाल का कोई खतरा नहीं और न ही कोई विवाद है, जबकि विवाद प्रेम यादव से चला आ रहा था। 

 

जुलाई 2022 और फरवरी 2023 पर तहसील दिवस पर सत्यप्रकाश ने प्रार्थना पत्र देकर भूमि विवाद के निस्तारण की गुहार लगाई थी। इसमें लेखपाल ने प्रार्थना पत्र पर जांच कर रिपोर्ट लगा दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि ग्राम सभा की जमीन पर प्रेम यादव का कब्जा है। 

 

जब उनकी मां चिंता देवी ग्राम प्रधान थीं तभी से उन्होंने गांव के खलिहान, नवीन परती आदि पर अवैध कब्जा किया है। इसमें भी हल्का लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने गलत रिपोर्ट लगाई। इस पर एसडीएम ने भी आख्या रिपोर्ट लगाकर प्रमुख सचिव गृह को प्रेषित कर दिया।

इस लापरवाही के कारण हल्का लेखपाल से लेकर तीन एसडीएम, दो सीओ सहित दो कोतवाल को कार्रवाई झेलनी पड़ी। फतेहपुर कांड में रुद्रपुर के एसडीएम योगेश कुमार गौड़ और तहसीलदार केशव कुमार को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, इन दोनों अधिकारियों ने घटना के पांच दिन पहले ही कार्यभार ग्रहण किया था। 

 

आईजीआरएस के संदर्भों के निस्तारण में लापरवाही का उत्तरदायी पाए जाने पर पूर्व में एसडीएम रहे रामविलास, ओमप्रकाश, ध्रुव शुक्ला और संजीव कुमार उपाध्याय के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई चल रही है। वहीं, रिटायर्ड तहसीलदार वंशराज राम, अभयराज और रामाश्रय पर भी विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है।
 

ये है पूरा मामला

बता दें कि देवरिया जिले में रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गांव में सोमवार को सुबह छह बजे जमीन के विवाद में एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई। इससे गुस्साएं पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पक्ष के लोग दूसरे पक्ष के घर में घुसकर पति, पत्नी और उसके तीन संतानों को गोली मारकर और धारदार हथियार से प्रहार कर हत्या कर दी, जबकि एक बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया है।

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