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रुद्रपुर में संकट ,सूख गए आठ नदी और नाले
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Mon, 25 Apr 2016 10:53 PM IST
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रुद्रपुर में सिकुड़ रहा नदियों का दायरा
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वर्षा जल के संरक्षण को लेकर पीएम के मन की बात रुद्रपुर के लिए सबसे अहम बन गई है। यहां नदियों में जल की कमी के कारण बड़ा पर्यावरण संकट खड़ा हो गया है। आठ छोटी नदियां अपना अस्तित्व खो चुकी हैं वहीं दर्जनों नाले पाट कर खेत बना दिए गए। पांच साल से बरसात नहीं होने से बड़े ताल सिकुड़ते जा रहे हैं। पानी के बिना गांवों में छोटी पोखरियों में दरार फट गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जल संरक्षण के सारे कार्यक्रम कागजी ही साबित हो रहे हैं।
तमाम नदी और नालों से आच्छादित रुद्रपुर का इलाका देवरिया जिले का सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। नेपाल की पहाड़ी से जुड़ी राप्ती और गोर्रा नदियों से आधा दर्जन छोटी नदियां पूरे क्षेत्र बहती रही हैं। दस साल के अंदर राप्ती और गोर्रा से नदियों से निकली आठ नदियों का अस्तित्व समाप्त होने के कागार पर है। रुद्रपुर नगर से नगवा होकर गोरखपुर जिले के बड़हलगंज क्षेत्र में जाने के लिए छोटी-बड़ी सात नदियों को पार करना पड़ता था। इनमें से छह का नामोनिशान मिट चुका है। दो बड़ी नदियों राप्ती और गोर्रा में भी पानी कम होने के कारण लोग इसे पैदल चल कर पार कर सकते हैं।
कछार और दोआबा क्षेत्र में कटारी नाला, भगड़ा नाला, नकटा नाला,नकटवा नाला, सिहोरवा नाला, कठने नाला, किरही नाला और नकटा नाला का अस्तित्व मिट चुका है। इसके अलावा गोर्रा नदी से निकल कर राप्ती में मिलने वाली कुरना नदी, बथुआ नदी और मझने नाला जगह जगह सूख गया है। नालों के अलावा क्षेत्र के बड़े ताल तलैया भी सूख कर जल संकट का आहट दे रहे हैं। दोआबा का सबसे बड़ा हड़हा का ताल सूख कर एक चौथाई कम हो गया है।
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वहीं तरैनी और करुअना के ताल में पानी नहीं होने से दरार फट गए हैं। नालों को जोत कर लोग खेती करने लगे हैं। क्षेत्र में लगी भीषण के आग के बाद नदी नालों की अहमियत को लेकर नए सिरे चर्चा होने लगी है। आग्निकांड के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ी में पानी भरने को नालों के अस्तित्व मिटने के बाद कोसों दूर जाना पड़ा था।
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तमाम नदी और नालों से आच्छादित रुद्रपुर का इलाका देवरिया जिले का सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। नेपाल की पहाड़ी से जुड़ी राप्ती और गोर्रा नदियों से आधा दर्जन छोटी नदियां पूरे क्षेत्र बहती रही हैं। दस साल के अंदर राप्ती और गोर्रा से नदियों से निकली आठ नदियों का अस्तित्व समाप्त होने के कागार पर है। रुद्रपुर नगर से नगवा होकर गोरखपुर जिले के बड़हलगंज क्षेत्र में जाने के लिए छोटी-बड़ी सात नदियों को पार करना पड़ता था। इनमें से छह का नामोनिशान मिट चुका है। दो बड़ी नदियों राप्ती और गोर्रा में भी पानी कम होने के कारण लोग इसे पैदल चल कर पार कर सकते हैं।
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कछार और दोआबा क्षेत्र में कटारी नाला, भगड़ा नाला, नकटा नाला,नकटवा नाला, सिहोरवा नाला, कठने नाला, किरही नाला और नकटा नाला का अस्तित्व मिट चुका है। इसके अलावा गोर्रा नदी से निकल कर राप्ती में मिलने वाली कुरना नदी, बथुआ नदी और मझने नाला जगह जगह सूख गया है। नालों के अलावा क्षेत्र के बड़े ताल तलैया भी सूख कर जल संकट का आहट दे रहे हैं। दोआबा का सबसे बड़ा हड़हा का ताल सूख कर एक चौथाई कम हो गया है।
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वहीं तरैनी और करुअना के ताल में पानी नहीं होने से दरार फट गए हैं। नालों को जोत कर लोग खेती करने लगे हैं। क्षेत्र में लगी भीषण के आग के बाद नदी नालों की अहमियत को लेकर नए सिरे चर्चा होने लगी है। आग्निकांड के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ी में पानी भरने को नालों के अस्तित्व मिटने के बाद कोसों दूर जाना पड़ा था।