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एक हादसा, तबाह कर गया छह परिवार

Tue, 14 Feb 2017 11:07 PM IST
देवरिया
देवरिया Updated Tue, 14 Feb 2017 11:07 PM IST
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An accident, was destroyed six family
रामचन्द्र, फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
शोभित कुमार पांडेय
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संतकबीरनगर /देवरिया। बीमार की जिंदगी बचाने की जंग में एंबुलेंस से पीजीआई लखनऊ ले जाते दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर चुरेब ओवरब्रिज पर हुए हादसे में आठ जिंदगियां मौत की शिकार हो गईं। मरने वालों में भाटपाररानी के एक कुनबे से जुड़े छह लोग शामिल है। जबकि इस हादसे में अलग-अलग छह परिवार प्रभावित हुए।

देवरिया जिले के भाटपाररानी बाजार निवासी 65 वर्षीय रामचंद्र बरनवाल आठ भाइयों और दो बहनों में दूसरे नंबर के थे। दो फरवरी को उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ तो परिजन गोरखपुर के गोरखनाथ चिकित्सालय में भर्ती कराए। हालत बिगड़ने की दशा में चिकित्सकों ने पीजीआई लखनऊ के लिए रेफर किया।
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रात में चिकित्सालय की एंबुलेंस से ही मरीज रामचंद्र बरनवाल की जिंदगी बचाने के लिए उनके चौथे नंबर के भाई सुशील, छठे नंबर के भाई मनोज, मऊ के कोपागंज में ब्याही गई उनकी बेटी श्वेता पत्नी सुशील बरनवाल और रामपुर बीकानेर राजस्थान निवासी दामाद कमल पुगलिया, भाई मनोज के साले भीम बरनवाल निवासी इमौली नौतन बाजार जनपद सीवान बिहार लखनऊ जा रहे थे।
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राष्ट्रीय राजमार्ग पर चुरेब ओवरब्रिज पर खडे़ खराब ट्रक में एंबुलेंस घुस गई। इसमें एंबुुलेंस चालक बैजनाथ विश्वकर्मा निवासी हरपुर थाना फरेंदा जनपद महराजगंज और प्राइवेट कंपाउंडर जाहिदाबाद गोरखनाथ गोरखपुर निवासी हबीबुल्लाह समेत सभी की मौत हो गई।

भाटपाररानी निवासी एवं सहारा इंडिया बैंक में क्षेत्रीय फील्ड मैनेजर रंजीत बरनवाल और उनके भाई अनिल बरनवाल ने बताया कि वह आठ भाई और दो बहन थे। इस हादसे में उनके तीन सगे भाइयों की मौत हो गई। जबकि भाई मरीज रामचंद्र और उनकी बेटी श्वेता और दामाद कमल पुगलियां के अलावा भाई मनोज के चचेरे साले भीम बरनवाल भी मौत के शिकार हो गए। भाई रामचंद्र और मनोज अलग-अलग जनरल स्टोर चलाते थे। हादसे में मरी भतीजी श्वेता के पति सुशील बरनवाल विदेश रहते हैं और अभी 15 दिन पहले घर से विदेश गए हैं। भतीजी श्वेता की दो बेटियां मोना (14) और  मिली (10) हैं। एक साथ परिवार से जुडे़ छह लोगों की मौत से जो सुना वही दंग रह गया।

वहीं दूसरी तरफ एंबुलेंस चालक बैजनाथ विश्वकर्मा महराजगंज के फरेंदा क्षेत्र के हरपुर निवासी की मौत से नाते-रिश्तेदार सभी गमगीन थे। बैजनाथ चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनके भाई रघुनाथ, विश्वनाथ, प्रभुनाथ ने बताया कि पिता हरिराम विश्वकर्मा रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे और 2014 में वह सेवा निवृत्त हो गए थे। उनकी तीन बहने हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। मां बुधना देवी का बुरा हाल है। पोस्टमार्टम हाउस पर आए पिता हरिराम विश्वकर्मा गमगीन थे और पूछने पर यहीं बताए कि कलेजे के टुकड़े को हादसे ने छीन लिया।


जाहिदाबाद गोरखनाथ गोरखपुर निवासी कंपाउंडर हबीबुल्लाह की मौत पर परिवार के लोग गमगीन थे। यहां आए खुटहा बाजार निवासी उनके दामाद सलाहुद्दीन, भतीजे मोहम्मद लाडले, मंजर अली आदि ले बताया कि हबीबुल्लाह को रास्ते में मरीज को ड्रिप और  इंजेक्शन लगाने के लिए एंबुलेंस चालक ने बुलाया था। लेकिन हादसे में दूसरे की जिंदगी बचाने चले कंपाउंडर की भी मौत हो गई। इनके बेटे  शोएब, अहमद और चार बेटियां है। पत्नी समीउन का रो-रो कर बुरा हाल था।

 
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