{"_id":"6a4d44b3e806792b5f07505a","slug":"bus-station-change-passengers-are-upset-deoria-news-c-208-1-deo1009-186373-2026-07-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: बस स्टेशन बदहाल, यात्री होते हैं परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: बस स्टेशन बदहाल, यात्री होते हैं परेशान
विज्ञापन
बस स्टैंड
देवरिया। देवरिया का बस स्टेशन बदहाल है। इससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बड़ी मशक्कत के बाद बस स्टेशन के निर्माण को मंजूरी मिली, पर अभी तक निर्माण नहीं शुरू हुआ। इसके चलते जरूरी सुविधाएं भी यात्रियों को नहीं रहीं हैं। प्रतिदिन हजारों यात्रियों का सहारा परिवहन निगम का देवरिया बस स्टैंड अच्छे दिनों की बाट जोह रहा है।
बस स्टेशन में करीब 50 वर्ष पुराना एक दो मंजिला भवन बना हुआ था। इसमें स्टेशन अधीक्षक का कार्यालय, एसएसआई और कैश का कार्यालय का था। बगल में यात्री शेड था। इसे नया भवन बनाने से पहले ही तोड़ दिया गया। इस बात को करीब चार साल हो गए। पुराने भवन की जगह नया भवन नहीं बन पाया। परिवहन निगम ने 2022 में इस बस स्टैंड को परिवहन निगम के खर्च पर तैयार करने की योजना बनी। प्रस्ताव मुख्यालय भेज दिया गया। इस बीच परिवहन निगम ने अचानक से इसे पीपीपी मॉडल में बनाने का निर्णय ले लिया। इसके बाद से ही इसमें देरी होने लगी। इसके चलते यात्रियों को बस पकड़ने में परेशानी होने लगी। सर्दी, गर्मी या बारिश हर मौसम में उन्हें खुले में खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता था। करीब छह माह पहले पुराने भवन की जगह पर एक टिन शेड डाल दिया गया। चारों ओर से खुला होने के लिए शेड में बैठे यात्रियों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। परिसर में लगा नगरपालिका का आरओ प्लांट खराब है। इसकी टोटियां गायब हैं।
-- -- -- -- -- -- -- --
प्रतिदिन 36 हजार लोग करते हैं यात्रा
- बस स्टैंड से रोजाना करीब 36 हजार यात्री आते जाते हैं। यहां से लोग लखनऊ, कानपुर, दिल्ली समेत अनेक शहरों में लोग आते जाते हैं। बस स्टैंड से करीब 250 बसें प्रतिदिन संचालित होती हैं। इसके अलावा 30 अन्य डिपों की बसें भी यहां से होकर आती जाती हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए उचित संसाधन बस स्टैंड में नहीं हैं। एक टिन शेड का निर्माण किया गया है, जो चारों ओर से खुला है। इससे यात्रियों को मौसम की मार झेलना मजबूरी है।
विज्ञापन
बदहाल हो गया बस स्टैंड
- बस स्टैंड में स्वच्छता अभियान पूरी तरह से निष्प्रभावी है। यहां स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब है। टूटे कूड़ेदान, गंदे शौचालय, जगह जगह कूड़े के ढेर, बैठने वाले बेंचों के आस पास फैली गंदगी इसकी पहचान बन गई है। जरा सी बारिश में जलभराव हो जाता है। बस स्टैंड परिसर में नालियां जाम हैं, कीचड़ और कूड़े के ढेर पड़े रहते हैं। गोरखपुर के लिए बस पकड़ने वाले यात्रियों को बाहर रोड पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। पीने के पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है।
एआरएम के लिए पुराने बस स्टैंड बन रहा कार्यालय
- परिवहन निगम के जिले के सबसे बड़े अधिकार सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक का कार्यालय भी नहीं है। यह वर्कशाप के फोरमैन के लिए बने आवास में संचालित होता है। अब नया कार्यालय पुराने रोडवेज परिसर में बनाया जा रहा है। इसमें करीब 17 करोड़ की लागत से शापिंग कांम्लेक्स और शहर में आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग भी बन रहा है। यह अगले छह महीने में पूरा होने की उम्मीद है।
बस स्टैंड के लिए नए भवन का निर्माण पीपीपी मॉडल पर होना है। भवन के संबंध में अभी एक प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें सुनवाई चल रही है। इस मामले में अभी कुछ नहीं कह सकते। परिसर में साफ सफाई की व्यवस्था है। पीने के पानी के लिए मंदिर में आरओ प्लांट लगा हुआ है। नए शेड के पास एक सरकारी हैंडपंप भी है।
- कपिलदेव प्रसाद,
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक
विज्ञापन
बस स्टेशन में करीब 50 वर्ष पुराना एक दो मंजिला भवन बना हुआ था। इसमें स्टेशन अधीक्षक का कार्यालय, एसएसआई और कैश का कार्यालय का था। बगल में यात्री शेड था। इसे नया भवन बनाने से पहले ही तोड़ दिया गया। इस बात को करीब चार साल हो गए। पुराने भवन की जगह नया भवन नहीं बन पाया। परिवहन निगम ने 2022 में इस बस स्टैंड को परिवहन निगम के खर्च पर तैयार करने की योजना बनी। प्रस्ताव मुख्यालय भेज दिया गया। इस बीच परिवहन निगम ने अचानक से इसे पीपीपी मॉडल में बनाने का निर्णय ले लिया। इसके बाद से ही इसमें देरी होने लगी। इसके चलते यात्रियों को बस पकड़ने में परेशानी होने लगी। सर्दी, गर्मी या बारिश हर मौसम में उन्हें खुले में खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता था। करीब छह माह पहले पुराने भवन की जगह पर एक टिन शेड डाल दिया गया। चारों ओर से खुला होने के लिए शेड में बैठे यात्रियों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। परिसर में लगा नगरपालिका का आरओ प्लांट खराब है। इसकी टोटियां गायब हैं।
विज्ञापन
प्रतिदिन 36 हजार लोग करते हैं यात्रा
- बस स्टैंड से रोजाना करीब 36 हजार यात्री आते जाते हैं। यहां से लोग लखनऊ, कानपुर, दिल्ली समेत अनेक शहरों में लोग आते जाते हैं। बस स्टैंड से करीब 250 बसें प्रतिदिन संचालित होती हैं। इसके अलावा 30 अन्य डिपों की बसें भी यहां से होकर आती जाती हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए उचित संसाधन बस स्टैंड में नहीं हैं। एक टिन शेड का निर्माण किया गया है, जो चारों ओर से खुला है। इससे यात्रियों को मौसम की मार झेलना मजबूरी है।
विज्ञापन
बदहाल हो गया बस स्टैंड
- बस स्टैंड में स्वच्छता अभियान पूरी तरह से निष्प्रभावी है। यहां स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब है। टूटे कूड़ेदान, गंदे शौचालय, जगह जगह कूड़े के ढेर, बैठने वाले बेंचों के आस पास फैली गंदगी इसकी पहचान बन गई है। जरा सी बारिश में जलभराव हो जाता है। बस स्टैंड परिसर में नालियां जाम हैं, कीचड़ और कूड़े के ढेर पड़े रहते हैं। गोरखपुर के लिए बस पकड़ने वाले यात्रियों को बाहर रोड पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। पीने के पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है।
एआरएम के लिए पुराने बस स्टैंड बन रहा कार्यालय
- परिवहन निगम के जिले के सबसे बड़े अधिकार सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक का कार्यालय भी नहीं है। यह वर्कशाप के फोरमैन के लिए बने आवास में संचालित होता है। अब नया कार्यालय पुराने रोडवेज परिसर में बनाया जा रहा है। इसमें करीब 17 करोड़ की लागत से शापिंग कांम्लेक्स और शहर में आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग भी बन रहा है। यह अगले छह महीने में पूरा होने की उम्मीद है।
बस स्टैंड के लिए नए भवन का निर्माण पीपीपी मॉडल पर होना है। भवन के संबंध में अभी एक प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें सुनवाई चल रही है। इस मामले में अभी कुछ नहीं कह सकते। परिसर में साफ सफाई की व्यवस्था है। पीने के पानी के लिए मंदिर में आरओ प्लांट लगा हुआ है। नए शेड के पास एक सरकारी हैंडपंप भी है।
- कपिलदेव प्रसाद,
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक