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आखिर एक वीआईपी ठेकेदार पर मेहरबान क्यों हैं डूडा !

Sun, 19 Jan 2020 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2020 11:27 PM IST
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Benefit for contractor
आखिर वीआईपी ठेकेदार पर मेहरबान क्यों हैं डूडा!
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देवरिया। मुख्यमंत्री नगरीय अल्प विकसित एवं मलिन बस्ती विकास योजना अंर्तगत नाली निर्माण और इंटरलार्किंग के कार्यों में वीआईपी ठेकेदार पर विभागीय अफसर खास मेहरबान हैं। इसके पीछे जो भी वजह हो लेकिन आंकड़े बताते हैं कि वीआईपी ठेकेदार को दो वर्ष में तकरीबन साढ़े चार करोड़ का भुगतान किया गया है, जबकि अधिकांश सड़कें कागज में ही बनी हैं। इसकी शिकायत कुछ लोगों ने गोरखपुर में मुख्यमंत्री से भी की है। इसकी भनक लगते ही वीआईपी ठेकेदार की बेचैनी बढ़ गई है। उधर इस मामले में डूडा के अधिकारी स्पष्ट तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
मुख्यमंत्री नगरीय अल्प विकसित एवं मलिन बस्ती विकास योजना अंर्तगत नगरपालिका परिषद देवरिया, गौरीबाजार, सलेमपुर सहित अन्य नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों में निर्माण कार्य का टेंडर निकला। मजे की बात है कि अधिकतर इंटरलार्किंग सड़क निर्माण कार्यों का टेंडर एक वीआईपी ठेकेदार को ही दे दिया गया। आकंड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2018 में 26 निर्माण कार्यों के नाम पर वीआईपी ठेकेदार को तकरीबन दो करोड़ दस लाख 28 हजार और वर्ष 2019 में 25 सड़क एवं नाली निर्माण कार्य के नाम पर दो करोड़ 46 लाख 84 हजार से अधिक रुपये (करीब चार करोड़ 47 लाख) का भुगतान ठेकेदार को डूडा के अधिकारियों की मिलीभगत से कर दिया गया है। अन्य ठेकेदारों एवं लोगों का आरोप है कि अधिकांश सड़कें कागज में बनाई गई हैं। जो बनी भी हैं वह मानक के विपरीत हैं।
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ठेकेदारों का कहना है कि जो सड़क बनवाई गई हैं उनमें जीएसवी नहीं डाला गया है जिससे वह टूटने लगी है। जांच कराई जाए तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है। प्रश्न यह भी उठाया जा रहा है कि डूडा में किसी अन्य ठेकेदार को काम क्यों नहीं मिल रहा है। सिर्फ वीआईपी ठेकेदार को निर्माण कार्य सौंपने के पीछे आखिर खेल क्या है। एडीएम प्रशासन राकेश पटेल ने बताया कि ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो पूरा विवरण मंगाकर छानबीन कराई जाएगी। टेंडर नियमों के तहत ही होता है। एक ही ठेकेदार को कार्य मिला है तो इसकी सत्यता की जांच कराई जाएगी।
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