मताधिकार से सिस्टम ने किया वंचित
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लोकतंत्र की जिम्मेदारी निभाने शनिवार को दूसरे के सहारे बूथों तक पहुंचे बुजुर्ग वोटरों को मतदाता सूची में नाम न होने के चलते बुझे मन से लौटना पड़ा। इसको लेकर कई बूथों पर पीठासीन अधिकारियों और लोगों के बीच तकरार भी हुई।
बूथों पर पहुंच रहे जिम्मेदार अफसर भी वोटर लिस्ट की गड़बड़ी बता अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। वहीं मतदान करने से वंचित बुजुर्ग मतदाता अपनी लड़खड़ाती हुई जुबान से सरकारी सिस्टम को कोस रहे थे।
देवरिया उर्फ श्यामपुर गांव की रहने वाली 80 वर्षीय नूरजहां, 70 वर्षीय जिंतू निशा और नवलपुर गांव निवासी 70 वर्षीय वहाउद्दीन खान चलने में असमर्थ है।
दिन में 11 बजे दूूसरे के सहारे तीनों लोग घर से करीब आधा किमी दूर बूथों पर मतदान करने के लिए पहुंचे। बूथ पर एक घंटे इंतजार के बाद पीठासीन अधिकारी के पास लोग ले गए। मतदाता सूची देखने के बाद पीठासीन अधिकारी ने बताया कि दो लोगों का नाम मतदाता सूची से कट गया है और एक का मृत दर्शाया गया है।
इससे बुजुर्ग मतदाता मायूस हो गए।
बुजुर्गों ने बताया कि पांच साल पर एक बार मताधिकार का प्रयोग करने का मौका मिलता है। दूसरे के सहारे लोकतंत्र की जिम्मेदारी निभाने बूथों तक पहुंचे थे लेकिन सरकारी सिस्टम ने ही धोखा दे दिया, जिसका काफी मलाल है।
वहीं जिगिना मिश्र गांव के 65 वर्षीय बैजनाथ तिवारी को भी सूची से गायब होने पर वोट न डालने का मलाल था। इसके अलावा इन गांवों के 240 से अधिक युवा और महिलाओं का भी नाम मतदाता सूची से कट गया है जो अपने मताधिकार से वंचित रह गए।