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बैंक में धक्का-मुक्की, तीन महिलाएं बेहोश
देवरिया
Updated Fri, 02 Dec 2016 10:50 PM IST
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पंजाब नेशनल बैंक पथरदेवा में भीड़ में दबने से महिला की हालत गंभीर।
- फोटो : अमर उजाला
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बघौचघाट। कैश क्राइसिस दूर होने का नाम नहीं ले रहा है। भीड़ से तीन महिलाएं दब गईं। एक 90 साल की वृद्ध भी शामिल है। संयोग रहा कि ड्यूटी पर तैनात एक सिपाही की नजर पड़ गई। उसने भीड़ को किनारे का महिला को अस्पताल पहुंचाया। दो अन्य महिलाएं भी बेहोश हो गईं।
यह महिलाएं कई घंटे से लाइन में खड़ी थीं। पथरदेवा की स्टेट बैंक शाखा में शुक्रवार को भी कैश नहीं आया। लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। पथरदेवा की पीएनबी शाखा पर गौर कोठी की 90 वर्षीय दुर्गावती देवी सुबह से ही लाइन में लगी थीं। बैंक खुलने के बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई। वह भीड़ की चपेट में आ गईं, नीचे गिर गईं।
फिर धक्का-मुक्की नहीं रुकी। इसी बीच ड्यूटी पर तैनात एक सिपाही की वृद्ध पर पड़ी। उसने भीड़ को धकियाते हुए महिला को निकाला। वह बेहोश हो गईं थी। आनन-फानन में पीएचसी ले जाया गया। तीन घंटे बाद होश आया।
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हरफोड़ा की मैनूर खातून और रामनगर की तारा देवी भी बेहोश हो गईं। देर रात आठ बजे तक पथरदेवा पीएनबी में बैंक के कर्मचारियों ने कैश बांटें। रात में बाहर निकलते वक्त लोगों ने कर्मचारियों पर पत्थर भी फेंके। पीएनबी में करीब चार लाख खाताधारक हैं। नोट बंदी से पहले प्रतिदिन एक से डेढ़ करोड़ रुपये बांटे जाते थे। स्थानीय लोग रुपये निकालने की आस में भोर से ही बैंक के बाहर लाइन में लग जाते हैं।
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यह महिलाएं कई घंटे से लाइन में खड़ी थीं। पथरदेवा की स्टेट बैंक शाखा में शुक्रवार को भी कैश नहीं आया। लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। पथरदेवा की पीएनबी शाखा पर गौर कोठी की 90 वर्षीय दुर्गावती देवी सुबह से ही लाइन में लगी थीं। बैंक खुलने के बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई। वह भीड़ की चपेट में आ गईं, नीचे गिर गईं।
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फिर धक्का-मुक्की नहीं रुकी। इसी बीच ड्यूटी पर तैनात एक सिपाही की वृद्ध पर पड़ी। उसने भीड़ को धकियाते हुए महिला को निकाला। वह बेहोश हो गईं थी। आनन-फानन में पीएचसी ले जाया गया। तीन घंटे बाद होश आया।
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हरफोड़ा की मैनूर खातून और रामनगर की तारा देवी भी बेहोश हो गईं। देर रात आठ बजे तक पथरदेवा पीएनबी में बैंक के कर्मचारियों ने कैश बांटें। रात में बाहर निकलते वक्त लोगों ने कर्मचारियों पर पत्थर भी फेंके। पीएनबी में करीब चार लाख खाताधारक हैं। नोट बंदी से पहले प्रतिदिन एक से डेढ़ करोड़ रुपये बांटे जाते थे। स्थानीय लोग रुपये निकालने की आस में भोर से ही बैंक के बाहर लाइन में लग जाते हैं।