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मजहब के आधार पर राहत बांटने की शिकायत
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Sun, 12 Jun 2016 12:50 AM IST
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कृषि मंत्री राधामोहन ससिंह
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि यूपी में सूखा और ओलावृष्टि का मुआवजा लाभार्थियों तक नहीं पहुंच रहा है।
झांसी और मुरादाबाद के दौरे के दौरान किसानों की शिकायतें उन तक आईं थीं। मुरादाबाद में तो मजहब के आधार पर राहत बांटने की शिकायतें मिली हैं।
उन्हें विश्वास नहीं होता कि राज्य सरकार ऐसा करेगी। राज्य सरकार को संवेदनशील होना चाहिए। जाति और मजहब के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए।
वह शनिवार को लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। भेदभाव को लेकर उनके स्तर से उठाए गए कदम के सवाल को वे टाल गए। बोले, यह जनता को तय करना है।
उन्होंने पूर्व की यूपीए सरकार से मोदी सरकार के तुलनात्मक रिपोर्ट कार्ड पेश किया। कहा कि पूर्व की यूपीए सरकार में यूूपी को पांच वर्षों (2010-2015) के दौरान 1597.14 करोड़ रुपये दिए गए थे।
इसकी तुलना में मोदी सरकार ने (2015-2020) के लिए 3729 करोड़ रुपये आवंटित किया है। दो वर्षों और मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य को 1123.455 करोड़ दिए गए। इसी तरह राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया निधि से पूर्व की यूपीए सरकार से पांच सालों के दौरान यूपी सरकार ने 500.53 करोड़ रुपये मांगे थे। जिस पर 270.55 करोड़ मंजूर किया था।
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इसकी तुलना में मोदी सरकार से दो सालों में यूपी ने 15712 करोड़ रुपये मांगे हैं, जिस पर 4883.45 करोड़ रुपये मंजूर किया गया। पूर्वांचल में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना न होने के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि इसके लिए राज्य सरकार को अधिकार मिला है। यूपी में नेतृत्व के सवाल पर कहा कि उनका काम सरकार चलाना है, पार्टी चलाना नहीं। यह तय करने के लिए राज्य के लोगों के साथ प्रभारी नियुक्त हैं। उन्होंने यूपी, बिहार और बंगाल में मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम में रुचि न लेने पर अफसोस जताया।
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झांसी और मुरादाबाद के दौरे के दौरान किसानों की शिकायतें उन तक आईं थीं। मुरादाबाद में तो मजहब के आधार पर राहत बांटने की शिकायतें मिली हैं।
उन्हें विश्वास नहीं होता कि राज्य सरकार ऐसा करेगी। राज्य सरकार को संवेदनशील होना चाहिए। जाति और मजहब के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए।
वह शनिवार को लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। भेदभाव को लेकर उनके स्तर से उठाए गए कदम के सवाल को वे टाल गए। बोले, यह जनता को तय करना है।
उन्होंने पूर्व की यूपीए सरकार से मोदी सरकार के तुलनात्मक रिपोर्ट कार्ड पेश किया। कहा कि पूर्व की यूपीए सरकार में यूूपी को पांच वर्षों (2010-2015) के दौरान 1597.14 करोड़ रुपये दिए गए थे।
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इसकी तुलना में मोदी सरकार ने (2015-2020) के लिए 3729 करोड़ रुपये आवंटित किया है। दो वर्षों और मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य को 1123.455 करोड़ दिए गए। इसी तरह राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया निधि से पूर्व की यूपीए सरकार से पांच सालों के दौरान यूपी सरकार ने 500.53 करोड़ रुपये मांगे थे। जिस पर 270.55 करोड़ मंजूर किया था।
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इसकी तुलना में मोदी सरकार से दो सालों में यूपी ने 15712 करोड़ रुपये मांगे हैं, जिस पर 4883.45 करोड़ रुपये मंजूर किया गया। पूर्वांचल में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना न होने के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि इसके लिए राज्य सरकार को अधिकार मिला है। यूपी में नेतृत्व के सवाल पर कहा कि उनका काम सरकार चलाना है, पार्टी चलाना नहीं। यह तय करने के लिए राज्य के लोगों के साथ प्रभारी नियुक्त हैं। उन्होंने यूपी, बिहार और बंगाल में मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम में रुचि न लेने पर अफसोस जताया।