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14 घंटे बाद गड्ढे से निकाला श्याम सुंदर का शव

Sat, 13 Jul 2019 10:15 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2019 10:15 PM IST
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14 घंटे बाद गड्ढे से निकाला श्यामसुंदर का शव
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धमौली गांव के पास शुक्रवार की देर शाम गड्ढे में डूबे थे दो बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
लार। धमौली गांव के पास शुक्रवार की देर शाम गड्ढे में डूबे आठ वर्षीय श्यामसुंदर का शव 14 घंटे बाद बाहर निकाला गया। रातभर जाल डालकर ग्रामीण उसकी तलाश करते रहे। सुबह करीब आठ बजे शव बरामद हुआ। दूसरे बालक 12 वर्षीय करन का शव रात में ही मिल गया था। दोनों बच्चों की मौत से गांव में कोहराम मच गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शुक्रवार की शाम खेत की ओर गए करन गुप्ता और श्याम सुंदर मिट्टी निकालकर छोड़े गए गड्ढे में डूब गए थे। रात से ही ग्रामीण उनकी तलाश में जुटे थे। करीब 10 बजे करन का शव निकाला गया। श्यामसुंदर की तलाश में रात में ही ग्रामीणों ने गड्ढे में जाल डाल दिया था। बारिश के बीच पूरी रात तलाश चलती रही। इस दौरान परिजनों की चीख-पुकार से गांव में मातम छाया रहा। शनिवार की सुबह आठ बजे मछुवारों ने शव को बाहर निकाला। शव गांव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। देर शाम दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

मौत को मात नहीं दे पाया श्यामसुंदर
शव मिलने के साथ टूट गई परिजनों के किसी चमत्कार की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
लार। 14 घंटे की तलाश के बाद शनिवार की सुबह श्यामसुंदर का शव मिलते ही परिजनों की सारी उम्मीदें टूट गई। रातभर लोग ईश्वर से प्रार्थना करते रहे कि कहीं से भी कोई चमत्कार हो जाए और उनका लाड़ला मौत को मात देकर बाहर आ जाए। दुआओं-प्रार्थनाओं के बीच सुबह जैसे ही शव मिलने की सूचना मिली तो हर तरफ कोहराम मच गया। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव के एक निजी स्कूल का छात्र श्यामसुंदर पढ़ने में होनहार था। वह डॉक्टर बनना चाहता था। पिता धीरेंद्र पांडेय बिजली मकैनिक हैं। वह उनसे अक्सर कहता था कि बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा तो सारी परेशानी दूर कर देगा। उसकी लगन को देखकर ही स्कूल के बाद उसे घर में अतिरिक्त ट्यूशन कराया जा रहा था। बेटे की मौत से मां रीना देवी बदहवास थीं। उधर, उमेश गुप्ता के पुत्र करन के शव से लिपट कर विलाप कर रही मां मंजू देवी बार-बार बेहोश हो रही थीं। पिता उमेश गुप्ता गल्ला व्यापारी हैं। बेटे की इच्छा व्यवसायी बनने की थी। वह पढ़ाई के साथ पिता के कारोबार में भी हाथ बंटाता था।
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