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बकाया भुगतान के लिए दबाव डाल रही दवा कंपनियां
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:56 PM IST
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देवरिया। दवा कंपनियों का बकाया रकम का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर फर्म वर्करों और सीएमएस से आए दिन तकरार हो रही है। कई दवा कंपनियों ने कोर्ट से नोटिस जारी कराया है। अफसर बजट की कमी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
जिला अस्पताल में दवा की सप्लाई देने वाली 50 से अधिक दवा कंपनियों का 2.70 करोड़ रुपये करीब एक साल से बकाया है। दवा कंपनियों ने सप्लाई देना बंद किया तो दूसरे फर्म से अस्पताल प्रशासन ने दवा की खरीद शुरू कर दी। अस्पताल में कुछ जीवनरक्षक दवाइयों की कमी है। कई फर्म मालिकों ने कोर्ट से बकाया रकम वसूली के लिए नोटिस जारी कराया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने कोर्ट को बजट की कमी बताते हुए जवाब दिया है। बुधवार को पहुंचे दवा कंपनियों के वर्करों ने बकाए को लेकर सीएमएस और दवा स्टोर इंचार्ज से कहासुनी हुई। वर्करों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण भुगतान नहीं हो रहा है। दवा की सप्लाई बंद करने पर दूसरे फर्मों से दवा की खरीद शुरू कर दिया गया है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि बजट की कमी के चलते दवा कंपनियों का भुगतान बाकी है। विभागीय अफसरों को पत्र लिखा गया है। बजट आते ही भुगतान कर दिया जाएगा।
कोर्ट की नोटिस मिलने के बाद बढ़ी चिंताएं
मेरठ, मुजफ्फरपुर, आगरा समेत कई दवा कंपनियों ने भुगतान के लिए कोर्ट का शरण ली हैं। नोटिस मिलने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन की दिक्कतें बढ़ गई है। हालांकि बीच में कुछ बजट जिला अस्पताल को मिला था। स्टोर में तैनात कुछ कर्मचारियों ने चहेते फर्म को भुगतान कर दिया। इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन पर्ची की सप्लाई देने वाले का भी ढाई लाख बकाया है।
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जिला अस्पताल में दवा की सप्लाई देने वाली 50 से अधिक दवा कंपनियों का 2.70 करोड़ रुपये करीब एक साल से बकाया है। दवा कंपनियों ने सप्लाई देना बंद किया तो दूसरे फर्म से अस्पताल प्रशासन ने दवा की खरीद शुरू कर दी। अस्पताल में कुछ जीवनरक्षक दवाइयों की कमी है। कई फर्म मालिकों ने कोर्ट से बकाया रकम वसूली के लिए नोटिस जारी कराया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने कोर्ट को बजट की कमी बताते हुए जवाब दिया है। बुधवार को पहुंचे दवा कंपनियों के वर्करों ने बकाए को लेकर सीएमएस और दवा स्टोर इंचार्ज से कहासुनी हुई। वर्करों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण भुगतान नहीं हो रहा है। दवा की सप्लाई बंद करने पर दूसरे फर्मों से दवा की खरीद शुरू कर दिया गया है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि बजट की कमी के चलते दवा कंपनियों का भुगतान बाकी है। विभागीय अफसरों को पत्र लिखा गया है। बजट आते ही भुगतान कर दिया जाएगा।
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कोर्ट की नोटिस मिलने के बाद बढ़ी चिंताएं
मेरठ, मुजफ्फरपुर, आगरा समेत कई दवा कंपनियों ने भुगतान के लिए कोर्ट का शरण ली हैं। नोटिस मिलने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन की दिक्कतें बढ़ गई है। हालांकि बीच में कुछ बजट जिला अस्पताल को मिला था। स्टोर में तैनात कुछ कर्मचारियों ने चहेते फर्म को भुगतान कर दिया। इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन पर्ची की सप्लाई देने वाले का भी ढाई लाख बकाया है।
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