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स्कूल छोड़ चुकी किशोरियों का नामांकन कराने में पिछड़ गया जिला
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स्कूल छोड़ चुकीं किशोरियों का नामांकन कराने में पिछड़ा जिला
11 से 14 वर्ष की बालिकाओं के नामांकन की भी सूचना नहीं दे पाया विभाग
शासन ने जताई नाराजगी, अब सूचना भेजने की हो रही तैयारी
30 अप्रैल तक नामांकन पूरा करने का शिक्षा निदेशक ने दिए थे निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। स्कूल न जाने वाली जिले की 11 से 14 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को चिह्नित कर परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कराने की योजना जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। यह स्थिति तब है जब 30 अप्रैल तक यह प्रक्रिया पूरी कर शासन को इनके स्कूलों में नामांकन कराने की रिपोर्ट भेजनी थी। शासन ने भी देवरिया की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई है।
शैक्षिक सत्र 2019-20 में 11 से 14 वर्ष की ऐसी किशोरी का नामांकन परिषदीय स्कूलों में कराने का लक्ष्य रखा था, जो किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। परिषदीय के प्रधानाध्यापक को ऐसे परिवारों से संपर्क कर बालिकाओं को अपने यहां नामांकन करना था। शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह की ओर से जारी पत्र के अनुसार बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने पिछले साल 11 से 14 वर्ष आयु वर्ग की स्कूल न जाने वाली किशोरियों का सर्वेक्षण किया था। दिसंबर 2018 को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में कुल 5 लाख 12 हजार 888 ऐसी किशोरियां चिह्नित की गईं, जो स्कूल नहीं जातीं। इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए शासन ने ऐसी सभी किशोरियों का प्रवेश परिषदीय स्कूलों में कराने का निर्णय प्रदेश स्तर पर लिया। शासन ने बीएसए को जिला कार्यक्रम अधिकारी से संपर्क कर वह रिपोर्ट प्राप्त कर किशोरियों की जनपदवार स्थिति को जानकर उनका प्रवेश परिषदीय स्कूलों में कराने के निर्देश दिए थे। बीएसए ओमप्रकाश यादव ने बताया कि कुछ विकास खंड के प्रधानाध्यापकों ने ऐसी किशोरियों को चिह्नित कर अपने यहां नामांकन कराया है। शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए फाइनल सूची तैयार की जा रही है। सभी बीईओ से इस संबंध में अपडेट मांगा गया है।
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11 से 14 वर्ष की बालिकाओं के नामांकन की भी सूचना नहीं दे पाया विभाग
शासन ने जताई नाराजगी, अब सूचना भेजने की हो रही तैयारी
30 अप्रैल तक नामांकन पूरा करने का शिक्षा निदेशक ने दिए थे निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। स्कूल न जाने वाली जिले की 11 से 14 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को चिह्नित कर परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कराने की योजना जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। यह स्थिति तब है जब 30 अप्रैल तक यह प्रक्रिया पूरी कर शासन को इनके स्कूलों में नामांकन कराने की रिपोर्ट भेजनी थी। शासन ने भी देवरिया की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई है।
शैक्षिक सत्र 2019-20 में 11 से 14 वर्ष की ऐसी किशोरी का नामांकन परिषदीय स्कूलों में कराने का लक्ष्य रखा था, जो किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। परिषदीय के प्रधानाध्यापक को ऐसे परिवारों से संपर्क कर बालिकाओं को अपने यहां नामांकन करना था। शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह की ओर से जारी पत्र के अनुसार बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने पिछले साल 11 से 14 वर्ष आयु वर्ग की स्कूल न जाने वाली किशोरियों का सर्वेक्षण किया था। दिसंबर 2018 को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में कुल 5 लाख 12 हजार 888 ऐसी किशोरियां चिह्नित की गईं, जो स्कूल नहीं जातीं। इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए शासन ने ऐसी सभी किशोरियों का प्रवेश परिषदीय स्कूलों में कराने का निर्णय प्रदेश स्तर पर लिया। शासन ने बीएसए को जिला कार्यक्रम अधिकारी से संपर्क कर वह रिपोर्ट प्राप्त कर किशोरियों की जनपदवार स्थिति को जानकर उनका प्रवेश परिषदीय स्कूलों में कराने के निर्देश दिए थे। बीएसए ओमप्रकाश यादव ने बताया कि कुछ विकास खंड के प्रधानाध्यापकों ने ऐसी किशोरियों को चिह्नित कर अपने यहां नामांकन कराया है। शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए फाइनल सूची तैयार की जा रही है। सभी बीईओ से इस संबंध में अपडेट मांगा गया है।
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