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1998 और 2014 के बाद कांग्रेस को मिले सबसे कम वोट

Thu, 23 May 2019 11:07 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2019 11:07 PM IST
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1998 और 2014 के बाद कांग्रेस को मिले सबसे कम वोट
1998 और 2014 के बाद कांग्रेस को मिले सबसे कम वोट
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महज सवा पांच प्रतिशत वोट ही हासिल कर सके नियाज
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जिस कांग्रेस की कभी देवरिया में तूती बोलती थी, उसे इस बार के लोकसभा चुनावों में शर्मनाक पराजय झेलनी पड़ी। 1998 और 2014 के बाद यह तीसरा मौका है, जब कांग्रेस को सबसे कम वोट मिले हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी पार्टी प्रत्याशी सवा पांच प्रतिशत वोट पर ही सिमट गए।

वर्ष 2014 के चुनाव में नियाज अहमद 231114 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। तब वह बसपा के टिकट पर मैदान में थे। इस बार कांग्रेस ने उन पर दांव लगाया। पार्टी को उम्मीद थी कि मुस्लिम वर्ग से प्रत्याशी होने का लाभ अच्छे वोट प्रतिशत के रूप में उन्हें मिलेगा, जबकि नतीजा इसके एकदम उलट रहा। नियाज अहमद जमानत बचाने में नाकाम रहे। खास बात यह कि उन्हें प्राप्त वोट अब तक के इतिहास में कांग्रेस के हिस्से में आए सबसे कम वोटों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इससे पहले वर्ष 1998 में कांग्रेस प्रत्याशी गौकरन सिंह को महज 3.29 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि वर्ष 2014 में सभाकुंवर ने 3.89 प्रतिशत वोट पाया था। इस बार नियाज को सवा पांच प्रतिशत के करीब वोट हासिल हुए हैं। वर्ष 1999 में कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रभान ने 9.99 प्रतिशत वोट पाए थे। वर्ष 1977 की इमरजेंसी के बाद हो रहे चुनाव में भी प्रचंड विरोधी लहर के बावजूद कांग्रेस को 22.85 प्रतिशत वोट मिले थे।
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