{"_id":"59f4bac44f1c1b7a548b9963","slug":"141509210820-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागज में 30 माह से नए पोस्टमार्टम हाउस में हो रहा पीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागज में 30 माह से नए पोस्टमार्टम हाउस में हो रहा पीएम
Updated Sat, 28 Oct 2017 10:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। पोस्टमार्टम हाउस के लिए बना नया भवन 30 माह से कागज में चल रहा है। दो फर्मासिस्टों की तैनाती भी की गई है। हकीकत यह है आज भी जर्जर भवन में शवों का पोस्टमार्टम हो रहा है। इसकी वजह नए भवन में बिजली और पानी की सप्लाई नहीं होना बताया जा रहा है।
पुराना पोस्टमार्टम भवन जर्जर होने के कारण नए भवन का निर्माण 63 लाख रुपये की लागत से हुआ है। मार्च-2016 में कार्यदायी संस्था कॉरपोरेशन लिमिटेड ने भवन का कार्य पूर्ण कर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया और कागज में पोस्टमार्टम हाउस चालू हो गया। यहां पर पहली तैनाती फार्मासिस्ट शेषनाथ यादव की हुई। इनके स्थानांतरण के बाद अखंड प्रताप गौड़ और शैलेष तिवारी की तैनात हुई जो वर्तमान में पोस्टमार्टम हाउस पर कार्यरत हैं, लेकिन नए पोस्टमार्टम भवन के निर्माण में अनदेखी की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आठ माह पहले भवन में तीन एसी और पंखा लगा है। पानी की सप्लाई और बिजली का कनेक्शन नहीं होने के कारण आज भी पुराने भवन में शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। आरोप है कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से पोस्टमार्टम भवन निर्माण में लाखों रुपये का गोलमाल किया गया है। इसमें शामिल जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बजाए अफसर मामले को दबा रहे हैं। सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि बिजली कनेक्शन और पानी की सप्लाई के चलते नए भवन में शवों का पोस्टमार्टम कार्य शुरू नहीं किया गया है। नवंबर में नए भवन में पोस्टमार्टम होने लगेंगे।
विज्ञापन
पुराना पोस्टमार्टम भवन जर्जर होने के कारण नए भवन का निर्माण 63 लाख रुपये की लागत से हुआ है। मार्च-2016 में कार्यदायी संस्था कॉरपोरेशन लिमिटेड ने भवन का कार्य पूर्ण कर स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया और कागज में पोस्टमार्टम हाउस चालू हो गया। यहां पर पहली तैनाती फार्मासिस्ट शेषनाथ यादव की हुई। इनके स्थानांतरण के बाद अखंड प्रताप गौड़ और शैलेष तिवारी की तैनात हुई जो वर्तमान में पोस्टमार्टम हाउस पर कार्यरत हैं, लेकिन नए पोस्टमार्टम भवन के निर्माण में अनदेखी की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आठ माह पहले भवन में तीन एसी और पंखा लगा है। पानी की सप्लाई और बिजली का कनेक्शन नहीं होने के कारण आज भी पुराने भवन में शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। आरोप है कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से पोस्टमार्टम भवन निर्माण में लाखों रुपये का गोलमाल किया गया है। इसमें शामिल जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बजाए अफसर मामले को दबा रहे हैं। सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि बिजली कनेक्शन और पानी की सप्लाई के चलते नए भवन में शवों का पोस्टमार्टम कार्य शुरू नहीं किया गया है। नवंबर में नए भवन में पोस्टमार्टम होने लगेंगे।
विज्ञापन