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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में मशीन ब्रेक डाउन से 13 जांचें ठप
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मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी में ब्लड जांच को लेकर रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगी लाइन।संवाद
हर रोज करीब डेढ़ सौ लोग निराश लौट रहे, मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का लेना पड़ रहा सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज के सेंट्रल पैथाॅलाजी में हारमोनल मशीन ब्रेक डाउन हो गई है। इससे करीब 13 जांच ठप हो गई है। इसमें थायराइड की सभी जांच के अलावा इंसुलिन सहित अन्य जांच शामिल है। हर रोज तकरीबन डेढ़ सौ लोगों को निराश होना पड़ रहा है। उन्हें मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए छह सौ से तीन हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में हारमोनल मशीन के ब्रेक डाउन होने से दूर-दराज से आने वाले लोगों और गर्भवती को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। ओपीडी के विभिन्न विभागों में मरीजों को थायराइड सहित अन्य हारमोनल जांच डॉक्टर लिखते हैं। वहीं महिला अस्पताल में आने वाली अधिकांश गर्भवती महिलाओं की भी यह जांच कराई जाती है। हर रोज हर रोज करीब चार सौ मरीजों का जांच के लिए रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें सौ से अधिक मरीजों की थायराइड जांच होती है, जिसमें कुछ को थायराइड प्रोफाइल तो कुछ को अलग-अलग टीएसएच, टी3, टी4, एफटी3, एफटी4 जांच करानी होती है। इसके अलावा इंसुलिन के दस, एलएच, एफएसएच, प्रोलैक्टीन के 20, बेटा एचसीजी के पांच, टेस्टोस्टेरोन के दो, पैरीटनी के तीन, प्रोजेस्टोन व एएफपी की जांच के लिए दो-दो मरीज हर रोज आते हैं। इन दिनों जांच ठप होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। बिना जांच रिपोर्ट के डॉक्टर ठीक से इलाज नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरी में मरीजों को निजी पैैथालाजी सेंटरों से जांच करानी पड़ रही है, जहां इन जांचों की कीमत छह सौ से तीन हजार रुपये चुकानी पड़ रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है।
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तार कटने से आई दिक्कत
सेंट्रल पैथालाजी में हारमोन से संबंधित जांच के लिए मशीन स्थापित की गई है। पर चूहा के तार काटने से मशीन ठप हो जाती है। दो माह पहले भी तार कटने से जांच ठप थी। इससे पहले भी ढाई वर्ष पूर्व भी तार कट गया था। काफी दिनों तक मशीन पड़ रही। एक साल पहले बनकर आई।
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ये जांच नहीं हो रही
मेडिकल कॉलेज में मशीन खराब होने से थायराइड की टीएसएच, टी थ्री, टी फोर, एफटी थ्री, एफटी फोर, इंसुलिन, एलएच, एफएसएच, प्रोलैक्टीन, बेटा एचसीजी, टेेस्टोस्टेरोन, पैरीटीन, प्रोजेस्टोन, एएफपी जांच नहीं हो रही है।
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- पत्नी का इलाज कराने आया था। डॉक्टर ने ब्लड जांच कराने को कहा। पता चला कि थायराइड की जांच ठप है। दूर से फिर से जांच के लिए आना होगा। इससे परेशानी होगी।
प्रेम नारायण, इशारू
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ब्लड जांच कराने लिए एक घंटे में काउंटर पर पहुंची तो हारमोनल जांच मशीन खराब होने की जानकारी हुई। यहां पूरी जांच नहीं हो पा रही है। अब बाहर से जांच करानी मजबूरी है, तभी ठीक से इलाज हो पाएगा।
पूजा, भगवान चौहान
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सेंट्रल पैथालाजी में हारमोनल मशीन में खराबी आने से जांच प्रभावित हुई है। गड़बड़ी दूर कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जल्द मशीन ठीक हो जाएगा। इसके बाद इसके बाद जांच शुरू हो जाएगी।
डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज के सेंट्रल पैथाॅलाजी में हारमोनल मशीन ब्रेक डाउन हो गई है। इससे करीब 13 जांच ठप हो गई है। इसमें थायराइड की सभी जांच के अलावा इंसुलिन सहित अन्य जांच शामिल है। हर रोज तकरीबन डेढ़ सौ लोगों को निराश होना पड़ रहा है। उन्हें मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए छह सौ से तीन हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में हारमोनल मशीन के ब्रेक डाउन होने से दूर-दराज से आने वाले लोगों और गर्भवती को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। ओपीडी के विभिन्न विभागों में मरीजों को थायराइड सहित अन्य हारमोनल जांच डॉक्टर लिखते हैं। वहीं महिला अस्पताल में आने वाली अधिकांश गर्भवती महिलाओं की भी यह जांच कराई जाती है। हर रोज हर रोज करीब चार सौ मरीजों का जांच के लिए रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें सौ से अधिक मरीजों की थायराइड जांच होती है, जिसमें कुछ को थायराइड प्रोफाइल तो कुछ को अलग-अलग टीएसएच, टी3, टी4, एफटी3, एफटी4 जांच करानी होती है। इसके अलावा इंसुलिन के दस, एलएच, एफएसएच, प्रोलैक्टीन के 20, बेटा एचसीजी के पांच, टेस्टोस्टेरोन के दो, पैरीटनी के तीन, प्रोजेस्टोन व एएफपी की जांच के लिए दो-दो मरीज हर रोज आते हैं। इन दिनों जांच ठप होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। बिना जांच रिपोर्ट के डॉक्टर ठीक से इलाज नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरी में मरीजों को निजी पैैथालाजी सेंटरों से जांच करानी पड़ रही है, जहां इन जांचों की कीमत छह सौ से तीन हजार रुपये चुकानी पड़ रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है।
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तार कटने से आई दिक्कत
सेंट्रल पैथालाजी में हारमोन से संबंधित जांच के लिए मशीन स्थापित की गई है। पर चूहा के तार काटने से मशीन ठप हो जाती है। दो माह पहले भी तार कटने से जांच ठप थी। इससे पहले भी ढाई वर्ष पूर्व भी तार कट गया था। काफी दिनों तक मशीन पड़ रही। एक साल पहले बनकर आई।
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ये जांच नहीं हो रही
मेडिकल कॉलेज में मशीन खराब होने से थायराइड की टीएसएच, टी थ्री, टी फोर, एफटी थ्री, एफटी फोर, इंसुलिन, एलएच, एफएसएच, प्रोलैक्टीन, बेटा एचसीजी, टेेस्टोस्टेरोन, पैरीटीन, प्रोजेस्टोन, एएफपी जांच नहीं हो रही है।
- पत्नी का इलाज कराने आया था। डॉक्टर ने ब्लड जांच कराने को कहा। पता चला कि थायराइड की जांच ठप है। दूर से फिर से जांच के लिए आना होगा। इससे परेशानी होगी।
प्रेम नारायण, इशारू
ब्लड जांच कराने लिए एक घंटे में काउंटर पर पहुंची तो हारमोनल जांच मशीन खराब होने की जानकारी हुई। यहां पूरी जांच नहीं हो पा रही है। अब बाहर से जांच करानी मजबूरी है, तभी ठीक से इलाज हो पाएगा।
पूजा, भगवान चौहान
सेंट्रल पैथालाजी में हारमोनल मशीन में खराबी आने से जांच प्रभावित हुई है। गड़बड़ी दूर कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जल्द मशीन ठीक हो जाएगा। इसके बाद इसके बाद जांच शुरू हो जाएगी।
डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस