{"_id":"5ca0fb15bdec2213f413590e","slug":"11554053909-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांस गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बांस गांव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांसगांव: हर चुनाव में बदले हाथी के महावत
बसपा को बांसगांव में खाता खोलने की छटपटाहट : सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर। बांसगांव संसदीय क्षेत्र में हर चुनाव में महावत बदलने के बाद भी बसपा का खाता नहीं खुला। इस बार सपा-बसपा गठबंधन में सीट बसपा के खाते में गई है, लेकिन प्रत्याशी को लेकर उहापोह की स्थिति है। बसपा ने बस्ती के पूर्व विधायक दूधराम को बांसगांव का प्रभारी बना कर भेजा है, लेकिन टिकट की घोषणा नहीं होने से संशय बना है। तीन अप्रैल को प्रत्याशी के नाम की अधिकृत घोषणा की उम्मीद है।
बांसगांव में आठ बार कांग्रेस और पांच बार भाजपा जीत का परचम लहरा चुकी है। एक बार सपा, एक बार जनता पार्टी और एक बार सोशलिस्ट पार्टी का प्रत्याशी भी यहां से जीत चुका है। संसदीय क्षेत्र के परिसीमन के बाद भाजपा प्रत्याशी कमलेश पासवान लगातार दो बार संसद में पहुंचने के बाद तीसरी बार फिर ताल ठोंक रहे हैैं। बसपा ने वर्ष 1998 में इं.विक्रम प्रसाद को प्रत्याशी बनाया था। एक साल बाद 1999 के संसदीय चुनाव में विक्रम का टिकट काट कर सदरी प्रसाद को हाथी का महावत बना दिया गया। दोनों चुनाव में बसपा तीसरे स्थान पर रही और भाजपा के राजनरायण पासी ने जीत दर्ज की। वर्ष 2004 में बसपा ने यूपी सरकार के पूर्व मंत्री सदल प्रसाद को टिकट देकर मैदान में उतारा। इस बार वह 1,63,947 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के महावीर प्रसाद 1,80,388 वोट पाकर विजेता बने। वर्ष 2009 में संसदीय क्षेत्र के परिसीमन के कारण देवरिया की दो विधानसभा सीट रुद्रपुर और बरहज बांसगांव संसदीय क्षेत्र में आ गई। परिसीमन का तर्क देकर बसपा ने फिर उम्मीदवार बदल दिया। इस बार देवरिया के एमएलसी श्रीनाथ एडवोकेट को हाथी पर मैदान में उतारा गया, लेकिन श्रीनाथ भाजपा से पहली बार संसदीय चुनाव लड़ रहे कमलेश पासवान को मात नहीं दे पाए। कमलेश को 2,26,906 मत मिले, जबकि श्रीनाथ को 1,70,224 वोट मिले थे। 2014 के आम चुनाव में बसपा से सदल प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया, लेकिन मोदी लहर में भाजपा के कमलेश ने उन्हें काफी पीछे छोड़ते हुए ऐतिहासिक 4,17,959 लाख वोट पाये। बसपा को 2,28,443 मत मिले।
इनसेट में
बसपा के मंडल कोऑर्डिनेटर रामदरस कुशवाहा ने कहा कि बांसगांव संसदीय क्षेत्र में किसी भी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हुई है। यहां पूर्व विधायक दूधराम को प्रभारी बना कर भेजा गया है। प्रत्याशी के नाम पर चर्चा चल रही है। तीन अप्रैल को बांसगांव संसदीय क्षेत्र में प्रत्याशी के नाम की घोषणा हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बसपा को बांसगांव में खाता खोलने की छटपटाहट : सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर। बांसगांव संसदीय क्षेत्र में हर चुनाव में महावत बदलने के बाद भी बसपा का खाता नहीं खुला। इस बार सपा-बसपा गठबंधन में सीट बसपा के खाते में गई है, लेकिन प्रत्याशी को लेकर उहापोह की स्थिति है। बसपा ने बस्ती के पूर्व विधायक दूधराम को बांसगांव का प्रभारी बना कर भेजा है, लेकिन टिकट की घोषणा नहीं होने से संशय बना है। तीन अप्रैल को प्रत्याशी के नाम की अधिकृत घोषणा की उम्मीद है।
बांसगांव में आठ बार कांग्रेस और पांच बार भाजपा जीत का परचम लहरा चुकी है। एक बार सपा, एक बार जनता पार्टी और एक बार सोशलिस्ट पार्टी का प्रत्याशी भी यहां से जीत चुका है। संसदीय क्षेत्र के परिसीमन के बाद भाजपा प्रत्याशी कमलेश पासवान लगातार दो बार संसद में पहुंचने के बाद तीसरी बार फिर ताल ठोंक रहे हैैं। बसपा ने वर्ष 1998 में इं.विक्रम प्रसाद को प्रत्याशी बनाया था। एक साल बाद 1999 के संसदीय चुनाव में विक्रम का टिकट काट कर सदरी प्रसाद को हाथी का महावत बना दिया गया। दोनों चुनाव में बसपा तीसरे स्थान पर रही और भाजपा के राजनरायण पासी ने जीत दर्ज की। वर्ष 2004 में बसपा ने यूपी सरकार के पूर्व मंत्री सदल प्रसाद को टिकट देकर मैदान में उतारा। इस बार वह 1,63,947 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के महावीर प्रसाद 1,80,388 वोट पाकर विजेता बने। वर्ष 2009 में संसदीय क्षेत्र के परिसीमन के कारण देवरिया की दो विधानसभा सीट रुद्रपुर और बरहज बांसगांव संसदीय क्षेत्र में आ गई। परिसीमन का तर्क देकर बसपा ने फिर उम्मीदवार बदल दिया। इस बार देवरिया के एमएलसी श्रीनाथ एडवोकेट को हाथी पर मैदान में उतारा गया, लेकिन श्रीनाथ भाजपा से पहली बार संसदीय चुनाव लड़ रहे कमलेश पासवान को मात नहीं दे पाए। कमलेश को 2,26,906 मत मिले, जबकि श्रीनाथ को 1,70,224 वोट मिले थे। 2014 के आम चुनाव में बसपा से सदल प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया, लेकिन मोदी लहर में भाजपा के कमलेश ने उन्हें काफी पीछे छोड़ते हुए ऐतिहासिक 4,17,959 लाख वोट पाये। बसपा को 2,28,443 मत मिले।
विज्ञापन
इनसेट में
बसपा के मंडल कोऑर्डिनेटर रामदरस कुशवाहा ने कहा कि बांसगांव संसदीय क्षेत्र में किसी भी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हुई है। यहां पूर्व विधायक दूधराम को प्रभारी बना कर भेजा गया है। प्रत्याशी के नाम पर चर्चा चल रही है। तीन अप्रैल को बांसगांव संसदीय क्षेत्र में प्रत्याशी के नाम की घोषणा हो सकती है।
विज्ञापन