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धर्म न जात, बस विकास की बात
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- न मंदिर मुद्दे पर बोले और न आरक्षण पर रखी बात
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। जीआईसी ग्राउंड में बुधवार को आयोजित शिलान्यास समारोह चुनावी चाशनी में पगा हुआ था। नेताओं ने अपने भाषणों में भी इसका पूरा ख्याल रखा। लिहाजा न किसी जाति की कोई बात हुई और न ही धर्म का जिक्र हुआ। बस शुरू से अंत तक सभी ने अपने भाषण को विकास पर केंद्रित रखा। गरीब, दलित, शोषित और वंचित वर्ग के हितों की बात हुई तो उनके लिए सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख हुआ। आंकड़ों के जरिए जनप्रतिनिधि यह बताने से नहीं चूके कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में इस वर्ग की बेहतरी के लिए पिटारा खोल दिया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य के बेहतरी की बातें हुई तो किसानों की खुशहाली के लिए कृषि यंत्रों पर 80 फीसदी की छूट, धान और गन्ने की खरीद में सहूलियतों का भी जिक्र किया गया। मुख्यमंत्री ने तो अपने भाषण में भाजपा सरकार के कार्यकाल को राम राज्य की अवधारणा से भी जोड़ा। कहा कि अब देश-प्रदेश में जातिवाद नहीं, विकास और सुशासन कायम होगा। वृद्धा, विधवा, दिव्यांग पेंशन, राशन वितरण, आयुष्मान भारत जैसी अन्य योजनाओं का जिक्र करते हुए गरीब, वंचित, शोषित वर्ग को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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नीलांबुज मिश्र
देवरिया। जीआईसी ग्राउंड में बुधवार को आयोजित शिलान्यास समारोह चुनावी चाशनी में पगा हुआ था। नेताओं ने अपने भाषणों में भी इसका पूरा ख्याल रखा। लिहाजा न किसी जाति की कोई बात हुई और न ही धर्म का जिक्र हुआ। बस शुरू से अंत तक सभी ने अपने भाषण को विकास पर केंद्रित रखा। गरीब, दलित, शोषित और वंचित वर्ग के हितों की बात हुई तो उनके लिए सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख हुआ। आंकड़ों के जरिए जनप्रतिनिधि यह बताने से नहीं चूके कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में इस वर्ग की बेहतरी के लिए पिटारा खोल दिया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य के बेहतरी की बातें हुई तो किसानों की खुशहाली के लिए कृषि यंत्रों पर 80 फीसदी की छूट, धान और गन्ने की खरीद में सहूलियतों का भी जिक्र किया गया। मुख्यमंत्री ने तो अपने भाषण में भाजपा सरकार के कार्यकाल को राम राज्य की अवधारणा से भी जोड़ा। कहा कि अब देश-प्रदेश में जातिवाद नहीं, विकास और सुशासन कायम होगा। वृद्धा, विधवा, दिव्यांग पेंशन, राशन वितरण, आयुष्मान भारत जैसी अन्य योजनाओं का जिक्र करते हुए गरीब, वंचित, शोषित वर्ग को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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