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गांवों के सरहदी पत्थरों का होगा यूनिक कोड
Updated Fri, 11 Aug 2017 10:48 PM IST
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नीलांबुज मिश्र
देवरिया। गांवों के सरहदों पर लगे पत्थरों की अब यूनिक कोड होगी। इससे गांवों में सीमा लेकर बना भ्रम जहां खत्म होगा, वहीं पैमाइश में राजस्व कर्मियों को सहूलियत मिलेगी। जिन गांवों में सरहदी पत्थर नहीं हैं, वहां पैमाइश के बाद पत्थर लगेगा। राजस्वकर्मी इसके लिए सत्यापन कर रहे हैं।
जनपद में करीब 1100 गांव हैं। चकबंदी के बाद अधिकांश गांवों के सरहदों पर लगा पत्थर गायब हो चुका है। इसको लेकर दो गांवों के बीच सीमा विवाद की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा गांवों में पैमाइश के दौरान राजस्वकर्मी भी रकबा को लेकर परेशान होते हैं। शासन के निर्देश पर एक जुलाई से सरहदी पत्थरों को चिह्नित करने का कार्य चल रहा है। इसकी जिम्मेदारी लेखपालों को दी गई है। अफसरों की मानें तो गांव के सरहद पर लगा एक पत्थर दो या तीन गांव के सीमा तय करता है। चकबंदी के दौरान ये पत्थर लगे थे। अब जो भी पत्थर लगेंगे, उस पर नंबर होगा। इससे संबंधित गांव की सीमा नक्शा देखने के बाद राजस्वकर्मी बता देंगे। इससे जहां पैमाइश में सहूलियत मिलेगा, वहीं गांवों के बीच लंबे समय से उलझा सीमा विवाद खत्म होगा। इसके लिए 31 जुलाई तक का वक्त शासन की ओर से मिला था, लेकिन तय वक्त में काम पूरा नहीं हो सका। इसकी वजह लेखपालों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ होना बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो 500 से अधिक गांव ऐसे हैं जहां सरहदी पत्थर नहीं हैं। डीएम सुुजीत कुमार ने बताया कि जो तय वक्त था, वह बढ़ गया है। गांवों में सरहदों पर लगे पिलरों का यूनिक कोड मिलेगा। इसके लिए तेजी से कार्य कराया जा रहा है। कई चरणों में इस कार्य को बांटा गया है। बहुत जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
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देवरिया। गांवों के सरहदों पर लगे पत्थरों की अब यूनिक कोड होगी। इससे गांवों में सीमा लेकर बना भ्रम जहां खत्म होगा, वहीं पैमाइश में राजस्व कर्मियों को सहूलियत मिलेगी। जिन गांवों में सरहदी पत्थर नहीं हैं, वहां पैमाइश के बाद पत्थर लगेगा। राजस्वकर्मी इसके लिए सत्यापन कर रहे हैं।
जनपद में करीब 1100 गांव हैं। चकबंदी के बाद अधिकांश गांवों के सरहदों पर लगा पत्थर गायब हो चुका है। इसको लेकर दो गांवों के बीच सीमा विवाद की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा गांवों में पैमाइश के दौरान राजस्वकर्मी भी रकबा को लेकर परेशान होते हैं। शासन के निर्देश पर एक जुलाई से सरहदी पत्थरों को चिह्नित करने का कार्य चल रहा है। इसकी जिम्मेदारी लेखपालों को दी गई है। अफसरों की मानें तो गांव के सरहद पर लगा एक पत्थर दो या तीन गांव के सीमा तय करता है। चकबंदी के दौरान ये पत्थर लगे थे। अब जो भी पत्थर लगेंगे, उस पर नंबर होगा। इससे संबंधित गांव की सीमा नक्शा देखने के बाद राजस्वकर्मी बता देंगे। इससे जहां पैमाइश में सहूलियत मिलेगा, वहीं गांवों के बीच लंबे समय से उलझा सीमा विवाद खत्म होगा। इसके लिए 31 जुलाई तक का वक्त शासन की ओर से मिला था, लेकिन तय वक्त में काम पूरा नहीं हो सका। इसकी वजह लेखपालों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ होना बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो 500 से अधिक गांव ऐसे हैं जहां सरहदी पत्थर नहीं हैं। डीएम सुुजीत कुमार ने बताया कि जो तय वक्त था, वह बढ़ गया है। गांवों में सरहदों पर लगे पिलरों का यूनिक कोड मिलेगा। इसके लिए तेजी से कार्य कराया जा रहा है। कई चरणों में इस कार्य को बांटा गया है। बहुत जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
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