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बाबा बोले, अब कलेजे को मिली ठंडक

Sat, 14 Sep 2013 01:45 AM IST
अमर उजाला, बलिया
अमर उजाला, बलिया Updated Sat, 14 Sep 2013 01:45 AM IST
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damini family reaction on court verdict

बिटिया गैंगरेप कांड के चार आरोपियों को जैसे ही शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई गई, पीड़ित परिवारवालों के साथ ही गांववालों के कलेजे को भी ठंडक मिल गई।

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बिटिया के बाबा ने कहा कि फैसले में विलंब से उन्हें निराशा जरूर थी, लेकिन कोर्ट पर पूरा भरोसा था। जब चारों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई तो कलेजे को ठंडक मिली। बिटिया को खोने का गम तो है लेकिन सजा पर सुकून भी है।
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उन्होंने कहा कि नाबालिग आरोपी को तीन साल की सजा सुनाया जाना पर्याप्त नहीं है। चार दिन बाद वह दिल्ली जाकर बिटिया के माता-पिता से बात करेंगे और नाबालिग आरोपी को भी फांसी देने की मांग को लेकर ऊपरी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
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आरोपियों को सजा सुनाए जाने को लेकर बिटिया के गांव ही नहीं बल्कि पूरे जिले के लोगों में उत्सुकता बनी हुई थी। लोग सुबह से ही टीवी पर नजरें जमाए रहे। फैसला आते ही सुकून के भाव ला दिए। सबने यही कहा, आखिरकार इंसाफ हुआ।

बिटिया के बाबा ने कहा कि उनका परिवार कोर्ट के साथ-साथ देशवासियों का भी शुक्रगुजार है।

उनके मुताबिक, बिटिया को इंसाफ दिलाने की लड़ाई में जिस तरह से उनके परिवार को आमजनों का सहारा मिला, वे उसे कभी नहीं भूल सकते।

उधर बिटिया के चाचा ने कहा कि कोर्ट पर उन्हें पूरा भरोसा था और आखिरकार इंसाफ हुआ। उनका कहना था कि मामले के नाबालिग आरोपी को भी फांसी दी जाए, तभी बिटिया को पूरी तरह से इंसाफ मिल सकेगा।

साफ दिखा बिटिया के न होने का गम
बिटिया के न होने का गम भी परिजनों के चेहरे पर साफ नजर आया। फैसला सुनते ही बिटिया के दादा-दादी एवं चाचा-चाची की आंखों से न चाहते हुए भी आंसू छलक पड़े। गांववालों ने कहा, इस फैसले से बिटिया की आत्मा को तो शांति मिलेगी।


...तो जंतर-मंतर पर धरना देता
बिटिया के बाबा ने बताया कि फैसला सुनने के लिए वह दिल्ली जाने वाले थे। हालांकि बिटिया के पिता ने आने के लिए मना कर दिया। उनका कहना था कि आरोपियों को फांसी की सजा न सुनाए जाने पर उनका पूरा परिवार जंतर-मंतर पर धरना देने को विवश होता।

ऐतिहासिक है ये फैसला

फांसी का फंदा बनाने वाली देश की इकलौती सेंट्रल जेल, बक्सर के अधीक्षक सुरेंद्र कुमार अंबष्ट ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक है। उनकी यही कामना है कि यही फैसला आगे भी कायम रहे।

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