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दो गज जमीन के लिए भटकती रही लाश

Thu, 17 Jan 2013 08:53 AM IST
बागपत/इंटरनेट डेस्क
बागपत/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 17 Jan 2013 08:53 AM IST
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corpse was not allowed to be buried in upper caste's yard

दो गज जमीन का छोटा सा टुकड़ा ... बस यही चाहिए था उस अभागी लाश को लेकिन मतलबी दुनिया ने इसके लिए भी उसे तरसा दिया। अपनों के कंधों पर घंटों इधर से उधर भटकती रही लाश। झंझट हुआ, हल्ला-गुल्ला मचा। तब जाकर नसीब हुआ उसे आखिरी ठिकाना। यह लाश थी कस्सार बिरादरी की एक महिला की। उसे पहले मुगलपुरा कब्रिस्तान ले जाया गया। वहां उसे दफनाने नहीं दिया गया। बाद में उसे जगह मिली तो वेश्याओं के कब्रिस्तान में।

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मरने के बाद भी बिरादरी की बेड़ियां

इस अजीबो-गरीब मामले ने समाज की उस मानसिकता को एक बार फिर उजागर किया है, जिसमें बिरादरी की बेड़ियां जीते जी ही नहीं, मरने के बाद भी इंसान का पीछा नहीं छोड़तीं।
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मामला बागपत के माता कॉलोनी का है, जहां सलीम की पत्नी अख्तरी का बीमारी के चलते बुधवार इंतकाल हो गया था। उसकी लाश को दफनाने के लिए मुगलपुरा कब्रिस्तान ले जाया गया। वहां जैसे ही पता चला, आस पास के लोग पहुंच गए। उन्होंने कहा कि यहां कस्सार जाति के लोग दफन नहीं किए जा सकते। यह कब्रिस्तान ऊंची बिरादरी के लोगों के लिए है।
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इसके चलते अख्तरी का शव वहीं रखकर उसके परिवार के लोग पालिका चेयरमैन राजुद्दीन के पास पहुंचे। उन्होंने मुगलपुरा के लोगों को समझाया लेकिन नहीं माने। सब परेशान हो गए कि आखिर लाश कहां दफनाई जाएगी? इस पर चेयरमैन ने ही रास्ता निकाला। शहर में एक वेश्याओं का कब्रिस्तान है, जहां फिलहाल किसी बिरादरी के शव नहीं दफनाए जा रहे। आखिर में चेयरमैन की दखलअंदाजी के बाद अख्तरी की लाश को वहां दफनाया गया।

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