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उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक की चेतावनी, माल ढुलाई में लगे ट्रकों को बेवजह न रोकें पुलिसकर्मी

Thu, 02 Apr 2020 08:36 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 02 Apr 2020 08:36 PM IST
सार

  • ट्रक ऑपरेटर्स की शिकायत- पुलिस के रवैये से अभी भी जरूरी सामानों की सप्लाई में बाधा,
  • ड्राइवर-मजदूरों को 50 लाख का कोरोना बीमा देने पर सैद्धांतिक सहमति का दावा

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CoronaVirus: UP DGP issued orders to police officers to not to unnecessary harass the transport trucks
Truck drivers training - फोटो : सांकेतिक

विस्तार

लॉकडाउन के दौरान लोगों को जरूरी चीजों की दिक्कत न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने 29 मार्च को ही ट्रकों को आवश्यक सेवाओं के तहत मानते हुए पूरे देश में इनके आवागमन की अनुमति दे दी थी। लेकिन अनेक राज्यों में अनुमति को लेकर असमंजस के चलते अभी भी ट्रकों के आवागमन में बाधा आ रही है।

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यूपी पुलिस महानिदेशक ने एक दिन पहले एक अप्रैल को आदेश जारी कर जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मातहत पुलिसकर्मियों को सख्ती से कहें कि किसी भी तरह के माल की ढुलाई में लगे ट्रकों को बिना किसी बाधा के अपने गंतव्य तक जाने दें। इस आदेश में यह भी संकेत है कि अगर इसके बाद भी पुलिसकर्मियों ने बिना वजह ट्रक संचालकों को परेशान किया तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन प्रदीप सिंघल का कहना है कि कई राज्यों ने अपने यहां आवागमन की अनुमति दे दी है, लेकिन अभी भी कुछ राज्यों में ट्रकों के संचालन में बेवजह की दिक्कतें कम नहीं हो रही हैं।
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नेशनल लॉजिस्टिक्स टास्क फोर्स के प्रमुख परमेश्वरन अय्यर के साथ ट्रांसपोर्ट संगठनों की तीन दिन पहले हुई बैठक में ट्रक चालक, परिचालक और लोडिंग में लगे मजदूरों को भी डॉक्टरों की भांति बीमा देने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। जल्दी ही इस संदर्भ में घोषणा की जा सकती है।

इसके साथ ही ट्रक ऑपरेटर संगठनों को ही उनके मजदूरों को ई-पास जारी करने के अधिकार पर भी सहमति बन गई है। ये संगठन अपने तहत काम करने वाले मजदूरों को ई-पास जारी कर सकेंगे, जबकि ट्रक ड्राइवरों के लाइसेंस को ही पास मान लिया जायेगा।

सामान की ढुलाई नहीं हो रही

एक ट्रक ऑपेरटर राजेश कपूर के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण मजदूर यहां से चले गये हैं। अब उन्हें सामान ढुलाई के लिए हमाल भी नहीं मिल रहे हैं। इससे जरूरी सेवाओं में लगे ट्रकों को भी काम नहीं मिल पा रहा है।

सब्जियों की ढुलाई में लगे ट्रक ऑपरेटर भी इस समय खाली हो गये हैं क्योंकि सब्जियों की मांग घट गई है। उन्होंने बताया कि अनुमति को लेकर स्पष्टता के अभाव में तीन लाख से अधिक ट्रक रास्तों में खड़े हैं।

छोट दुकानदार भी नहीं खोल पा रहे दुकानें

वहीं, स्थानीय दुकानदारों की शिकायत है कि उनके पास जरूरी सामानों की कमी हो गई है। लक्ष्मीनगर के एक किराना व्यापारी संदीप के मुताबिक उन्हें पुलिस दुकान नहीं खोलने दे रही है। वे न तो सामान खरीद पा रहे हैं और न ही वे अपने ग्राहकों को बेच पा रहे हैं। जरूरी सेवाओं में होने के बाद भी उन लोगों को कामकाज नहीं करने दिया जा रहा है।

मंडी में मंदी

गाजीपुर सब्जी मंडी के चेयरमैन सत्यदेव प्रसाद ने बताया कि मंडी का कामकाज घटकर एक तिहाई रह गया है। मंडी में रोजाना 15 लाख किलोग्राम तक का कारोबार होता था, जो इस समय पांच लाख किलो तक रह गया है। आलू और प्याज जैसी प्रमुख सब्जियों के कारोबार में भी भारी गिरावट आई है।

आलू-प्याज के 25 से 30 ट्रक की रोजाना खपत अब तीन से चार ट्रक पर आकर रूक गई है। टमाटर की खपत में भारी कमी आई है। बाजार में हरी सब्जियों की सबसे ज्यादा कमी है। वहीं जो सब्जियां बाजार तक आ चुकी हैं, छोटे दुकानदारों के न आने के कारण मंडी में वह भी नहीं बिक रही हैं।

बाजार के इस रुख से किसानों ने मंडी तक आना बंद कर दिया है। वहीं मजदूरों का भारी संख्या में पलायन हुआ है। मजदूरों को रोकने के लिए मंडी के बड़े कारोबारी उन्हें अपने स्तर पर भोजन मुहैया करा रहे हैं। आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए मंडी में कामकाज बंद करने जैसा कोई फैसला नहीं किया गया है।

एफसीआई के कामकाज में तेज

जहां सामान्य बाजार में कामकाज कम हुआ है, वही गरीब लोगों को ज्यादा खाद्यान्न उपलब्ध कराने में जुटे भारतीय खाद्य निगम का कामकाज और अधिक बढ़ गया है। मंगलवार को एफसीआई ने 58 रेक्स के सामान की सप्लाई की, जो एक रिकॉर्ड है। यह लगभग 1.6 लाख टन गेंहू और चावल के रूप में किया गया।

सामान्य तौर पर एफसीआई 30 से 35 रेक्स सामान की सप्लाई करता है। इससे इस सेवा से जुड़े ट्रकों का कामकाज भी बढ़ गया है।

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