{"_id":"5745ec184f1c1b0420691d11","slug":"wind-strom-damge-stage-eorth-rs-50-lakh","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंधी-पानी से ढहा 50 लाख का पंडाल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंधी-पानी से ढहा 50 लाख का पंडाल
अमर उजाला ब्यूरो,चित्रकूट
Updated Wed, 25 May 2016 11:46 PM IST
विज्ञापन
आंधी पानी के बाद कथास्थल के मंच पर गिरी टेंट हाउस की सामग्री।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
तेज आंधी के साथ हुई बारिश से श्रीराम कथा का 50 लाख की लागत से बना विशाल पंडाल ढह गया। जिस समय आंधी आई, उस समय कथा चल रही थी और पंडाल में हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद थे।
आंधी और बारिश से बचने के लिए भक्तगण बाहर की ओर भागे जिसमें कई चुटहिल हो गए। संत मोरारी बापू भी बाल बाल बच गए।
उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन 11 बजे तेज आंधी आई जिसमें पूरा मंच और पंडाल हिलने लगा।
जिसे देखते हुए कथावाचक ने सभी श्रोताओं से पंडाल के बाहर जाने को कहा और खुद भी मंच से कथा विश्राम कर बाहर आ गए। इसी प्रक्रिया के दौरान पंडाल और मंच का एक हिस्सा ढह गया। जिसमें एक दर्जन श्रोताओं को चोटें आई।
मौके पर मौजूद एंबुलेंस से घायलों को जानकीकुंड अस्पताल लाया गया। सभी घायलों की हालत सामान्य बताई गई है।इधर पंडाल ढहते ही चटाई से कुटिया नुमा बनाया गया मंच पूरी तरह से नष्ट हो गया। आयोजकों ने तत्काल विद्युत आपूर्ति बंद करा दी।
विज्ञापन
पंडाल में लगे एसी, कूलर और कुर्सियां भी क्षतिग्रस्त हो गई। कई पंखे टूटकर गिर पड़े। इसी दौरान सहमे श्रोता सुरक्षित स्थान पर डेरा जमा लिए। घटना की जानकारी होने पर खुद संत मोरारी बापू श्रोताओं और आयोजकों के पास पहुंचे। सबका हालचाल जाना।
पंडाल ढहने के बाद उसे मरम्मत कराने का काम तेजी से शुरू हो गया है लेकिन यह तय है कि अब दो तीन के अंदर पंडाल नहीं बन सकता। जानकारी के अनुसार पंडाल व मंच की साजसज्जा में लगभग 50 लाख खर्च हुए थे।
आंधी और बारिश से बचने के लिए भक्तगण बाहर की ओर भागे जिसमें कई चुटहिल हो गए। संत मोरारी बापू भी बाल बाल बच गए।
उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन 11 बजे तेज आंधी आई जिसमें पूरा मंच और पंडाल हिलने लगा।
जिसे देखते हुए कथावाचक ने सभी श्रोताओं से पंडाल के बाहर जाने को कहा और खुद भी मंच से कथा विश्राम कर बाहर आ गए। इसी प्रक्रिया के दौरान पंडाल और मंच का एक हिस्सा ढह गया। जिसमें एक दर्जन श्रोताओं को चोटें आई।
विज्ञापन
मौके पर मौजूद एंबुलेंस से घायलों को जानकीकुंड अस्पताल लाया गया। सभी घायलों की हालत सामान्य बताई गई है।इधर पंडाल ढहते ही चटाई से कुटिया नुमा बनाया गया मंच पूरी तरह से नष्ट हो गया। आयोजकों ने तत्काल विद्युत आपूर्ति बंद करा दी।
विज्ञापन
पंडाल में लगे एसी, कूलर और कुर्सियां भी क्षतिग्रस्त हो गई। कई पंखे टूटकर गिर पड़े। इसी दौरान सहमे श्रोता सुरक्षित स्थान पर डेरा जमा लिए। घटना की जानकारी होने पर खुद संत मोरारी बापू श्रोताओं और आयोजकों के पास पहुंचे। सबका हालचाल जाना।
पंडाल ढहने के बाद उसे मरम्मत कराने का काम तेजी से शुरू हो गया है लेकिन यह तय है कि अब दो तीन के अंदर पंडाल नहीं बन सकता। जानकारी के अनुसार पंडाल व मंच की साजसज्जा में लगभग 50 लाख खर्च हुए थे।