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Chitrakoot News: वरिष्ठ कोषाधिकारियोंं के बयान में जांच टीम ने पकड़े कई झूठ
Sat, 17 Jan 2026 01:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 17 Jan 2026 01:03 AM IST
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चित्रकूट। 43.13 करोड़ रुपये के बहुचर्चित कोषागार घोटाला मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिलने के बाद नामजद रिटायर्ड सहायक कोषागार अधिकारी अवधेश प्रताप सिंह से एसआईटी ने चार घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान पहले तो उन्होंने अपने पटल से किसी भी अनियमित भुगतान से इन्कार किया लेकिन जब जांच टीम ने उनके कार्यकाल से जुड़े कई सबूत पेश किए, तो उन्होंने स्वीकारा। उन्होंने घोटाले में अपनी भूमिका की बात को नकारा है।
कोषागार घोटाला में अब तक 99 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, जिनमें से 35 आरोपी जेल में हैं। इनमें कोषागार विभाग के एटीओ विकास सचान और अकाउंटेंट अशोक भी शामिल हैं। हाल ही में, दो दिन पूर्व निलंबित वरिष्ठ कोषाधिकारी कमलेश और शैलेंद्र से भी एसआईटी ने पूछताछ की थी। शुक्रवार को जांच टीम ने रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह को फिर से तलब किया था। खुद को निर्दोष बताने पर जांच टीम ने उनके कार्यकाल के दौरान हुए ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल हस्ताक्षर के सबूत पेश किए, तो उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार व्यवहारिक प्रक्रिया के तहत भी काम हुए हैं और तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारियों पर दोष मढ़ा।
जांच टीम को वरिष्ठ कोषाधिकारियों कमलेश और शैलेंद्र के बयानों में विरोधाभास मिला है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान के एटीओ और अकाउंटेंट पर घोटाले की जानकारी न होने और फाइलों को केवल पटल से होकर आने पर स्वीकृति देने का आरोप लगाया था। एसआईटी ने जब रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह से हुई पूछताछ के रिकॉर्ड का मिलान किया, तो पाया कि दोनों वरिष्ठ अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। अब टीम दोनों के बयानों का मिलान करने के लिए उन्हें आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। दोनों वरिष्ठ कोषाधिकारियों को चार दिन के भीतर उपस्थित होने का निर्देश दिए हैं।
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पूरे मामले पर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि एसआईटी की जांच में तेजी आई है। सभी बयानों का मिलान किया जा रहा है ताकि कोई भी महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए। शुक्रवार को भी कई आरोपियों से भुगतान की प्रक्रिया और डिजिटल हस्ताक्षर के संबंध में पूछताछ की गई।
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जमानत याचिका खारिज
चित्रकूट। नेउरा निवासी पेंशनर जगतनारायण के खाते में कोषागार विभाग से 50 लाख 51 हजार 654 रुपये भेजे गए थे, जिसे उन्होंने 16 बार में निकाल लिया। इस मामले में जिला जज शेषमणि ने खारिज कर दी।
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कोषागार घोटाला में अब तक 99 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, जिनमें से 35 आरोपी जेल में हैं। इनमें कोषागार विभाग के एटीओ विकास सचान और अकाउंटेंट अशोक भी शामिल हैं। हाल ही में, दो दिन पूर्व निलंबित वरिष्ठ कोषाधिकारी कमलेश और शैलेंद्र से भी एसआईटी ने पूछताछ की थी। शुक्रवार को जांच टीम ने रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह को फिर से तलब किया था। खुद को निर्दोष बताने पर जांच टीम ने उनके कार्यकाल के दौरान हुए ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल हस्ताक्षर के सबूत पेश किए, तो उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार व्यवहारिक प्रक्रिया के तहत भी काम हुए हैं और तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारियों पर दोष मढ़ा।
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जांच टीम को वरिष्ठ कोषाधिकारियों कमलेश और शैलेंद्र के बयानों में विरोधाभास मिला है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान के एटीओ और अकाउंटेंट पर घोटाले की जानकारी न होने और फाइलों को केवल पटल से होकर आने पर स्वीकृति देने का आरोप लगाया था। एसआईटी ने जब रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह से हुई पूछताछ के रिकॉर्ड का मिलान किया, तो पाया कि दोनों वरिष्ठ अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। अब टीम दोनों के बयानों का मिलान करने के लिए उन्हें आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। दोनों वरिष्ठ कोषाधिकारियों को चार दिन के भीतर उपस्थित होने का निर्देश दिए हैं।
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पूरे मामले पर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि एसआईटी की जांच में तेजी आई है। सभी बयानों का मिलान किया जा रहा है ताकि कोई भी महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए। शुक्रवार को भी कई आरोपियों से भुगतान की प्रक्रिया और डिजिटल हस्ताक्षर के संबंध में पूछताछ की गई।
जमानत याचिका खारिज
चित्रकूट। नेउरा निवासी पेंशनर जगतनारायण के खाते में कोषागार विभाग से 50 लाख 51 हजार 654 रुपये भेजे गए थे, जिसे उन्होंने 16 बार में निकाल लिया। इस मामले में जिला जज शेषमणि ने खारिज कर दी।