फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   The echo of the newspaper of Dalit women of Chitrakoot

चित्रकूट की दलित महिलाओं के अखबार की गूंज

Wed, 09 Feb 2022 12:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 12:21 AM IST
विज्ञापन
The echo of the newspaper of Dalit women of Chitrakoot
चित्रकूट के अखबार खबर लहरिया की संपादकीय टीम। - फोटो : BANDA
चित्रकूट। यहां की महिलाओं के बुंदेली बोली में शुरू किए गए अखबार खबर लहरिया पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘राइटिंग विद फायर’ ने बेस्ट डॉक्यूमेंट्री की श्रेणी में भारत की ओर से 94वें एकेडमी अवॉर्डिस में अपनी जगह बना ली है।
विज्ञापन

दुनिया के प्रतिष्ठित अवॉर्ड में से एक एकेडमी अवॉर्ड्स के इस साल के नॉमिनेशन का एलान हो गया है। डॉक्यूमेंट्री की श्रेणी में भारत की ओर से ‘राइटिंग विद फायर’ ने इस लिस्ट में अपनी जगह बना कर सभी को हैरान कर दिया है। थॉमस और सुष्मित घोष द्वारा निर्देशित ‘राइटिंग विद फायर’ दलित महिलाओं द्वारा संचालित भारत के एकमात्र समाचार पत्र खबर लहरिया के उदय का वर्णन करती है।
विज्ञापन

‘राइटिंग विद फायर’ मुख्य रिपोर्टर मीरा के नेतृत्व वाले दलित महिलाओं के महत्वाकांक्षी समूह की कहानी को दर्शाता है जो प्रासंगिक बने रहने के लिए प्रिंट से डिजिटल माध्यम पर स्विच करती हैं। खबर लहरिया को सन् 2009 के यूनेस्को साक्षरता पुरस्कार के लिये भी चुना गया था। यह पत्र दलित ग्रामीण महिलाओं द्वारा निरन्तर नामक अशासकीय संस्था के प्रोत्साहन से निकाला गया था जो अब इसी नाम से पोर्टल बन गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस अखबार को इलाके की बेहद गरीब, आदिवासी और कम-पढ़ी लिखी महिलाओं की मदद से निकाला गया था। संपादन और समाचार का पूरा काम महिलाएं करती थीं। ग्रामीण महिलाओं के इस अखबार में काम करने के लिए कम से कम आठवीं कक्षा पास होना जरूरी था, लेकिन नवसाक्षर भी जुड़े।
इस अखबार और अब पोर्टल में सभी तरह की खबरें होती हैं लेकिन पंचायत, महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास की खबरों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। समाचार स्थानीय बुंदेली बोली में और बड़े अक्षरों में छापे जाते थे, ताकि नवसाक्षर महिलाएं आसानी से पढ़ सकें। राजनीतिशास्त्र से मास्टर डिग्री ले चुकीं मीरा ने कहा कि संवाददाता के रूप में गांव की गरीब महिलाओं के जुड़ने का उनके परिवार व समाज के लोग ही विरोध करते थे लेकिन अब यह कम हो गया है।
अखबार का उद्देश्य नारीवादी आवाज को मीडिया में लाने, सदियों से चली आ रहीं कुप्रथाओं को रोकने, कुरीतियों और बाधाओं को पारकर ग्रामीण इलाकों की दलित-आदिवासी महिलाओं को पत्रकार के तौर पर स्थापित करने का रहा है। खबर लहरिया के पत्रकार अपने क्षेत्र में अन्याय की जांच और दस्तावेजीकरण करते हैं। वे स्थानीय पुलिस बल की अक्षमता पर सवाल उठाते हैं। जातीय और लिंग आधारित हिंसा के शिकार लोगों की सुनते हैं और उनके साथ खड़े होते हैं।

इस तरह बदलता गया स्वरूप
साल 2002 में शुरू हुआ यह अखबार 2015 तक निकलता रहा और 2016 में डिजिटल हो गया। यू ट्यूब भी एक माध्यम है। अखबार की प्रसार संख्या 4500 और पाठक संख्या करीब 20 हजार रही। मूल्य दो रुपये था।

चित्रकूट ः डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राइटिंग विद फायर’ ऑस्कर में नॉमिनेट

चित्रकूट ः डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राइटिंग विद फायर’ ऑस्कर में नॉमिनेट- फोटो : BANDA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed