{"_id":"58bd9a6f4f1c1b5d73dc4102","slug":"rampant-illegal-mining-is-not-surreptitious","type":"story","status":"publish","title_hn":"चोरी-छिपे नहीं धड़ल्ले से होता है अवैध खनन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चोरी-छिपे नहीं धड़ल्ले से होता है अवैध खनन
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Mon, 06 Mar 2017 10:50 PM IST
विज्ञापन
पत्थर तोड़ान के बाद भौंरी का पहाड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहाड़ों में अवैध रूप से पत्थर तोड़ान का काम चोरी से नहीं बल्कि धड़ल्ले से हो रहा है। भौंरी व भरतकूप क्षेत्र में दिखावटी पट्टाधारक जिस क्षेत्र में खनन के हकदार हैं वहां से अधिक तोड़ान गैर पट्टे वाले पहाड़ों में कर रहे हैं।
जिला प्रशासन के पास कागज में 45 लोगों के नाम पहाड़ों में खनन कराने के पट्टे हैं लेकिन इन दिनों इस काम में एक सैकड़ा से अधिक लोग दिन रात जुटे हैं। किसी भी दल की सरकार हो उसी दल के कार्यकर्ता बनने वाले कुछ ठेकेदार राजनीतिक आकाओं की शरण लेकर भौंरी से लेकर मानिकपुर तक के पहाड़ों को खोखला कर रहे हैं।
भरतकूप के बजनी, गाेंडा, रौली के पहाड़ों में भी यही स्थिति है। इन सभी स्थानों पर पहुंचने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी को पहुंचने में बडी कठिनाई होगी लेकिन पट्टाधारकों के वाहन व मजदूर धड्ल्ले से वहां पहुंचकर राजस्व की चोरी कराने में मदद करते हैं। क्षेत्र में बेरोजगारी होने से भी मजदूरों को कुछ काम भी मिल जाता है।
विज्ञापन
क्षेत्र में पहाड़ों में सर्वाधिक खनन बजनी पहाड़ में होता है। यहां छह पट्टेधारक हैं लेकिन डेढ़ दर्जन लोग अपनी मशीनों को लगाकर पत्थर तोडान करा रहे हैं। कुछ यही स्थिति भौंरी पहाड़ की भी है। जहां खुद को किसी राजनीतिक दल का सक्रिय कार्यकर्ता बताने वाला ठेकेदार निर्धारित पट्टे से अधिक क्षेत्र और दूसरे पहाड़ में भी पत्थर तोड़ान कर लाखों का चूना विभाग को लगा रहा है।
भरतकूप। क्षेत्र के पहाड़ों में ब्लास्टिंग होेने से आस-पास गांव के ग्रामीण रात को दहशत में आ जाते हैं। खासकर बजनी व रौली पहाड़ों में गैर पंजीकृत ठेेकेदार नियमों को ताक पर रखकर ब्लास्टिंग कराते हैं। स्थानीय राजकुमार ने बताया कि ब्लास्टिंग का लाइसेंस दो के नाम है लेकिन इन पहाड़ों में पत्थर तोड़ाने के लिए कई लोग चोरी से ब्लास्टिंग करा रहे हैं।
चित्रकूट। ब्लास्टिंग कई बार जानलेवा साबित हो चुकी है। एक फरवरी 2015 को बजनी पहाड़ में ही चोरी से हो रही ब्लास्ंिटग के दौरान रौली निवासी मजदूर लाला उर्फ दिलीप की मौत हो चुकी है और उसके साथ मौजूद रमेश कुमार गंभीर रूप से घायल हुआ था।
चित्रकूट। जिला खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार अवैध पत्थर तोड़ान की शिकायत मिली हैं। वहां तक पहुंचने के लिए जब टीम जाती है तो रास्ता बेहद उबड खाबड होने से आरोपी तक नहीं पहुंच पाते। जब टीम पहाड़ के पास पहुंचती है तो आरोपी भाग चुके होते हैं। दरअसल, पत्थर तोड़ान व अवैध ढुलान मामले में आधा दर्जन लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। पहाड़ाें में पट्टाधारकों का क्षेत्र चिह्नित कराने से कानूनी कार्रवाई ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकेगी।
विज्ञापन
जिला प्रशासन के पास कागज में 45 लोगों के नाम पहाड़ों में खनन कराने के पट्टे हैं लेकिन इन दिनों इस काम में एक सैकड़ा से अधिक लोग दिन रात जुटे हैं। किसी भी दल की सरकार हो उसी दल के कार्यकर्ता बनने वाले कुछ ठेकेदार राजनीतिक आकाओं की शरण लेकर भौंरी से लेकर मानिकपुर तक के पहाड़ों को खोखला कर रहे हैं।
विज्ञापन
भरतकूप के बजनी, गाेंडा, रौली के पहाड़ों में भी यही स्थिति है। इन सभी स्थानों पर पहुंचने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी को पहुंचने में बडी कठिनाई होगी लेकिन पट्टाधारकों के वाहन व मजदूर धड्ल्ले से वहां पहुंचकर राजस्व की चोरी कराने में मदद करते हैं। क्षेत्र में बेरोजगारी होने से भी मजदूरों को कुछ काम भी मिल जाता है।
विज्ञापन
क्षेत्र में पहाड़ों में सर्वाधिक खनन बजनी पहाड़ में होता है। यहां छह पट्टेधारक हैं लेकिन डेढ़ दर्जन लोग अपनी मशीनों को लगाकर पत्थर तोडान करा रहे हैं। कुछ यही स्थिति भौंरी पहाड़ की भी है। जहां खुद को किसी राजनीतिक दल का सक्रिय कार्यकर्ता बताने वाला ठेकेदार निर्धारित पट्टे से अधिक क्षेत्र और दूसरे पहाड़ में भी पत्थर तोड़ान कर लाखों का चूना विभाग को लगा रहा है।
भरतकूप। क्षेत्र के पहाड़ों में ब्लास्टिंग होेने से आस-पास गांव के ग्रामीण रात को दहशत में आ जाते हैं। खासकर बजनी व रौली पहाड़ों में गैर पंजीकृत ठेेकेदार नियमों को ताक पर रखकर ब्लास्टिंग कराते हैं। स्थानीय राजकुमार ने बताया कि ब्लास्टिंग का लाइसेंस दो के नाम है लेकिन इन पहाड़ों में पत्थर तोड़ाने के लिए कई लोग चोरी से ब्लास्टिंग करा रहे हैं।
चित्रकूट। ब्लास्टिंग कई बार जानलेवा साबित हो चुकी है। एक फरवरी 2015 को बजनी पहाड़ में ही चोरी से हो रही ब्लास्ंिटग के दौरान रौली निवासी मजदूर लाला उर्फ दिलीप की मौत हो चुकी है और उसके साथ मौजूद रमेश कुमार गंभीर रूप से घायल हुआ था।
चित्रकूट। जिला खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार अवैध पत्थर तोड़ान की शिकायत मिली हैं। वहां तक पहुंचने के लिए जब टीम जाती है तो रास्ता बेहद उबड खाबड होने से आरोपी तक नहीं पहुंच पाते। जब टीम पहाड़ के पास पहुंचती है तो आरोपी भाग चुके होते हैं। दरअसल, पत्थर तोड़ान व अवैध ढुलान मामले में आधा दर्जन लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। पहाड़ाें में पट्टाधारकों का क्षेत्र चिह्नित कराने से कानूनी कार्रवाई ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकेगी।