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टैंकर खरीद में ढिलाई
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Tue, 03 May 2016 12:17 AM IST
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खरगपुर गांव में हैंडपंप पर पानी के लिए जुटी ग्रामीणों की भीड़।
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जिला प्रशासन सूखे से निपटने के लिए दिन-रात काम करने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि आदेश के करीब एक माह के बाद भी जिले में 71 में से 36 टैंकरों की ही खरीद हुई। इसके अलावा 625 में से 310 चरही का ही निर्माण हो सका। तालाबों में भी पानी भराव का काम बेहद धीमा है।
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प्रदेश सरकार ने जब से बुंदेलखंड को सूखाग्रस्त घोषित किया है, तब से करोड़ों रुपये की योजनाएं इन जिलों के लिए स्वीकृत कर धन भी अवमुक्त हो चुका है। पहले फसल की कम पैदावार से किसान परेशान था अब, गर्मी बढ़ने और पेयजल संकट से लोग परेशान हैं।
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लगभग एक माह पूर्व डीएम मोनिका रानी ने मंदाकिनी भवन कालूपुर में प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायकों की बैठक कर पानी की समस्या से निपटने के लिए चरही निर्माण कराने के साथ ही चौदहवें वित्त से टैंकरों की खरीद करने के निर्देश दिए थे।
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इसके अलावा जरूरत के मुताबिक किराए के टैंकरों से पेयजल आपूर्ति कराने को कहा था। इस आदेश के एक माह पूरे होने वाले हैं और तापमान 46 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। पेयजल संकट दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। लेकिन अधिकारियों की ढिलाई का परिणाम है कि अभी तक आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 101 गांव में टैंकरों से आपूर्ति के लिए 71 टैंकर की खरीद होनी थी लेकिन अभी तक 36 की खरीद हुई है। 58 किराए के टैंकर संचालित हैं। इसके अलावा विभिन्न गांवों में 625 चरही बननी थी, जिसमें 310 का निर्माण कराया गया है।
रिकार्ड के मुताबिक, जरूरत वाले 1432 तालाबों में 549 में पानी भराया गया है। सरकारी काम की यही गति रही तो लक्ष्य पूरा करने में ही गर्मी बीत जाएगी। डीडीओ अजितेंद्र नारायण मिश्रा ने बताया कि सभी कर्मचारियों को लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वयं डीएम भी गांव गांव जाकर कार्य का निरीक्षण कर रहीं हैं। इसके लिए नोडल अधिकारियों की टीम बनी है, जो प्रतिदिन टैंकर खरीद व चरही निर्माण की जानकारी लेती है।