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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   Order to file lawsuit against 16 including two CDOs, two SDMs, BSA

दो सीडीओ, दो एसडीएम, बीएसए समेत 16 के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश

Tue, 14 Aug 2018 10:38 PM IST
दो सीडीओ, दो एसडीएम, बीएसए समेत 16 के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश
दो सीडीओ, दो एसडीएम, बीएसए समेत 16 के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश Updated Tue, 14 Aug 2018 10:38 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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चित्रकूट। स्कूल भवन निर्माण में साढ़े सात लाख रुपये गबन का आरोप सिद्ध होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज न कराना अधिक ारियों को महंगा पड़ गया है। अदालत ने दो सीडीओ, दो एसडीएम, बीएसए, पीडी, डीपीआरओ व बीडीओ समेत कुल 16 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश किया है।
 मंगलवार पहाड़ी थानाक्षेत्र के ममसी बुजुर्ग निवासी पूर्व प्रधान राजकुमार ने बताया कि सीजेएम कोर्ट में स्कूल भवन में घपला करने और फिर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज न करने के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। अधिवक्ता देवेंद्र पांडेय ने बताया कि सीजेएम कोर्ट से आदेश हुआ है कि तत्कालीन सीडीओ ए दिनेश कुमार(आईएएस), तत्कालीन सीडीओ जयप्रकाश पांडेय, वर्तमान एसडीएम राजापुर सुभाष यादव, एसडीएम दुर्गेश मिश्र, तत्कालीन बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा, तत्कालीन एबीएसए जितेंद्र सिंह, वर्तमान एबीएसए ओमप्रकाश मिश्रा, तत्कालीन परियोजना निदेशक मिश्रीलाल, बीडीओ शेरबहादुर सिंह, प्रधान दिनेश कुमार, पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार, तत्कालीन डीपीआरओ आरपी सिंह, एबीएसए विनोद पटेरिया, सत्येंद्र कुमार व रामप्रकाश के खिलाफ पहाड़ी थाने में रिपोर्ट दर्ज की जाए। शिकायतकर्ता के अनुसार गांव के बसंतपुर मजरे में पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन निर्माण में मिले साढ़े सात लाख रुपये का सही तरीके से प्रयोग न कर बंदरबांट का आरोप लगा है। जिसकी बार-बार शिकायत पर जांच में प्रधान व प्रधानाध्यापक के दोषी मिलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी एफआईआर दर्ज नहीं करा रहे थे।
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क्या है मामला
चित्रकूट। सन 2006-07 में पहाड़ी थानाक्षेत्र के ममसीबुजुर्ग के बसंतपुर मजरे में पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन निर्माण के लिए बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा सात लाख पचास हजार की धनराशि आवंटित की गई थी। जिसमें तत्कालीन प्रधान दिनेश कुमार व प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार की देखरेख में निर्माण हुआ था। पूर्व प्रधान राजकुमार ने निर्माण में घपला व मानक विहीन काम की शिकायत डीएम से लेकर सीडीओ व बीएसए से की थी। जिस पर जांच के आदेश हुए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार जांच में दोनों दोषी पाए गए थे और इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने आदेश हुए थे। आदेश के बावजूद एक साल तक एफआईआर नहीं कराई गई। जिससे उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में सीजेएम कोर्ट ने गबन मामले में दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज न कराने और भ्रष्टाचार में भूमिका संदिग्ध होने पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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