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Chitrakoot News: चित्रकूट में भाजपा का एमवाई फेल
Wed, 28 Oct 2026 11:57 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:57 PM IST
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चित्रकूट। भाजपा विधानसभा तक एमवाई यानी मोदी-योगी फॉर्मूले से जीतती आई है, लेकिन इलाहाबाद-झांसी स्नातक एमएलसी चुनाव में चित्रकूट ने एमवाई का नया मतलब लिख दिया।
यहां एम का मतलब महिला और वाई का मतलब युवा हो गया। इसी नए एमवाई ने भाजपा के अशोक राठौर को 27,663 वोटों से हराकर सपा के डॉ. मान सिंह यादव को विजय दिला दी।
आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 11,622 स्नातक मतदाता थे। 23 अक्तूबर को छह केंद्रों के 13 बूथों पर सिर्फ 5,293 वोटर ही पहुंचे। मतदान 45.54 फीसदी रहा। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर महिला वोटिंग की रही। पुरुष मतदान 49.99 फीसदी रहा, जबकि महिला स्नातक मतदान सिर्फ 33.50 फीसदी। यानी 100 में से 66 पढ़ी-लिखी महिलाएं घर बैठी रहीं।
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महिला सुनीता कहती हैं, हमें पुरानी पेंशन और नौकरी में सम्मान चाहिए, मगर उन्हें मिला नहीं। इसलिए स्नातक मतदाताओं ने सपा के डॉ. मान सिंह को प्राथमिकता दी। कर्वी के प्रदीप शुक्ला ने युवा अतिथि शिक्षकों की पीड़ा बताई।
बोले, हम युवा हैं, आठ से 10 हजार में पढ़ा रहे हैं। यूजीसी ने नेट-पीएचडी का जाल फेंका है, चार साल की डिग्री थोप दी। उम्र निकल रही है, भर्ती नहीं हो रही। नाराजगी ने परिणाम पर सीधा असर डाला।
झांसी में हुई मतगणना में पहला राउंड भाजपा 984 वोट से जीती थी। दूसरे राउंड में सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने बढ़त बना ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार अपनी झोली में बढ़त डालते रहे। घोषित नतीजे में सपा के मान सिंह ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों से हरा दिया।
यही वजह रही कि भाजपा का पुराना एमवाई फेल हो गया। राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों का कहना है, ग्रेजुएट चुनाव में लहर नहीं, अतिथि शिक्षक की पीड़ा और महिला की नाराजगी चलती है। चित्रकूट का यह परिणाम भविष्य के सियासी समीकरण बदल सकता है।
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मतदाता सूची में बरती लापरवाही, पड़ी भारी
चित्रकूट। झांसी-प्रयागराज स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा की हार के कई कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि जब स्नातक मतदाता सूची के लिए फॉर्म भराए जा रहे थे, तब भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने युवाओं से संपर्क ही नहीं किया। नए मतदाता बनाने में रुचि नहीं ली। जबकि सपा ने दो साल पहले से ही विधान परिषद चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। अपने समर्थक मतदाताओं से संपर्क कर फार्म भरवाए। इसका उसे सीधा फायदा मिला और जीत आसान हो गई।
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दिग्गजों को दी थी जिम्मेदारी, फिर भी हारी बाजी
चित्रकूट। भाजपा ने चुनाव घोषणा के साथ ही दोनों विधानसभाओं के लिए अलग-अलग प्रभारी बनाए थे। अन्य पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई। चित्रकूट विधानसभा से आरके सिंह पटेल को प्रभारी बनाया गया, जबकि मानिकपुर से पूर्व विधायक आनंद शुक्ला को जिम्मेदारी दी गई।
इसके अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी, लवकुश चतुर्वेदी और चंद्रप्रकाश खरे को क्लस्टर प्रभारी नियुक्त किया गया। जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र समेत कई बड़े नेता जिताने में लगे रहे। भाजपा प्रत्याशी के मतदाताओं को दर्शन तक नहीं हुए। इससे सत्ताधारी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी।
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यहां एम का मतलब महिला और वाई का मतलब युवा हो गया। इसी नए एमवाई ने भाजपा के अशोक राठौर को 27,663 वोटों से हराकर सपा के डॉ. मान सिंह यादव को विजय दिला दी।
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आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 11,622 स्नातक मतदाता थे। 23 अक्तूबर को छह केंद्रों के 13 बूथों पर सिर्फ 5,293 वोटर ही पहुंचे। मतदान 45.54 फीसदी रहा। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर महिला वोटिंग की रही। पुरुष मतदान 49.99 फीसदी रहा, जबकि महिला स्नातक मतदान सिर्फ 33.50 फीसदी। यानी 100 में से 66 पढ़ी-लिखी महिलाएं घर बैठी रहीं।
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महिला सुनीता कहती हैं, हमें पुरानी पेंशन और नौकरी में सम्मान चाहिए, मगर उन्हें मिला नहीं। इसलिए स्नातक मतदाताओं ने सपा के डॉ. मान सिंह को प्राथमिकता दी। कर्वी के प्रदीप शुक्ला ने युवा अतिथि शिक्षकों की पीड़ा बताई।
बोले, हम युवा हैं, आठ से 10 हजार में पढ़ा रहे हैं। यूजीसी ने नेट-पीएचडी का जाल फेंका है, चार साल की डिग्री थोप दी। उम्र निकल रही है, भर्ती नहीं हो रही। नाराजगी ने परिणाम पर सीधा असर डाला।
झांसी में हुई मतगणना में पहला राउंड भाजपा 984 वोट से जीती थी। दूसरे राउंड में सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने बढ़त बना ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार अपनी झोली में बढ़त डालते रहे। घोषित नतीजे में सपा के मान सिंह ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों से हरा दिया।
यही वजह रही कि भाजपा का पुराना एमवाई फेल हो गया। राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों का कहना है, ग्रेजुएट चुनाव में लहर नहीं, अतिथि शिक्षक की पीड़ा और महिला की नाराजगी चलती है। चित्रकूट का यह परिणाम भविष्य के सियासी समीकरण बदल सकता है।
मतदाता सूची में बरती लापरवाही, पड़ी भारी
चित्रकूट। झांसी-प्रयागराज स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा की हार के कई कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि जब स्नातक मतदाता सूची के लिए फॉर्म भराए जा रहे थे, तब भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने युवाओं से संपर्क ही नहीं किया। नए मतदाता बनाने में रुचि नहीं ली। जबकि सपा ने दो साल पहले से ही विधान परिषद चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। अपने समर्थक मतदाताओं से संपर्क कर फार्म भरवाए। इसका उसे सीधा फायदा मिला और जीत आसान हो गई।
दिग्गजों को दी थी जिम्मेदारी, फिर भी हारी बाजी
चित्रकूट। भाजपा ने चुनाव घोषणा के साथ ही दोनों विधानसभाओं के लिए अलग-अलग प्रभारी बनाए थे। अन्य पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई। चित्रकूट विधानसभा से आरके सिंह पटेल को प्रभारी बनाया गया, जबकि मानिकपुर से पूर्व विधायक आनंद शुक्ला को जिम्मेदारी दी गई।
इसके अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी, लवकुश चतुर्वेदी और चंद्रप्रकाश खरे को क्लस्टर प्रभारी नियुक्त किया गया। जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र समेत कई बड़े नेता जिताने में लगे रहे। भाजपा प्रत्याशी के मतदाताओं को दर्शन तक नहीं हुए। इससे सत्ताधारी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी।