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मकर संक्रांति पर धर्मनगरी में लगेगा पांच दिवसीय मेला
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Thu, 12 Jan 2017 10:58 PM IST
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भरतकूप मेला स्थल के पास सज रही दुकानें व लग गए झूले
- फोटो : अमर उजाला
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मकर संक्रांति पर्व पर धर्मनगरी के प्रसिद्ध भरतकूप तीर्थ स्थल पर पांच दिवसीय मेला 14 जनवरी से शुरू होगा। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। मेले में दो दर्जन से अधिक गांव के लोगों का जमावड़ा होगा। इसके लिए दुकानें और झूले भी लग गए हैं। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने मेले के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दिए हैं लेकिन व्यवस्थाओं से स्थानीय लोग संतुष्ट नहीं है। खासकर सुरक्षा का सही इंतजाम न हुआ तोे श्रद्धालुओं व दुकानदारों को परेशानी का सामना उठाना पड़ सकता है।
भरतकूप तीर्थस्थल का रामचरित मानस में संत तुलसीदास नेअति पवित्र पावन जल जोगा भरतकूप कहिंहै सब भोगा...की चौपाई में मेला व महत्व को बताया है। जिसका भावार्थ है कि जब भगवान राम वनवास काल में चित्रकूट में थे तो उन्हें मनाने भरत चित्रकूट आये थे तो वह अपने साथ विभिन्न तीर्थों का जल लाए थे।
जब रामचंद्र जी ने अयोध्या जाने से इंकार किया तो गुरू वशिष्ठ ने इस जल को भरत से कूप में डालने के लिए कहा। अनादि काल से भरतकूप में मकर संक्रांति का मेला लगता रहा है। लेकिन प्रसिद्ध तीर्थ स्थल की उपेक्षा होने से यहां अभी विकास नहीं हो पाया। मकर संक्रांति मेले में प्रदेश के कई जनपदों से दुकानदार आते हैं।
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व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि मेला स्थल पर अतिक्रमण व मकान बन जाने से जगह नहीं रह गई है। जिससे मकान मालिक किराया लेते हैं। पिछले मेले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने दो बार मेला स्थल का दौराकर व्यापारियों की समस्या का निराकरण किया था। इस बार पहले से यह समस्या का समाधान न कराया गया तो सभी के लिए परेशानी हो सकती है।
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भरतकूप तीर्थस्थल का रामचरित मानस में संत तुलसीदास नेअति पवित्र पावन जल जोगा भरतकूप कहिंहै सब भोगा...की चौपाई में मेला व महत्व को बताया है। जिसका भावार्थ है कि जब भगवान राम वनवास काल में चित्रकूट में थे तो उन्हें मनाने भरत चित्रकूट आये थे तो वह अपने साथ विभिन्न तीर्थों का जल लाए थे।
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जब रामचंद्र जी ने अयोध्या जाने से इंकार किया तो गुरू वशिष्ठ ने इस जल को भरत से कूप में डालने के लिए कहा। अनादि काल से भरतकूप में मकर संक्रांति का मेला लगता रहा है। लेकिन प्रसिद्ध तीर्थ स्थल की उपेक्षा होने से यहां अभी विकास नहीं हो पाया। मकर संक्रांति मेले में प्रदेश के कई जनपदों से दुकानदार आते हैं।
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व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि मेला स्थल पर अतिक्रमण व मकान बन जाने से जगह नहीं रह गई है। जिससे मकान मालिक किराया लेते हैं। पिछले मेले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने दो बार मेला स्थल का दौराकर व्यापारियों की समस्या का निराकरण किया था। इस बार पहले से यह समस्या का समाधान न कराया गया तो सभी के लिए परेशानी हो सकती है।