झूठ का ढोल बजाती केंद्र सरकार: शिवपाल
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चित्रकूट। सूबे के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जानबूझकर प्रदेश सरकार की मदद नहीं करती और झूठ का ढोल बजाती है। बुंदेलखंड के सूखे के लिए प्रदेश सरकार ने सर्वाधिक काम किया है जबकि बुंदेलखंड से केंद्रीय मंत्री ने यहां के लिए कुछ नहीं किया। दावा किया कि बुंदेलखंड में अभी पानी का ज्यादा संकट नहीं है। संभावित संकट को देखते हुए जल संरक्षण की बेहद जरूरत है। विपक्षी बेवजह इसे मुद्दा बनाने में जुटे हैं। सभी जरूरत वाले स्थानों पर टैंकरों से आपूर्ति की जा रही है। अब तक किसानों के लिए केंद्र से स्वीकृत 7500 करोड़ में 2800 करोड़ से कुछ ज्यादा ही मिला है जबकि प्रदेश सरकार 2500 करोड़ का मुआवजा बांट चुकी है। खेत तालाब के लिए भी केंद्र ने स्वीकृत 32 करोड़ में महज 28 करोड़ ही दिए हैं और दिनरात ढिंढोरा पीटकर झूठ को सच साबित करने में जुटा है। जनता सारी सच्चाई जान चुकी है। 2017 के चुनाव में सपा ही दोबारा सरकार बनाएगी।
जिले में हुए विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण करने आए सूबेे के आधा दर्जन विभाग के मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कलेक्ट्रेट परिसर में पत्रकारों से कहा कि बदहाल बुंदेले के लिए प्रदेश सरकार का खजाना खुला है। राहत सामग्री के अलावा सूखे से निपटने के लिए चार माह का अब राशन भी दिया जाएगा। गांव के तालाबों की खुदाई और जल समस्या का समाधान कराने के लिए जिले के अधिकारियों को सचेत किया गया है। अभी जल समस्या का समाधान प्रदेश सरकार के पास है लेकिन आने वाले वर्षों में यह समस्या विकराल हो सकती है जिसके लिए जल संरक्षण का काम अभी से होना चाहिए। पत्रकारों के सवाल पर कहा कि केंद्र सरकार लगातार झूठा प्रचार कर उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने का काम कर रही है। मुआवजा वितरण और तालाब खुदाई के लिए स्वीकृत धनराशि नहीं दी गई है जबकि प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से की धनराशि सभी पात्रों को बांटी है। इसके बावजूद किसान व मजदूरों के लिए राहत के काम बंद नहीं होंगे। किसी भी योजना के क्रियान्वयन में अधिकारियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। विकास कार्यों के बल पर ही सपा फिर से प्रदेश में सरकार बनाएगी।
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कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने कहा कि लगातार राशन सामग्री वितरण और राशन कार्ड बनाने की शिकायतें मिल रहीं हैं। ऐसे में राशन सामग्री वितरण का काम सहकारी समितियों को भी दिया जा सकता है। इसके लिए कैबिनेट स्तर पर विचार कर फैसला लिया जाएगा।